गोरखपुर मर्डर केस: लहुलुहान मनीष गुप्ता को उठाकर ले जाती दिखी Police, होटल के अंदर का CCTV आया सामने

punjabkesari.in Thursday, Oct 07, 2021 - 02:31 PM (IST)

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में कृष्णा पैलेस होटल में कानपुर के व्यापारी मनीष गुप्ता हत्याकांड की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे ही इस मामले में नए खुलासे सामने आ रहे हैं। अब मनीष गुप्ता की मौत के बाद का एक सीसीटीवी (CCTV) फुटेज सामने आया है। इस वीडियो की शुरुआत में मनीष गुप्ता की बॉडी जमीन पर पड़ी हुई दिखाई देती है। इस दौरान कुछ पुलिसकर्मी भी मौके पर दिखाई देते हैं। साथ ही होटल में काम करने वाले कर्मचारी भी वीडियो में दिख रहे हैं। वीडियों में मृतक मनीष के शरीर को पकड़कर पुलिसकर्मी होटल से बाहर ले जा रहे हैं, वहीं थाना अध्यक्ष जेएन सिंह ने मनीष को हाथ तक नहीं लगाया है।

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होटल के कमरा नंबर 512 के बाहर का नजारा
बता दें कि घटना वाले दिन, 27 अक्तूबर की रात 12 बजे के आस-पास इंसपेक्टर जगत नारायण सिंह चौकी प्रभारी फलमंडी अक्षय मिश्रा के साथ होटल कृष्णा पैलेस पहुंचे थे। कमरे में सवाल-जवाब के बीच जो भी विवाद हुए हों, लेकिन सीसीटीवी फुटेज में होटल के कमरा नंबर 512 के बाहर का नजारा साफ है। इसमें दिखाई दे रहा कि रात 12 बजकर 10 मिनट पर पुलिसकर्मी मनीष का हाथ पैर पकड़कर कमरे से बाहर आ रहे हैं। कमरे से आगे आकर दाईं तरफ लकड़ी की अलमारी है। इससे चंद कदम आगे की तरफ लिफ्ट लगी है। कमरे से बाहर लाने के बाद पुलिसकर्मी मनीष को आलमारी के पास ही लिटा देते हैं। इस समय मनीष के शरीर पर सिर्फ अंडरवियर थी। फोटो में इसे साफ देखा जा सकता है।

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मनीष के शरीर को लिफ्ट के जरिए नीचे ले जाती पुलिस
इस बीच अक्षय मिश्रा नीचे की तरफ निकल जाते हैं। दूसरी तरफ कमरे से एक तौलिया लेकर दरोगा बाहर की तरफ आता है। इसी तौलिये को लपेटकर मनीष के शरीर को लिफ्ट के जरिए पुलिसकर्मी नीचे ले जाते हैं। वीडियो में दिखाई देता है कि बॉडी भारी होने की वजह से पुलिस के अलावा होटल के दो स्टॉफ ने मनीष के हाथपैर पकड़े, जबकि पास में खडे़ इंसपेक्टर जगत नारायण सिंह ने मनीष को हाथ लगाकर नीचे उतारने में सहयोग देना भी उचित नहीं समझा।

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क्या है पूरा मामला
गौरतलब है कि कानपुर के बर्रा निवासी कारोबारी मनीष गुप्ता 27 सितंबर की सुबह आठ बजे गोरखपुर अपने दो दोस्तों हरवीर व प्रदीप के साथ घूमने आए थे। तीनों तारामंडल स्थित होटल कृष्णा पैलेस के कमरा नंबर 512 में ठहरे थे। 27 सितंबर की रात ही रामगढ़ताल थाना प्रभारी इंस्पेक्टर जगत नारायण सिंह, फलमंडी चौकी प्रभारी रहे अक्षय मिश्रा सहित छह पुलिस वाले आधी रात के बाद होटल में चेकिंग को पहुंच गए थे। कमरे की तलाशी लेने पर मनीष ने आपत्ति जताई तो पुलिसकर्मियों से उनका विवाद हो गया।

विभागीय जांच में दोषी मिले पुलिसकर्मी
दरअसल, कानपुर के कारोबारी मनीष गुप्ता की हत्या के मामले में आरोपी पुलिस कर्मियों की विभागीय जांच पूरी कर ली गई है। जांच में सभी आरोपी पुलिस कर्मियों की लापरवाही सामने आई है। जांच में कई ऐसे पहलू मिले हैं जिनसे पुलिसकर्मियों को दोषी साबित किया गया है। मनीष का मेडिकल कॉलेज में इलाज हुआ तो उनके पर्चे पर ब्रांडेड पहले से मरा हुआ कैसे लिखा गया, यदि पहुंचने से थी तो पहले मौत हो गई मेडिकल कॉलेज में इलाज कैसे हुआ इन सवालों का जवाब तलाशने बुधवार को एसआईटी मेडिकल कॉलेज पहुंची। वहां पूछताछ में समुचित जवाब नहीं मिला जिसमें स्वास्थ्य कर्मियों की भी भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है। इस प्रकरण में एसआईटी द्वारा मददगारों पर भी नजर है। वहीं फरार फरार पुलिस कर्मियों की तलाश में छह जिलों में छापे मारे जा चुके हैं इन पुलिसकर्मियों को भगोड़ा घोषित करने की तैयारी है।

 


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Content Writer

Umakant yadav

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