ED की बड़ी कार्रवाई: एनी ग्रुप की 7.30 करोड़ की संपत्तियां अटैच, 110 करोड़ की ठगी का मामला!

punjabkesari.in Thursday, Feb 19, 2026 - 11:30 PM (IST)

लखनऊ: मनी लॉन्ड्रिंग के एक चर्चित मामले में Enforcement Directorate (ED) के लखनऊ जोनल कार्यालय ने एनी ग्रुप ऑफ कंपनीज से जुड़ी 7.30 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच कर लिया है। यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत की गई है।

कार्रवाई के दायरे में कुल चार संपत्तियां आई हैं, जिनमें तीन अचल संपत्तियां (जमीन और भवन) और एक चल संपत्ति (फिक्स्ड डिपॉजिट) शामिल है। संबंधित अचल संपत्तियां एनी बुलियन इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर दर्ज बताई गई हैं और ये लखनऊ, दिल्ली तथा उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित हैं।

 कैसे शुरू हुई जांच?

ED की यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा दर्ज कई एफआईआर और शिकायतों के आधार पर की गई जांच का परिणाम है। जांच एजेंसी के अनुसार, मुख्य आरोपी अजीत कुमार गुप्ता और उनके सहयोगियों पर आरोप है कि उन्होंने आकर्षक रिटर्न का लालच देकर लोगों से निवेश कराया। पीड़ितों को भरोसा दिलाया गया कि उनका पैसा सुरक्षित और लाभदायक योजनाओं में लगाया जाएगा।

हालांकि, जांच में सामने आया कि करीब 110 करोड़ रुपये की कथित ठगी की गई। निवेशकों से जुटाई गई रकम को विभिन्न कंपनियों और मेसर्स आई विजन क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसाइटी के जरिए घुमाया गया, ताकि धन के वास्तविक स्रोत को छिपाया जा सके।

अवैध कमाई से खरीदी गई संपत्तियां

ED का दावा है कि कथित रूप से जुटाए गए अवैध धन से अचल संपत्तियां और अन्य निवेश किए गए, जिन्हें एनी ग्रुप की कंपनियों के नाम पर दर्शाया गया। जांच में यह भी सामने आया कि संबंधित सहकारी संस्था पर भी आरोपी का प्रभाव था।

पहले भी हो चुकी है कार्रवाई

इस मामले में ED ने 2023 में भी कार्रवाई करते हुए अजीत कुमार गुप्ता, उनकी पत्नी और समूह से जुड़ी कंपनियों की 9.1 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच की थीं। ताजा कार्रवाई के बाद अब तक कुल 16.4 करोड़ रुपये की संपत्तियां अस्थायी रूप से जब्त की जा चुकी हैं। एजेंसी का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और आगे भी संपत्तियों की पहचान कर कार्रवाई की जा सकती है।

निवेश ठगी पर सख्ती का संकेत

यह कार्रवाई उन मामलों के खिलाफ सख्त रुख को दर्शाती है, जहां लोगों को ऊंचे मुनाफे का लालच देकर ठगी की जाती है। जांच एजेंसियां ऐसे मामलों में धन के स्रोत और उसके इस्तेमाल की कड़ियां जोड़ने में जुटी हैं, ताकि निवेशकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।


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Ramanjot

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