गर्म भाले और कोड़ों से की पिटाई, खाने के दी सूखी रोटी, 11 महीने खून के आंसू रोए 12 बंधुआ मजदूर, पढ़ें दिल दहलाने वाली पूरी घटना
punjabkesari.in Wednesday, Jun 24, 2026 - 12:25 PM (IST)
नेशनल डेस्क: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले से अमानवीयता और बंधुआ मजदूरी का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। तितावी थाना क्षेत्र के मंडी गांव में चल रही एक पेपर प्लेट बनाने वाली फैक्ट्री में छापेमारी कर प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम ने नाबालिगों सहित 12 बंधुआ मजदूरों को नरकीय जीवन से मुक्त कराया है। इस घटना के सामने आने के बाद से इलाके में काफी गुस्सा है। जानते हैं कि क्या है पूरा मामला है।
धोखे से जाल में फंसाया
मजदूरों के अनुसार उन्हें अंबाला से अच्छे वेतन, तीन वक्त के भोजन और चाय का लालच देकर मुजफ्फरनगर लाया गया था। लेकिन फैक्ट्री में कदम रखते ही उनका जीवन नरक बन गया। मजदूरों को 24- 24 घंटें तक खाना नहीं दिया जाता था। खाने के नाम पर उन्हें केवल सूखी रोटियां दी जाती थी। बंधुआ मजदूरों से उनके मोबाइल और फोन छीन लिए गए थे, ताकि वे अपने परिवार वालों से कोई संपर्क न रख सकें। उन्हें इस कैद में 11 महीने रखा गया। मजदूरों को भागने से रोकने के लिए फैक्ट्री परिसर में शिकारी कुत्ते तैनात किए गए थे।
गर्म भाले और कोड़ों से पिटाई
मुजफ्फरनगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) संजय कुमार ने बताया कि मुक्त कराए गए मजदूरों के शरीर पर बर्बरता और गंभीर चोटों के निशान हैं। पुलिस ने प्रताड़ना में इस्तेमाल होने वाले कई हथियार और औजार भी बरामद किए हैं। काम करने से मना करने पर या फिर थकने पर उन्हें गर्म भाले और कोड़ों से पीटा जाता था। इतना ही नहीं विरोध करने पर उनके कानों को गर्म भाले से काटा जाता था।
ऐसे मिली खौफनाक कैद से आजादी
इस दर्दनाक कैद का खुलासा तब हुआ जब फैक्ट्री के मालिक की गैरमौजूदगी में एक मजदूर ने हिम्मत दिखाई। गेट खुला देखकर वह किसी तरह कुत्तों और सुरक्षा को चकमा देकर वहां से भाग निकला। वह सीधे नजदीकी पुलिस स्टेशन पहुंचा और आपबीती सुनाई।

