सम्भावित बाढ़ पर नियंत्रण के लिए केन्द्र और राज्य के विभागों ने कसी कमर

6/13/2021 10:48:54 AM

 

देहरादूनः मानसून की आहट मिलते ही सम्भावित बाढ़ पर नियंत्रण और सुरक्षा के लिए उत्तराखंड और केन्द्र सरकार के सम्बन्धित विभाग ने कमर कस ली है।

उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए), उत्तराखंड तथा उत्तर प्रदेश दोनों राज्यों के सिंचाई विभाग, भारतीय मौसम विभाग, सेंटर वाटर कमीशन, बांध एवं बैराज से संबंधित अन्य विभागों के जिम्मेदार अधिकारियों ने वर्चुअल बैठक में आगामी रणनीति पर मंथन किया। राज्य के सिंचाई और यूएसडीएमए सचिव एसए मुरुगेशन ने सभी संबंधित अधिकारियों में परस्पर समन्वय स्थापित करते हुए, नदियों के जल स्तर संबंधित इन फ्लो-आउट फ्लो डाटा के लगातार साझा करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सभी बांध प्राधिकरण के लिए नदी के किनारे ‘अर्ली वार्निंग सेन्सर्स' स्थापित करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में टी एच डी सी द्वारा ऐसे स्थानों पर अर्ली वार्निंग सेन्सर्स पहले से ही स्थापित किए गए है, जिससे नदी का प्रवाह बढ़ने की स्थिति में पहले ही सेन्सर्स के माध्यम से खतरे की सूचना प्राप्त हो जाती है।

आपसी सामंजसय बढ़ाने एवं संबंधित विभागों के बीच तात्कालिक सूचनाएं किस तरह से पहुंचे, विषय पर मंथन करते हुए, केन्द्र जल आयोग के राजेश कुमार ने बताया कि नदी के डिस्चार्ज संबंधित डाटा फ्लड फॉरेकास्टिंग वैबसाइट पर साझा किया जाता है। उत्तराखंड जल विद्युत निगम के पुरुषोत्तम ने बताया कि मनेरी और टॉन्स जैसे नदियों के किनारों के जल स्तर की सूचना यदि सेंटर वाटर कमीशन द्वारा एक घंटे पहले ही प्रदान हो जाये तो इससे समय रहते नीचे के इलाकों में अलटर् भेजा जा सकेगा। उन्होंने बताया कि बरसात के दौरान, 24 घंटे ड्यूटी वॉच करते है। सिंचाई विभाग उत्तराखंड के मुकेश कुमार ने डाउन स्ट्रीम मैकेनिज्म के साथ, अलर्ट को थाना-चौक़ी तक पहुंचाने की प्रक्रिया बताई। टी एच डी सी ने भी प्रति घंटे के डाटा प्रदान करने पर जोर दिया।

सचिव ने सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों से बातचीत के दौरान, रियल टाइम डाटा साझा करने कि आवश्यकता बताते हुए एक समन्वयक बैठक करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि अति संवेदनशील स्थिति में अलर्ट जारी करते हुए एक घंटे के अंदर ही डाटा को सभी संबंधित विभागों एवं जिला प्रशासन तक पहुंचाने के मैकेनिज्म को विकसित करें। उन्होंने सभी विभागों से उनके सम्पर्क विवरण, विभाग से नोडल को नमित करना, रिसोर्स एवं उपकरण विवरण आदि प्राधिकरण को उपलब्ध करवाए जाने के निर्देश दिए। केंद्र जल आयोग के अधिकारियों ने आश्वसत किया कि उनके द्वारा अपस्ट्रीम एवं डाउनस्ट्रीम डाटा प्रत्येक घंटे के अंतराल का लगातार साझा किया जाएगा।
 


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Content Writer

Nitika

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