उत्तराखंड का इस गायक को दिया जा सकता है ''पद्मश्री''

Thursday, January 11, 2018 2:03 PM
उत्तराखंड का इस गायक को दिया जा सकता है ''पद्मश्री''

देहरादून/ब्यूरो। उत्तराखंड के लोकगायक नरेंद्र सिंह नेेगी पद्म पुरस्कार की दौड़ में हैं। सूत्रों के अनुसार पद्म पुरस्कार तय करने वाली समिति में लगभग उनके नाम पर सहमति बन चुकी है, लेकिन पद्म पुरस्कारों की घोषणा एक साथ की जाती है। हालांकि नेगीजी ने इस तरह की कोई सूचना या जानकारी होने से इंकार किया है, लेकिन संस्कृति कला जगत के कुछ खास लोगों में इस बात को लेकर सुगबुगाहट है कि इस बार नरेन्द्र सिंह नेगी पद्म पुरस्कार से सम्मानित हो रहे हैं।

 

 

 नेगी का नाम उस समय देश और दुनिया में छा गया था जब उन्होंने  उत्तराखंड और उप्र के मुख्यमंत्री और कई बार केद्रीय मंत्री व राज्यपाल रहे नारायण दत्त तिवारी पर कटाक्ष करते हुए नौछमी नारायणा गीत सीडी और वीडियो रिलीज किया था। हालांकि बाद में नेगीजी ने रक्षात्मक रुख अपनाते हुए कहा था कि उन्होंने यह गीत किसी व्यक्ति विशेष पर नहीं लिखा था। 

 

नरेंद्र सिंह नेगी पौड़ी के रहने वाले हैं। लोक गायन में उनकी अपनी विशिष्ट पहचान है। उनके लोकगीत में उत्तराखंड का समाज पिछले चार दशक से मंत्रमुग्ध रहा है। नेगीजी के टिहरी डूबने पर लिखा गीत टिहरी डुबण लग्यू च, पर्यावरण पर लिखा ना काटा तौं डाल्यूं, जिदेरी घसेरी बोल्यूं मान, प्रकृति का डांडी काठ्यों का मुलक जैली, स्मृति यादों को आधार बनाकर लिखा, तुम्हरी खुद मा, सौण का मैना ब्वे कनुकै रैण, अपनी थाती को लेकर लिखा गीत  वीरों गढ़ो कू देश, मेले कौथिक को लेकर मेला खौलो मां  जैसे गीत लोगों की जुबान पर है। उन्होंने उत्तराखंड की लोक परंपरा जीवन ऋतु, त्यौहार, सुख-दुख, उल्लास, सैन्य परंपरा हर भाव के गीत रचे और गाए। उत्तराखंड आंदोलन में जनमानस ने उनके गीत प्रभात फेरियों में गाए। 

 

 

  रेखा धस्माना के साथ गाए युगल नयु नयु ब्यो च की अलग लहक है तो अनुराधा निराला के साथ गाए खुद कैसेट के गीत  सदाबहार हैं  मन को छूते हैं।  एक  समय रेडियो में सुने जाते थे। फिर लोक सांस्कृतकि मंचों में उनके आयोजन की धूम रही। अमेरिका, न्यूजीलैंड, दुबई कई देशों में उन्होंने अपने गीतों से लोगों को मत्रमुग्ध किया। नरेंद्र सिंह नेगी ने पहाड़ी गीतों पर और लोककाव्य पर किताब भी लिखी है। पिछले वर्ष वह गंभीर बीमारी से उभरे हैं, लेकिन स्वस्थ होते ही उन्होंने लोक काव्य मंचों पर गढ़वाली कविता पाठ शुरू किया है। चर्चा है कि लंबे समय के बाद वह फिर अपने गीतों को लेकर दिल्ली में  कार्यक्रम करने जा रहे हैं।



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