Noida जिला अस्पताल की बड़ी लापरवाही: इंसानों के लिए मंगा लीं जानवरों वाली 60 हजार सिरिंज, 3 स्तर की जांच भी फेल!
punjabkesari.in Thursday, Apr 02, 2026 - 05:14 PM (IST)
Noida News: हाईटेक शहर नोएडा के सरकारी जिला अस्पताल से स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है। अस्पताल प्रशासन ने मरीजों के इलाज के लिए इस्तेमाल होने वाली सिरिंज की जगह, 60 हजार वेटरनरी (पशु चिकित्सा) सिरिंज का ऑर्डर दे दिया। यह चूक तब उजागर हुई जब सप्लाई अस्पताल पहुंची और डिब्बे खोलने पर उन पर वेटरनरी यूज लिखा मिला।
कैसे हुई इतनी बड़ी चूक?
जानकारी के मुताबिक, यह पूरा मामला 25 दिसंबर 2025 का है। अस्पताल ने सरकारी खरीद पोर्टल (GeM) के जरिए लखनऊ की एक एजेंसी को सिरिंज का ऑर्डर दिया था।
निगरानी के दावे फेल
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह ऑर्डर फार्मासिस्ट से शुरू होकर एसएमओ स्टोर और फिर सीएमएस (CMS) तक तीन बड़े अधिकारियों की टेबल से गुजरा। नियम के मुताबिक हर स्तर पर जांच होनी थी, लेकिन किसी की भी नजर इस बड़ी गलती पर नहीं पड़ी कि ऑर्डर इंसानों के बजाय जानवरों वाली सिरिंज का दिया जा रहा है।
स्टोर रूम में खुला लापरवाही का डिब्बा
जब लखनऊ से सिरिंज की खेप अस्पताल के स्टोर रूम में पहुंची, तो पैकेजिंग देखते ही कर्मचारियों के होश उड़ गए। बॉक्स पर स्पष्ट रूप से लिखा था कि ये सिरिंज पशु चिकित्सा (Veterinary) के लिए हैं।
बड़ा सवाल
अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं क्योंकि जेम पोर्टल पर ऑर्डर देते समय ही उसमें वेटरनरी सिरिंज लिखा गया था, फिर भी इसे अंतिम मंजूरी कैसे मिल गई?
अस्पताल प्रशासन की सफाई: मानवीय भूल
मामला बढ़ने पर अस्पताल के सीएमएस अजय राणा ने इसे एक मानवीय भूल (Human Error) करार दिया है। उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि जैसे ही गलती पकड़ी गई, पूरी सप्लाई को तुरंत वापस भेज दिया गया। इस ऑर्डर के लिए अभी तक कोई बिल नहीं बना है और न ही कोई भुगतान (Payment) किया गया है। प्रशासन का दावा है कि समय रहते गलती पकड़ ली गई, इसलिए किसी मरीज को नुकसान नहीं पहुंचा।
मरीजों की जान से खिलवाड़ का खतरा
भले ही प्रशासन इसे छोटी गलती बता रहा हो, लेकिन सवाल यह है कि अगर यह सिरिंज अनजाने में मरीजों के वार्ड तक पहुंच जातीं, तो लोगों की सेहत के साथ कितना बड़ा खिलवाड़ हो सकता था। नोएडा जैसे बड़े शहर के मुख्य सरकारी अस्पताल में इस तरह की अंधी निगरानी व्यवस्था स्वास्थ्य विभाग की गंभीरता पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती है।

