UP Assembly Elections: 2022 के चुनाव में बुलंदशहर की सात सीटों पर कौन मारेगा बाजी?

punjabkesari.in Friday, Jan 21, 2022 - 06:55 PM (IST)

 

लखनऊः बुलंदशहर जिले की सात विधानसभा सीटों पर 10 फरवरी को वोट डाले जाएंगे, सिकंदराबाद, बुलंदशहर, स्याना, अनूपशहर, शिकारपुर, डिबाई और खुर्जा सीटों पर बीजेपी-सपा और बसपा में कांटे की टक्कर चल रही है। आइए बुलंदशहर जिले की 7 विधानसभा सीटों के अलग-अलग समीकरण पर डालते हैं एक नजर

बुलंदशहर जिले के सिकंदराबाद सीट पर 2017 में बीजेपी कैंडिडेट बिमला सिंह सोलंकी ने जीत हासिल की थी। सोलंकी ने बहुजन समाज पार्टी के मोहम्मद इमरान को 28 हजार 623 वोटों के मार्जिन से हराया था..इस सीट के नतीजों को तय करने में गुर्जर, सैनी,यादव, ठाकुर और मुस्लिम वोटरों की भूमिका काफी अहम रहती है। सिकंदराबाद विधानसभा क्षेत्र के गुलावठी क्षेत्र में यादवों के काफी गांव है। इसकी वजह से इस सीट पर यादव उम्मीदवार चुनाव लड़ते रहे हैं। बीजेपी ने 2022 में सिकंदराबाद से लक्ष्मी राज सिंह को चुनावी मैदान में उतारा है तो समाजवादी पार्टी ने आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के दामाद राहुल यादव को उम्मीदवार बनाया है। राहुल यादव को समाजवादी पार्टी ने दूसरी बार चुनावी मैदान में उतारा है। वहीं बसपा ने सिकंदराबाद से मनवीर गुर्जर को चुनावी मैदान में उतारा है।

बुलंदशहर जिले की बुलंदशहर विधानसभा सीट से 2017 में वीरेंद्र सिंह सिरोही ने जीत हासिल की थी। उनके निधन के बाद इस सीट पर 2020 में हुए उपचुनाव में उषा सिरोही को जनता ने निर्वाचित किया था। 2020 के उपचुनाव में उषा सिरोही ने बहुजन समाज पार्टी के फुरकान को महज 22 वोटों के मार्जिन से हराया था। इस सीट पर एससी और मुस्लिम वोटर निर्णायक ताकत रखते हैं। बुलंदशहर विधानसभा सीट के जातिगत समीकरण के मुताबिक यहां 40 फीसदी मुस्लिम और 35 फीसदी एससी वोटर हैं। यहां एक लाख मुस्लिम, 55 हजार जाटव,35 हजार जाट, 30 हजार लोधी, 30 हजार वैश्य और 20 हजार क्षत्रिय वोटर हैं। इसके अलावा 12 हजार वाल्मीकि,10 हजार प्रजापति,5 हजार यादव,5 हजार पंजाबी और अन्य जाति के 55 हजार वोटर हैं। बीजेपी ने 2022 में प्रदीप चौधरी को यहां से चुनावी मैदान में उतारा है तो सपा-रालोद गठबंधन ने यहां से हाजी यूनुस को टिकट दिया है। इस बार सपा-रालोद और बीजेपी के कैंडिडेट में कांटे की टक्कर देखने को मिलेगी।

बुलंदशहर जिले के स्याना सीट पर 2017 में बीजेपी के देवेंद्र ने जीत हासिल की थी। 2017 में भारतीय जनता पार्टी से देवेंद्र ने बहुजन समाज पार्टी के दिलनवाज खान को 71हजार 630 वोटों के बड़े मार्जिन से हराया था। अब बात करेंगे स्याना सीट के जातीगत समीकरण की यहां 70 हजार लोधी,52 हज़ार मुस्लिम,50 हज़ार जाटव और 45 हजार ठाकुर वोटर हैं। इसके अलावा 38 हजार जाट, 30 हज़ार ब्राह्मण, 17 हजार गुज्जर, 15 हजार कश्यप और 10 हज़ार वैश्य वोटर हैं। स्याना सीट से बीजेपी ने 2022 में देवेंद्र सिंह लोधी को टिकट दिया है। वहीं बीएसपी ने पंडित सुनील भारद्वाज को स्याना के चुनावी मैदान में उतारा है तो सपा-रालोद गठबंधन ने दिलनवाज खान को स्याना से टिकट दिया है। वहीं कांग्रेस ने पूनम पंडित को स्याना से अपना प्रत्याशी घोषित किया है। पूनम पंडित ने किसान आंदोलन के समय सोशल मीडिया पर अपनी ठेठ भाषा के चलते सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरी थी। बीएसपी के ब्राह्मण कैंडिडेट से बीजेपी को नुकसान हो सकता है। वहीं सपा-रालोद के मुस्लिम कैंडिडेट देने के बाद जाट वोटर उनसे दूर छिटक सकते हैं।

अब बात करेंगे बुलंदशहर जिले के अनूपशहर विधानसभा सीट के बारे में यहां से 2017 के चुनाव में बीजेपी के संजय विधायक चुने गए थे। संजय ने बीएसपी कैंडिडेट गजेन्द्र सिंह को 60 हजार 314 वोटों के मार्जिन से हराया था। अनूपशहर विधानसभा में लगभग 3 लाख 60 हजार मतदाता हैं। जातिगत समीकरण के हिसाब से देखें तो यहां जीत की कुंजी दलित,ठाकुर और मुस्लिम वोटरों के पास है। दलित और मुस्लिम वोटरों की संख्या यहां लगभग 40 फीसदी है, तो ब्राह्मण, जाट और ठाकुर वोटरों की संख्या 30 से लेकर 35 फीसदी है। 2022 के चुनाव में बीजेपी ने संजय शर्मा को टिकट दिया है तो बीएसपी ने रामेश्वर लोधी को अनूपशहर से चुनावी मैदान में उतारा है। वहीं अनूपशहर से राष्ट्रवादी कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने मिलकर चुनाव लड़ने की घोषणा की है। गठबंधन की तरफ से अनूपशहर सीट से एनसीपी के केके शर्मा की उम्मीदवारी की घोषणा की गई है।

वहीं बुलंदशहर जिले के डिबाई सीट पर 2017 के चुनाव में बीजेपी के अनीता सिंह राजपूत ने जीत हासिल की थी। अनीता सिंह राजपूत ने समाजवादी पार्टी के हरीश कुमार को 65 हजार 630 वोटों के मार्जिन से हराया था। डिबाई में जातिगत समीकरण के हिसाब से लोध राजपूत मतदाता निर्णायक भूमिका में रहते हैं। यहां एक लाख लोध राजपूत, 50 हजार एससी और 30 हजार मुस्लिम वोटर हैं। इसके अलावा ठाकुर, ब्राह्मण और वैश्य वोटर भी यहां नतीजों पर असर डालते हैं। इस बार बीजेपी ने डिबाई से सीपी सिंह को उम्मीदवार बनाया है तो बीएसपी ने करनपाल लोधी को टिकट दिया है। यहां मुख्य मुकाबला बीजेपी और बीएसपी में होने की संभावना जताई जा रही है।

बुलंदशहर जिले के शिकारपुर सीट पर 2017 में अनिल कुमार विधायक चुने गए थे। शिकारपुर को ब्राह्मण बहुल सीट माना जाता है। वहीं जाट वोटर भी यहां अहम भूमिका अदा करते हैं, जबकि दलित, मुस्लिम और ठाकुर वर्ग के वोटर भी अहम माने जाते हैं। शिकारपुर विधानसभा सीट पर 45 हजार ब्राह्मण और 42 हजार जाट मतदाता हैं। 2022 के चुनाव में बीजेपी ने अनिल शर्मा को टिकट दिया है। वहीं सपा-रालोद गठबंधन ने किरण पाल सिंह को चुनावी मैदान में उतारा है तो बीएसपी ने शिकारपुर से रफीक फड्डा को टिकट दिया है। रफीक फड्डा मुस्लिम वोट में सेंध लगाकर सपा-रालोद गठबंधन को कुछ नुकसान पहुंचा सकते हैं, हालांकि इस सीट पर मुख्य मुकाबला बीजेपी और सपा-रालोद गठबंधन में ही होने की उम्मीद जताई जा रही है।

बुलंदशहर जिले के खुर्जा (सुरक्षित) सीट पर 2017 में बीजेपी के विजेंद्र सिंह विधायक चुने गए थे। 2017 में बीजेपी कैंडिडेट विजेंद्र सिंह ने बीएसपी के अर्जुन सिंह को 64 हजार 299 वोटों के मार्जिन से हराया था। अनुसूचित जाते के लिए सुरक्षित सीट होने के बावजूद खुर्जा में ठाकुर मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं। इसके अलावा अनुसूचित जाते के वोटर भी चुनावी नतीजों को प्रभावित करते हैं। इसके अलावा मुस्लिम, जाट, ब्राह्मण और वैश्य वोटर भी नतीजों पर असर डालते हैं। इस बार बीजेपी ने यहां से मीनाक्षी सिंह को टिकट दिया है तो बीएसपी ने खुर्जा से विनोद कुमार जाटव की किस्मत पर भरोसा जताया है। वहीं कांग्रेस पार्टी ने टुक्की मल खटीक को टिकट दिया है। यहां बीजेपी की सरकार ने 32 कॉलोनियों को नियमित कराकर 40 हजार की आबादी को बड़ी राहत मुहैया कराई है। इस वजह से अभी पलड़ा बीजेपी का भारी लग रहा है, हालांकि इ सीट पर सपा को अपनी पहली जीत का इंतजार है।


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Nitika

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