आस्था मिटाने की कोशिश करने वालों का खुद मिट गया अस्तित्व : CM Yogi
punjabkesari.in Saturday, Sep 05, 2026 - 07:48 PM (IST)
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा जिन लोगों ने हमारी आस्था को नष्ट करने का प्रयास किया, वे स्वयं इतिहास के पन्नों में मिट गये और कोई उन्हें पूछने वाला नहीं है। योगी आदित्यनाथ ने यहां रिजर्व पुलिस लाइन में आयोजित श्रीकृष्ण जन्मोत्सव-2026 के भव्य समारोह को संबोधित करते हुए भगवान श्रीकृष्ण के निष्काम कर्म के उपदेशों की प्रासंगिकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ''जिन लोगों ने हमें मिटाने का प्रयास किया, जिन लोगों ने हमारी आस्था को नष्ट करने का प्रयास किया, वे स्वयं इतिहास के पन्नों में मिट गये और कोई उन्हें पूछने वाला नहीं है।
श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के मौके पर बृहस्पतिवार और शुक्रवार को दो दिवसीय मथुरा जिले के दौरे का स्मरण करते हुए योगी आदित्यनाथ ने वहां के नागरिकों के प्रकृति प्रेम की सराहना की और कहा कि वहां के लोग पेड़ों की टहनियां नहीं तोड़ते, अनावश्यक रूप से पेड़ों को नुकसान नहीं पहुंचाते। अपनी आस्था और विरासत को महिमामंडित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, ''आक्रांता मंदिर तोड़ सकता है लेकिन आस्था नहीं तोड़ सकता है। वे मूर्तियां तोड़ सकते हैं लेकिन मूल्य नहीं। वे मंदिरों के ऊपर अपनी इमारत खड़ा कर सकते हैं, लेकिन मन में बसे श्रीराम और श्रीकृष्ण को कभी छू भी नहीं पाये।
योगी ने कहा कि ''यह लंबी परंपरा है, सोमनाथ मंदिर बार-बार टूटा लेकिन भारत ने उसे बार-बार बनाया। अयोध्या में भगवान राम का मंदिर बार-बार टूटा फिर भी वह आज अपनी अजेय पताका के साथ खड़ा है। काशी में भगवान विश्वनाथ का मंदिर बार-बार टूटा, लेकिन लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर ने और आधुनिक भारत में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने काशी विश्वनाथ धाम के रूप में उसे भव्य स्वरूप दिया है।'' योगी ने कहा कि ''हमारा भारत आज भी जीवित है, जाग्रत है, शाश्वत रूप में अपनी इस यात्रा को लेकर चल रहा है और इसलिए आज मैं सबसे कहना चाहता हूं कि श्रीकृष्ण का संदेश हम सबके लिए है-कर्मक्षेत्र में अपने आपको पहचानो, जो श्रेष्ठ हो उसे करने का प्रयास करो।'' योगी आदित्यनाथ ने कहा कि ''जीवन में जब भ्रम हो, संशय हो, तब संशय में कर्म की प्रेरणा प्रदान करने वाला श्रीकृष्ण का संदेश आज भी श्रीमद्भागवत गीता के माध्यम से हर सनातनी, हर भारतवासी स्मरण करता है।
उन्होंने कहा कि ''श्रीकृष्ण का जन्म अंधकारमय परिस्थितियों में कारागार की काल कोठरी में हुआ, लेकिन उन्होंने जीवनभर विपरीत परिस्थितियों को परास्त करते हुए समाज को प्रकाश का मार्ग दिखाया।'' मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का आयोजन हम सभी को अपने कर्तव्यों के निर्वहन के लिए नए संकल्प के साथ जोड़ता है। श्रीकृष्ण की लीलाभूमि मथुरा, वृंदावन, बरसाना, गोकुल, गोवर्धन, बल्देव और नन्दगांव में आज भी श्रद्धालुओं के मन में भगवान श्रीकृष्ण की स्मृतियां जीवंत हैं। इन क्षेत्रों में प्रकृति और पर्यावरण के प्रति श्रद्धा का भाव भी देखने को मिलता है।
उन्होंने प्रत्येक क्षेत्र में सकारात्मक प्रतिस्पर्धा पर जोर देते हुए कहा कि ''जिन लोगों ने आस्था को नष्ट करने का प्रयास किया, उनका भाव नकारात्मक था, इसलिए स्वयं अस्त हो गये। जिन लोगों ने भारत की भाव भंगिमा को नष्ट करने का प्रयास किया था, वे इतिहास में 'नामशेष' हो गये। भारत अपनी अजेय यात्र को लेकर आज भी चल रहा है।'' मुख्यमंत्री ने कहा कि ''हमें यह याद रखना है कि अपने कर्तव्य पथ पर निष्काम कर्म को ध्येय बनाकर आगे बढ़ते रहेंगे, इस देश की विजय यात्रा इसी रूप में आगे बढ़ती रहेगी। यह केवल कोई सरकार नहीं, 140 करोड़ भारतवासियों को मिलकर इस यात्रा को तय करना है, विकसित भारत की संकल्पना तब पूरी होगी।'

