20 साल से एक भी दाना नहीं खाया, लेकिन 60 की उम्र में भी फिट और जवान! जानिए यह शख्स करता है ऐसा करिश्मा कि सब रह जाएं दंग

punjabkesari.in Monday, Jan 12, 2026 - 08:47 AM (IST)

Prayagraj News: प्रयागराज के संगम की रेती पर माघ मेले का आस्था का सबसे बड़ा पर्व चल रहा है। यहां साधु-संतों के साथ कल्पवासियों की अलग-अलग साधनाएं देखने को मिल रही हैं। इसी मेले में एक ऐसा गृहस्थ कल्पवासी भी हैं, जिन्होंने पिछले 20 वर्षों से अन्न का पूरी तरह त्याग रखा है। उत्तर प्रदेश के रायबरेली निवासी 60 वर्षीय रंजीत सिंह माघ मेले में अनोखे कल्पवासी के रूप में सामने आए हैं। वे भारतीय सेना से रिटायर हवलदार हैं और अब केवल फलाहार पर जीवन यापन कर रहे हैं।

अन्न त्यागने की प्रेरणा
रंजीत सिंह के अनुसार, “2005 में सेना से रिटायर होने के बाद 10 जुलाई 2006 को मैंने अन्न का पूरी तरह त्याग कर दिया। मठ-मंदिरों में घूमते हुए मैं संतों से मिला। एक महात्मा ने कहा कि फलाहार संतों का मार्ग है, गृहस्थ इसे नहीं अपना सकता। उसी क्षण मैंने बजरंगबली का स्मरण कर संकल्प लिया और तब से एक दाना भी नहीं खाया।” उनकी यह जीवनशैली शुरुआत में एक प्रयोग थी, लेकिन अब यह पूरी तरह दैनिक जीवन का हिस्सा बन चुकी है।

60 की उम्र में भी चुस्त-दुरुस्त
रंजीत सिंह बताते हैं कि उन्हें न तो कमजोरी महसूस होती है और न ही बीपी, शुगर या कोई अन्य रोग। सेना में मिली अनुशासन और सात्विक जीवनशैली ने उन्हें शुद्ध भोजन की ओर प्रेरित किया। वे नौकरी भी करते हैं और गृहस्थी भी संभालते हैं। उनका मानना है कि अत्यधिक अनाज और तनाव ही बीमारियों की जड़ हैं। कई शोध भी बताते हैं कि कम खाने वाले लोग लंबे समय तक स्वस्थ रहते हैं।

अनुशासित दिनचर्या और फलाहार
रंजीत सिंह की दिनचर्या बेहद अनुशासित है:
-ब्रह्म मुहूर्त में उठना
-संगम स्नान
-ध्यान और व्यायाम
- दिन में केवल मौसमी फल जैसे सेब, पपीता, केला और अमरूद
- सीमित मात्रा में नारियल, मूंगफली, किशमिश और बादाम
- सूखे मेवे भिगोकर खाना
वे कहते हैं, “सरल भोजन से पाचन आसान होता है और शरीर स्वस्थ रहता है। नियमित दिनचर्या फलाहार से भी अधिक जरूरी है।” रंजीत सिंह की यह कहानी न केवल साधु-संतों की साधनाओं के बीच प्रेरणा देती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि अनुशासन और संयम से स्वस्थ और चुस्त जीवन संभव है।


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Content Editor

Anil Kapoor

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