UP के इस अनोखे धाम में लगती है भोले बाबा की अदालत, चिट्ठी लिखकर माफी मांगते हैं भक्त

8/2/2021 11:07:09 AM

प्रयागराजः सावन महीने की शुरुआत हो चुकी है, ऐसे में पूरे देश में शिव मंदिरों में कोरोना वायरस का असर देखने को मिल रहा है। शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ कम देखी जा रही है। आज हम आपको एक खास और अनोखे शिव मंदिर का दर्शन कराएंगे। संगम नगरी प्रयागराज में भगवान शंकर का एक अनोखा धाम है। भगवान शिव के इस धाम में भोले भंडारी कल्याण दाता के रूप में नहीं बल्कि एक न्यायाधीश के रूप में प्रतिष्ठित हैं।
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यहां शंकर ही जज और शंकर ही वकील और यहां आने वाले उनके भक्त मुलजिम। पूरी तरह से एक अदालत की शक्ल में बने इस शिवालय में श्रद्धालु जाने अनजाने खुद से हुई गलतियों और पापों से माफी मांगने के लिए यहां आते हैं। 285 से अधिक शिव लिंग वाले इस शिवमंदिर में शिव भक्त कान पकड़कर शिवजी के सामने उठते बैठते है, ताकि महादेव उनकी गलतियों और पाप से उन्हें मुक्त कर दें।
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प्रयागराज के शिवकुटी इलाके में इस शिव धाम को कचेहरी या फिर कहे कि एक अदालत का दर्जा मिला हुआ है, लेकिन कोई सरकारी अदालत नहीं बल्कि भोले भंडारी भगवान शंकर की ऐसी अदालत जिसे भक्त शिव कचेहरी के नाम से पुकारते हैं। महादेव के इस धाम शिव की कचहरी में भगवान शिव न्यायाधीश के रूप में हैं और यहां आने वाले शिव-भक्त मुलजिम के रूप में। 
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इस शिव धाम में कुल 288 शिवलिंग है, जिसमें एक प्रमुख बड़े शिवलिंग को भक्त नायायाधिपति के रूप में देखते हैं और शेष 287 लघु -शिव लिंगों वकीलों के रूप में देखा जाता जा है। कहते है की इंसान को उसके पुन्य कर्मों का फल तब तक नहीं मिलता जब तक वह पापों से मुक्त न हो जाए। इस शिव की अदालत में  पहुंचने वाले शिव भक्त यहां पर पुण्य की प्राप्ति की कामना के लिए नहीं आते बल्कि जाने अनजाने में हुई गलतियों या पापों से मुक्ति की कामना उन्हें यहा खींच -लाती है। शिव कचेहरी में आकर भक्त यहां शिव जी की पूजा अर्चना करते हैं। साथ ही एक अर्ज़ी पत्र भी लिखकर उनको देते है, जिसमे वो जाने अनजाने में कोई गलती हुइ हो, कोई मान्यता मांगे हो उसकी पत्र के ज़रिए विनती करते है और फिर आखिर में क्षमा याचना के लिए न्याय स्वरूप शिव के सामने कान पकड़ कर उठते-बैठते है। 
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शिव कचेहरी के एक कोने से लेकर दुसरे कोने तक जहा भी आप की नजर जायेगीअधिवक्ता स्वरूप शिव लिंग ही नजर आयंगे। यहां आने वाला हर शिव भक्त जिन्हें नत मस्तक इन्हें प्रणाम करता है लेकिन यहाँ मौजूद 288 शिवलिंगों में हर रोज किसी एक सूक्ष्म शिवलिंग को ही अपना इष्ट मानकर उसकी पूजा की जाती है। इस तरह हर दिन 288 शिव लिंग यहां पूजे जाते हैं।  इस अनोखे शिव धाम के पुजारी बताते हैं कि 18 65 में  नेपाल नरेश राजा राणा पदम जंग बहादुर ने इस मंदिर की स्थापना की थी राजा ने एक मान्यता मांगी थी जिसके बाद 350  से अधिक शिवलिंग का निर्माण कराया था। 
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हालांकि जैसे जैसे वक्त बिता वैसे वैसे कुछ शिवलिंग टूट गए और अब 288 शिवलिंग इस मंदिर में स्थापित है इस मंदिर के पुजारी शम्भूनाथ दुबे कहना है कि यह उनकी तीसरी पुश्त है, जो इस मंदिर की देखभाल में लगी हुई है। हालांकि इस बार भी कोरोना काल की वजह से श्रद्धालुओं की भीड़ में काफी कमी देखी जा रही।


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Content Writer

Tamanna Bhardwaj

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