Pregnancy पर गर्मी का खतरनाक असर! बढ़ते तापमान से कम हो रहे लड़कों के जन्म, रिसर्च में चौंकाने वाला खुलासा

punjabkesari.in Sunday, Mar 08, 2026 - 01:31 PM (IST)

नई दिल्ली: बढ़ते तापमान का असर अब मानव जन्म के पैटर्न पर भी दिखाई देने लगा है। एक नई अंतरराष्ट्रीय स्टडी के मुताबिक गर्भावस्था के दौरान ज्यादा गर्मी का सामना करने वाली महिलाओं में लड़कों के जन्म की संभावना कम हो सकती है। शोध में पाया गया कि अधिक तापमान गर्भ में पल रहे भ्रूण के विकास को प्रभावित कर सकता है, जिससे जन्म के समय प्राकृतिक लिंग अनुपात में बदलाव देखने को मिलता है।

यह अध्ययन प्रतिष्ठित जर्नल Demography में प्रकाशित हुआ है। शोध में भारत और उप-सहारा अफ्रीका के 50 लाख से अधिक जन्मों के डेटा का विश्लेषण किया गया, जिसमें तापमान और जन्म के समय लिंग अनुपात के बीच संबंध का अध्ययन किया गया।

ज्यादा तापमान से लड़कों के जन्म में कमी
शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन दिनों अधिकतम तापमान 20°C से ऊपर रहा, उन परिस्थितियों में लड़कों के जन्म की संख्या अपेक्षाकृत कम दर्ज की गई। उप-सहारा अफ्रीका में गर्भावस्था के पहले त्रैमास (First Trimester) में ज्यादा गर्मी का सामना करने पर लड़कों के जन्म में कमी देखी गई। वहीं India में यह असर मुख्य रूप से दूसरे त्रैमास (Second Trimester) के दौरान सामने आया। स्टडी के अनुसार 25 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान के संपर्क में आने से लड़कों के जन्म की संभावना में लगभग 0.014 प्रतिशत अंक की कमी देखी गई।

ग्रामीण और अधिक उम्र की माताओं पर ज्यादा असर
अध्ययन में यह भी पाया गया कि यह प्रभाव विशेष रूप से उन महिलाओं में ज्यादा देखा गया जो ग्रामीण क्षेत्रों में रहती हैं, उम्र में अपेक्षाकृत अधिक हैं और पहले से कई बच्चों को जन्म दे चुकी हैं।

वैज्ञानिकों ने दी यह वजह
शोधकर्ताओं ने इस परिणाम को विकासवादी सिद्धांत Trivers–Willard hypothesis से जोड़ा है। इसके अनुसार प्रतिकूल पर्यावरणीय परिस्थितियों में पुरुष भ्रूण अधिक संवेदनशील होते हैं और उनके गर्भ में जीवित रहने की संभावना कम हो सकती है।

गर्भवती महिलाओं के लिए बढ़ सकता है स्वास्थ्य जोखिम
चेन्नई स्थित Sri Ramachandra Institute of Higher Education and Research से जुड़ी पब्लिक हेल्थ विशेषज्ञ Vidhya Venugopal के अनुसार बढ़ती गर्मी गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य पर कई नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है।
उनका कहना है कि शरीर का तापमान बढ़ने से गर्भवती महिलाओं में हाई ब्लड प्रेशर, गर्भकालीन डायबिटीज, समय से पहले प्रसव, कम वजन के बच्चों का जन्म जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।

जलवायु परिवर्तन के दौर में बढ़ी चिंता
Jane Hirst के अनुसार वैश्विक स्तर पर उपलब्ध आंकड़े बताते हैं कि गर्मी के कारण प्री-टर्म बर्थ का खतरा लगभग 25% तक बढ़ सकता है। हालांकि भारत के Tamil Nadu में किए गए एक अध्ययन में यह जोखिम तीन गुना तक अधिक पाया गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए सरकारों को गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को संवेदनशील समूह के रूप में पहचान कर उनके लिए विशेष सुरक्षा उपाय करने होंगे।


 


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Content Editor

Purnima Singh

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