साहब, ये रहे मेरे ऑपरेशन के ताजा जख्म, अब तो छुट्टी दे दो! लोको पायलट की बेबसी जान कांप जाएगी रूह, दफ्तर में उतारनी पड़ी पैंट!
punjabkesari.in Wednesday, Mar 04, 2026 - 06:46 AM (IST)
Lucknow News: उत्तर रेलवे के लखनऊ मंडल से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने रेलवे प्रशासन की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक लोको पायलट को अपनी बीमारी और सर्जरी का सबूत देने के लिए अपने वरिष्ठ अधिकारी के दफ्तर में कपड़े उतारने पर मजबूर होना पड़ा।
क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, लोको पायलट राजेश मीणा ने हाल ही में पाइल्स (बवासीर) का ऑपरेशन कराया था। ऑपरेशन के बाद उन्हें 22 से 28 फरवरी तक की छुट्टी मिली थी। हालांकि, छुट्टी खत्म होने के बाद भी उनके घाव ठीक नहीं हुए थे और उन्हें चलने-फिरने तथा बैठने में काफी तकलीफ हो रही थी। जब राजेश ने नियमानुसार रेलवे हेल्थ यूनिट से छुट्टी बढ़ाने की गुहार लगाई, तो डॉक्टर ने जांच के बाद उन्हें आराम की सलाह दी। लेकिन प्रक्रिया के तहत उन्हें अपने विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से सिक मेमो (बीमारी का प्रमाण पत्र) लाने को कहा गया।
दफ्तरों के चक्कर और अपमान
आरोप है कि राजेश मीणा जब सिक मेमो के लिए चीफ क्रू कंट्रोलर (CCC) रतन कुमार के पास पहुंचे, तो उनकी बात को अनसुना कर दिया गया। राजेश ने अपने मेडिकल पेपर्स, लैब रिपोर्ट्स और यहां तक कि अपनी ड्रेसिंग (पट्टी) भी दिखाई, लेकिन अधिकारी टस से मस नहीं हुए और छुट्टी देने से इनकार कर दिया। जब मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान लोको पायलट को लगा कि उनकी बात पर विश्वास नहीं किया जा रहा है, तो उन्होंने मजबूरी में अपने सीनियर अफसर के सामने ही पैंट उतारकर अपने ऑपरेशन के ताजा जख्म दिखाए।
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल
इस पूरी घटना का वीडियो अब रेलवे कर्मचारियों के व्हाट्सएप ग्रुप्स और सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। घटना के बाद रेलवे यूनियनों में भारी आक्रोश है। ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन (AILRSA) ने इसे अमानवीय और शर्मनाक कृत्य करार दिया है। यूनियन का कहना है कि एक कर्मचारी को अपने हक की छुट्टी के लिए इस हद तक अपमानित होना पड़ा, यह सिस्टम की विफलता है।
यूनियन की मांग और प्रशासन का रुख
AILRSA के महासचिव के. सी. जेम्स ने इस मामले में दोषी अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। हालांकि, अभी तक लखनऊ मंडल के वरिष्ठ रेलवे अधिकारियों (DRM कार्यालय) की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

