Ahmedabad Blasts: ‘आतंकी ठप्पे' से नाराज आजमगढ़ के निवासी,  बोले- जिले का नाम सुनकर युवाओं को कोई नौकरी तक नहीं देता

punjabkesari.in Monday, Feb 28, 2022 - 11:41 AM (IST)

संजरपुर/सराय मीर: कभी साहित्य की दिग्गज हस्तियों शिबली नोमानी, अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध' और कैफी आजमी की जन्मस्थली के रूप में मशहूर आजमगढ़ वर्ष 2008 के अहमदाबाद सिलसिलेवार बम धमाका मामले में अदालत के फैसले के बाद से ‘आतंकी केंद्र' के ठप्पे से जूझ रहा है। आजमगढ़ के निवासी इस पर नाराजगी जताते हुए कहते हैं कि इस कलंक ने युवाओं की विकास की संभावनाओं को बाधित किया है। आजमगढ़ के संजरपुर और सराय मीर गांवों के निवासी इस बात की आलोचना करते हैं कि कुछ लोग उनके जिले को आतंकवादियों की ‘जन्मस्थली' करार दे रहे हैं।

उन्होंने कहा कि राजनेताओं ने राजनीतिक लाभ के लिए ‘आतंकवाद का कारखाना' जैसे शब्द गढ़े। वर्ष 2008 के अहमदाबाद सिलसिलेवार बम धमाका मामले में जिले के पांच निवासियों को मौत की सजा और एक को उम्रकैद की सजा सुनाये जाने के बाद आजमगढ़ पर लगा 'आतंकवाद' का ठप्पा फिर से चर्चा में आ गया था। सजा पाने वालों में से दो दोषी संजरपुर और एक सराय मीर के बीनापारा इलाके का है, जबकि तीन जिले के अन्य इलाकों के हैं। आजमगढ़ का ‘आतंक से जुड़ाव' उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भी चर्चा का विषय बन गया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी सरकार पर अपने कार्यकाल के दौरान ‘आतंकवादियों को बचाने' का आरोप लगाया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि आजमगढ़ से संबंध रखने वाले उन दोषियों में से एक के पिता समाजवादी पार्टी के सक्रिय कार्यकर्ता हैं। गौरतलब है कि 70 मिनट में 21 धमाके के मामले में एक विशेष अदालत ने इस महीने की शुरुआत में 38 लोगों को मौत की सजा सुनाई, जबकि 11 अन्य को उम्रकैद की सजा दी। इन धमाकों में 56 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 200 से अधिक लोग घायल हो गए थे। संजरपुर गांव के एक किसान अब्दुल बाकी ने कहा कि आजमगढ़ को आतंकवाद से जोड़ने से सालों से इसकी बदनामी हो रही है और युवाओं के लिए कहीं और नौकरी पाना मुश्किल हो गया है।

बाकी ने कहा कि पहले से ही बहुत सारे पूर्वाग्रह हैं और अब विस्फोट मामले में फैसले के बाद आतंकवाद को लेकर बातें हो रही हैं। उन्होंने कहा, ‘‘हमारे गांव के बच्चों के लिए दिल्ली जैसी जगहों पर नौकरी पाना लगभग असंभव होने जा रहा है। नेता आतंकवाद के ऐसे ठप्पे का उपयोग राजनीतिक बढ़त के लिए करते हैं, लेकिन आखिर में यह दर्जनों बेगुनाहों को बदनाम करता है और उनकी संभावनाओं को क्षति पहुंचाता है।'' इसी तरह का विचार शाह आलम भी व्यक्त करते हैं। बिस्कुट की दुकान चलाने वाले शाह आलम कहते हैं कि आतंकी ठप्पे ने जिले के कई लोगों की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया और नौकरी की संभावनाओं को बाधित किया।

उन्होंने कहा, ‘‘हम चाहते हैं कि हमारे गांव पर लगा यह आतंकी ठप्पा पूरी तरह से मिटा दिया जाये। लेकिन हम जो सोचते हैं वह महत्वपूर्ण नहीं है। राजनीतिक आका ऐसा नहीं सोचते, क्योंकि इससे उनका उद्देश्य पूरा होता है।'' संजरपुर के एक अन्य दुकानदार फैजुर रहमान ने कहा कि आतंकी ठप्पा विस्फोट मामले के फैसले के साथ फिर से चर्चा में है, क्योंकि राजनेता इसे उठा रहे हैं। लेकिन जमीन पर इसका असर नहीं है, क्योंकि इस तरह की राजनीति से लोग तंग आ चुके हैं। उन्होंने कहा कि मुट्ठी भर लोगों के अलावा, हिंदू और मुसलमान दोनों जानते हैं कि आतंकवाद की यह बात वास्तविक मुद्दों से ध्यान हटाने की एक चाल है और यह काम नहीं करेगी।

वर्ष 2008 में दिल्ली में बाटला हाउस मुठभेड़ के बाद संजरपुर एक ‘आतंकी केंद्र' के रूप में सुर्खियों में आया था, जिसमें दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी की मौत हो गई थी और उनके दो सहयोगी घायल हो गये थे। इसमें संजरपुर के दो आतंकवादी मारे गये थे। सराय मीर के पास सूखे मेवे और खजूर की दुकान के मालिक मोहम्मद लियाकत कहते हैं कि सत्ता में बैठे लोगों की फूट डालो और राज करो की नीति के कारण आतंक का ठप्पा लगा हुआ है।

लियाकत ने कहा, ‘‘मुसलमानों के साथ भेदभाव किया जा रहा है और आजमगढ़ के संबंध में आतंकवाद की सभी बातों से अब हमारे लड़कों के लिए अच्छी नौकरी पाना और भी मुश्किल हो जाएगा।'' सराय मीर बाजार में रसोई गैस के सामान बेचने वाले दुकानदार मालिक मोहम्मद अनीस ने कहा कि एक समय था जब आजमगढ़ को मौलाना शिबली नोमानी, अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध', कैफी आजमी और शबाना आजमी जैसी साहित्यिक और सांस्कृतिक हस्तियों द्वारा पहचाना जाता था। लेकिन यह अफसोस की बात है कि अब इसे आतंकवाद से जोड़ दिया गया। अनीस ने कहा, ‘‘यह एक सियासी खेल है, वास्तविक मुद्दों को नजरअंदाज किया जा रहा है क्योंकि लोगों की क्रय शक्ति कम होने के कारण व्यापार में गिरावट आई है, ये भटकाव की रणनीति हैं।''

कई लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर मूल निवासियों से जुड़े आतंकी मामलों के बारे में बात की और दावा किया कि उन्हें राजनीतिक कारणों से ‘‘झूठा फंसाया'' गया। हालांकि सभी एक एक तरह नहीं साचते। एक दंत चिकित्सक विद्या सागर ने कहा कि मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने ठीक ही बताया था कि सपा ने आतंकवादियों का समर्थन किया था और अखिलेश यादव सरकार के तहत आजमगढ़ ‘आतंक का कारखाना' बन गया था, क्योंकि कई युवा भटक गए थे। सराय मीर और संजरपुर दोनों निजामाबाद विधानसभा क्षेत्र में आते हैं जहां सपा के मौजूदा विधायक आलमबादी आजमी भाजपा के मनोज यादव से मुकाबला कर रहे हैं।

 निजामाबाद विधानसभा क्षेत्र में 60,000 से अधिक मुस्लिम मतदाता, 75,000 यादव और 68,000 दलित मतदाता हैं, इसके अलावा लगभग 35,000 सवर्ण (ब्राह्मण और ठाकुर) हैं। बसपा के कैलाश यादव के मैदान में उतरने से मुस्लिम वोट विभाजन की चिंता सपा खेमे को परेशान कर रही है। इस क्षेत्र में सातवें और अंतिम चरण में सात मार्च को मतदान होगा, जबकि मतगणना 10 मार्च को होगी।


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Content Writer

Mamta Yadav

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