नीला ड्रम हत्याकांड : मुस्कान-साहिल को फांसी कब और कहां? इन 5 कानूनी विकल्प पर टिकी हैं सभी की नजरें

punjabkesari.in Thursday, Oct 15, 2026 - 06:02 PM (IST)

मेरठ: मेरठ के 'नीला ड्रम' कांड के नाम से चर्चित हुए सौरभ हत्याकांड में दोषी करार दी गयी उसकी पत्नी मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल को एक स्थानीय अदालत ने फांसी की सजा सुनायी है। अब सवाल है कि दोषियों को कब फांसी के फंदे पर लटकाया जाएगा। महिलाओं को फांसी देने के लिए यूपी में सिर्फ एकमात्र फांसी घर मथुरा में है। मुस्कान को मथुरा जेल में ही स्थित फांसी घर में फंदे से लटकाया जाएगाा। जबकि उसके प्रेमी साहिल को कहां पर फांसी दी जाएगी इसे लिए कोई भी निश्चित नहीं, हालांकि  मीडिया रिपोर्ट की मानें तो महिला फांसीघर का निर्माण ब्रिटिश शासनकाल में लगभग 1870 में हुआ था। मथुरा में महिलाओं को फांसी देने के लिए विशेष व्यवस्था बनाई गई है। लेकिन उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, आजादी के बाद से यहां किसी महिला को फांसी नहीं दी गई है। 

आइऐ इस पर विस्तार से चर्चा करते हैं?
दरअसल, जब किसी भी आरोपी को निचली अदालत दोषी सिद्व कर देती है उसे ऊपर की अदाल यानी की हाई कोर्ट में जाने के लिए समय दिया जाता है, यहां पर अगर जिला अदालत के फैसले को अगर कोर्ट बरकरार रखती है तो आरोपी सुप्रीम कोर्ट जा सकता है।

मुस्कान और प्रेमी साहिल के पास फांसी से बचने के लिए ये हैं 5 कानूनी विकल्प

1. इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील
दोनों के वकील दोषसिद्धि और मृत्युदंड को चुनौती दे सकते हैं। हाईकोर्ट सजा को बरकरार रख सकता है, उम्रकैद में बदल सकता है या उचित कानूनी आधार पर फैसला पलट सकता है। मृत्युदंड पर हाईकोर्ट की पुष्टि अनिवार्य है।

2. सुप्रीम कोर्ट में अपील
हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने पर दोनों सुप्रीम कोर्ट में अपील या लागू प्रक्रिया के अनुसार विशेष अनुमति याचिका के जरिए राहत मांग सकते हैं।

3. पुनर्विचार याचिका (Review Petition)

सुप्रीम कोर्ट के प्रतिकूल फैसले के बाद सीमित कानूनी आधारों पर उसी अदालत से फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की जा सकती है।

4. क्यूरेटिव याचिका (Curative Petition)

पुनर्विचार याचिका खारिज होने के बाद असाधारण परिस्थितियों में यह विकल्प मौजूद है। इसके लिए बेहद सीमित कानूनी शर्तें पूरी करनी होती हैं।

5. राज्यपाल और राष्ट्रपति से दया याचिका

संविधान के अनुच्छेद 161 और 72 के तहत क्रमशः राज्यपाल और राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका के जरिए मृत्युदंड कम करने या माफ करने की मांग की जा सकती है।

मुस्कान और साहिल के वकील रेखा जैन ने कहा है कि दोनों से बातचीत के बाद हाईकोर्ट में अपील की जाएगी और बचाव पक्ष उम्रकैद की सजा के पक्ष में दलील देगा। मुस्कान ने अदालत में अपनी दो बेटियों का हवाला देकर राहत की गुहार लगाई थी। यह दलील सजा पर विचार के दौरान रखी गई थी, लेकिन इससे अपने-आप मृत्युदंड समाप्त नहीं होता।  फिलहाल सबसे अहम कदम इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील और मृत्युदंड की पुष्टि की सुनवाई है। दोनों की सजा उम्रकैद में बदल सकती है, लेकिन यह अदालत के फैसले और लागू कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

उल्लेखनीय है कि तीन मार्च 2025 की रात सौरभ की हत्या कर दी गई थी। पुलिस के अनुसार, मुस्कान ने अपने पति सौरभ को कथित तौर पर मादक पदार्थ देकर बेहोश किया और फिर साहिल की मदद से चाकू से वार कर उसकी हत्या कर दी। हत्या के बाद शव के टुकड़े कर उन्हें एक नीले ड्रम में डालकर सीमेंट से सील कर दिया गया। पुलिस के अनुसार, वारदात के बाद मुस्कान और साहिल हिमाचल प्रदेश चले गए थे और पुलिस ने उन्हें 18-19 मार्च 2025 को गिरफ्तार किया था। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत में गवाह और साक्ष्य पेश किए और करीब 126 तारीखों तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने 30 सितंबर को दोनों को दोषी ठहराया था।

 


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Content Writer

Ramkesh

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