राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस में 8 आरोपियों की न्यायिक हिरासत बढ़ी, 24 अगस्त तक जेल में रहेंगे

punjabkesari.in Monday, Aug 10, 2026 - 08:05 PM (IST)

अयोध्या: राम मंदिर के कथित चढ़ावा चोरी मामले में गिरफ्तार आठ आरोपियों की न्यायिक हिरासत सोमवार को अगले 14 दिनों के लिए बढ़ा दी गई। बचाव पक्ष के एक अधिवक्ता ने यह जानकारी दी। फैजाबाद की भ्रष्टाचार-रोधी मामलों की विशेष अदालत के विशेष न्यायाधीश रजत वर्मा ने इन आरोपियों की हिरासत 24 अगस्त तक बढ़ाने का आदेश दिया। पुलिस पहले ही सभी आठ आरोपियों से हिरासत में लेकर पूछताछ कर चुकी है। ये आरोपी अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और राम शंकर यादव उर्फ ​​टिन्नू हैं। 

बचाव पक्ष के वकील कुल शेखर सिंह ने बताया कि आरोपियों को जिला जेल से 'वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग' के जरिए अदालत में पेश किया गया और अदालत ने उनकी न्यायिक हिरासत 24 अगस्त तक बढ़ा दी। अदालत की कार्यवाही के दौरान, बचाव पक्ष के वकील ने अपनी आपत्तियां दर्ज कराते हुए कहा कि आरोपियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी सही नहीं है और उनके मुवक्किलों को गलत धाराओं के तहत झूठा फंसाया गया है। उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि उनके मुवक्किलों पर प्राथमिकी में गलत तरीके से लगाई गई धाराओं को हटाया जाए। उन्होंने अयोध्या पुलिस पर भारतीय न्याय संहिता की गलत धाराओं के तहत मामले की जांच करने का आरोप लगाया और अदालत से अनुरोध किया कि वह पुलिस को सही धाराएं लगाने और उसी के अनुसार आरोपपत्र दाखिल करने का निर्देश दे।

उन्होंने कहा,''मैंने अदालत में यह गुहार लगाई कि पुलिस को मामले की जांच सही धाराओं के तहत करनी चाहिए और सही तरीके से आरोप पत्र दाखिल करना चाहिए।'' जब उनसे पूछा गया कि पुलिस ने कौन सी गलत धाराएं लगाई हैं, तो उन्होंने कहा,''उन्होंने चोरी और गबन दोनों की धाराएं लगाई हैं, ये दोनों धाराएं किसी भी मामले में एक साथ नहीं चल सकतीं। पुलिस ने आजीवन कारावास की धारा भी लगाई है, जबकि उच्चतम न्यायालय ने बहुत स्पष्ट रूप से निर्देश दिया है कि आजीवन कारावास की धारा तभी लगाई जा सकती है जब आरोपी आदतन अपराधी हो या उसे पहले सजा हो चुकी हो, लेकिन इस मामले में आरोपी पहली बार अपराध करने वाले हैं, इसलिए आजीवन कारावास की यह धारा यहां लागू नहीं होती।

 उन्होंने कहा कि पुलिस ने आरोपियों को लोक सेवक के तौर पर आरोपी बनाया है, लेकिन राम मंदिर ट्रस्ट कोई सार्वजनिक प्राधिकरण नहीं है। उन्होंने कहा कि पुलिस ने लगाई गई धाराओं में आरोपियों को लोक सेवक दिखाया है और उन पर सार्वजनिक संपत्ति के गबन का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा, ''अगर वे सही धाराएं लगाते तो मेरे मुवक्किलों को स्थानीय अदालत से आसानी से जमानत मिल जाती।'' चूंकि फैजाबाद बार एसोसिएशन ने राम मंदिर मामले के आरोपियों का केस न लड़ने का फैसला किया था, इसलिए उत्तर प्रदेश सरकार ने आरोपियों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराई है।

 जुलाई के दूसरे सप्ताह में, सरकार ने राम मंदिर मामले के आरोपियों के लिए कानूनी सहायता बचाव वकील के तौर पर अभियोजन विभाग के एक पूर्व संयुक्त निदेशक को नियुक्त किया है। आरोपियों के लिए नियुक्त बचाव वकील कुलशेखर सिंह ने पिछले महीने से आरोपियों की तरफ़ से पैरवी शुरू की। बार एसोसिएशन ने यह भी फ़ैसला किया है कि अगर उसका कोई सदस्य राम मंदिर मामले के आरोपियों का मुक़दमा लड़ने की कोशिश करता है, तो उस पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा और बार से उसकी सदस्यता खत्म कर दी जाएगी। कुलशेखर सिंह ने बताया कि वह फैज़ाबाद बार एसोसिएशन के सदस्य नहीं हैं, इसलिए वह आज़ादी से आरोपियों का मुकदमा लड़ सकते हैं। 
 


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Content Writer

Ramkesh

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