इस्तीफा देने वाले GSTडिप्टी कमिश्नर प्रशांत सिंह पर हो सकती है बड़ी कार्रवाई, इस कारण जाएगी नौकरी

punjabkesari.in Wednesday, Jan 28, 2026 - 02:39 PM (IST)

अयोध्या: अयोध्या में माल एवं सेवा कर (जीएसटी) उपायुक्त प्रशांत कुमार सिंह के इस्तीफा मामले में नया मोड़ सामने आया है। दरअसल, GSTडिप्टी कमिश्नर प्रशांत सिंह के भाई ने आरोप लगाया है। उन्होंने एक निजी चैनल से बातचीत के दौरान बताया कि प्रशांत ने फर्जी दिव्यांग सर्टिफिकेट के सहारे नौकरी हासिल की है। उनके खिलाफ जांच चल रही है। नौकरी जाने और कार्रवाई के डर से अपने पद से इस्तीफा दिया है। डॉ. विश्वजीत सिंह ने वर्ष 2021 में ही इसकी शिकायत दर्ज कराई थी। 20 अगस्त 2021 को उन्होंने प्रशांत कुमार सिंह के दिव्यांग प्रमाण पत्र के पुनः निरीक्षण की मांग की. इसके बाद मंडलीय चिकित्सा परिषद ने उन्हें मेडिकल बोर्ड के सामने पेश होने के लिए बुलाया, लेकिन वे दो बार उपस्थित नहीं हुए।

दिव्यांग प्रमाण पत्र की होगी दोबारा जांच 
विश्वजीत सिंह ने एक पत्र भी वायरल किया, जिसमें मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) को प्रशांत कुमार सिंह के दिव्यांग प्रमाण पत्र की जांच दोबारा कराने को कहा गया था. उन्होंने आरोप लगाया कि इस्तीफा देना भी सिर्फ एक नाटक था, ताकि जांच और संभावित रिकवरी से बचा जा सके. डॉ. विश्वजीत सिंह के मुताबिक, प्रशांत कुमार सिंह ने जिस आंख की बीमारी को दिखाकर दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाया, वैसी बीमारी 50 साल से कम उम्र में किसी को नहीं होती। इस पूरे मामले में अब CMO मऊ ने जांच शुरू कर दी है। 

जाति और धर्म के आधार पर बांटने का आरोप लगाकर दिया था इस्तीफा 
गौरतलब है कि उपायुक्त प्रशांत कुमार सिंह ने मंगलवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया तथा कहा कि जाति और धर्म के आधार पर देश को बांटने की हालिया कोशिशों से उन्हें गहरा दुख हुआ है, जो कथित तौर पर प्रयागराज की पवित्र भूमि से हो रही हैं। सिंह ने कहा कि वह सरकार, संविधान और देश के चुने हुए नेतृत्व के समर्थन में यह कदम उठा रहे हैं। सिंह ने कहा, ‘‘मैंने माननीय प्रधानमंत्री, माननीय मुख्यमंत्री और माननीय गृह मंत्री के समर्थन में और भारत के संविधान के समर्थन में इस्तीफा दिया है।

शंकराचार्य के बयान से आहत थे GSTडिप्टी कमिश्नर प्रशांत सिंह
सिंह ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा राज्य के चुने हुए मुख्यमंत्री के खिलाफ दिए गए बयानों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, ‘‘प्रयागराज की पवित्र भूमि से शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने हमारे राज्य के चुने हुए नेता के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की है, जो संवैधानिक पद पर हैं।'' खुद को सेवा नियमों से बंधा सरकारी कर्मचारी बताते हुए सिंह ने कहा कि वह ऐसी घटनाओं के प्रति उदासीन नहीं रह सकते। उन्होंने कहा, ‘‘मैं उत्तर प्रदेश के सेवा नियमों से बंधा हूं। मुझे राज्य से वेतन मिलता है और मेरा परिवार उसी पर निर्भर है, लेकिन मैं कोई भावनाहीन व्यक्ति नहीं हूं।‘‘ सिंह ने कहा, ‘‘अगर मेरे राज्य और उसके प्रमुख के खिलाफ ऐसा आचरण जारी रहता है, तो एक कर्मचारी के तौर पर अपनी संवैधानिक और सेवा सीमाओं में रहते हुए मैं इसका विरोध करूंगा। इसीलिए मैंने आज अपना इस्तीफा दिया है।


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Content Writer

Ramkesh

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