''देश भाषण सुनने के मूड में नहीं...'', Amit Shah के बयान पर भड़के Akhilesh Yadav
punjabkesari.in Wednesday, Aug 12, 2026 - 02:44 PM (IST)
Lucknow News: छात्र प्रदर्शनों पर पुलिसिया कार्रवाई के मुद्दे को लेकर संसद में जारी घमासान के बीच माहौल बेहद गरमा गया है। गृह मंत्री अमित शाह द्वारा 13 अगस्त को दोपहर 3 बजे इस मामले में बयान देने के ऐलान पर अब समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और कन्नौज से सांसद अखिलेश यादव ने बेहद तीखा हमला बोला है। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि पूरा देश अब सिर्फ भाषण सुनने के मूड में बिल्कुल नहीं है।
संसद में जवाब देने के लिए सरकार जो समय-सीमा तय करना चाहती है, वो स्वयं में अलोकतांत्रिक है। दरअसल ये जवाब नहीं होगा, थोथा बयान होगा।
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) August 12, 2026
सच तो ये है कि भाजपा चाह ही नहीं रही है कि कोई जवाब दिया जाए, वो तो सत्र का समापन करने के लिए उतावली है। ज़िम्मेदारी और जवाबदेही समय की किसी शर्त…
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, अखिलेश यादव ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपनी प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए लिखा कि संसद में जवाब देने के लिए सरकार जिस तरह की समय-सीमा तय करने की कोशिश कर रही है, वह अपने आप में पूरी तरह अलोकतांत्रिक है। उन्होंने कहा कि यह सरकार की तरफ से कोई वास्तविक जवाब नहीं होगा, बल्कि महज एक थोथा बयान बनकर रह जाएगा। हकीकत तो यह है कि भारतीय जनता पार्टी किसी भी सवाल का जवाब देना ही नहीं चाहती और वह केवल मानसून सत्र को जल्द से जल्द खत्म करने की उतावली में दिख रही है।
सपा प्रमुख ने सरकार की नीयत पर सवाल उठाते हुए आगे कहा कि शासन में जिम्मेदारी और जवाबदेही किसी समय की शर्त से नहीं, बल्कि उत्तरदायित्व और तर्क की भावना से निभाई जाती है। यह कोई लोगों की सामान्य जिज्ञासा दूर करने की कोई सतही औपचारिकता नहीं है, बल्कि भगवान और इंसान दोनों के साथ हुई दुर्व्यवहार व दुर्भावना से जुड़ा एक बेहद गंभीर मामला है।
दरअसल, बीते 20 जुलाई को छात्रों के एक बड़े प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिसिया कार्रवाई को लेकर पूरा विपक्ष लामबंद है। विपक्षी दलों का आरोप है कि छात्रों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर पुलिस ने पैलेट गन और कील लगी लाठियों का इस्तेमाल किया, जो बेहद क्रूर था। इस मुद्दे पर राहुल गांधी से लेकर अखिलेश यादव तक केंद्र सरकार को लगातार घेर रहे हैं और मामले की शुरुआत से ही गृह मंत्री अमित शाह से सीधे जवाब की मांग कर रहे हैं।
दूसरी तरफ, विपक्ष के भारी हंगामे के बीच गृह मंत्री अमित शाह ने यह साफ किया था कि अगर विपक्षी दल छात्रों के इस गंभीर विषय पर नियमबद्ध चर्चा कराने के लिए तैयार हों, तो वह हर एक सवाल का जवाब देने को तैयार हैं। शाह का कहना था कि सरकार के पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है और चर्चा के बाद देश के सामने सब कुछ दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। हालांकि, सत्र समाप्त होने के ठीक 1 दिन पहले 13 अगस्त का समय तय किए जाने से विपक्ष का गुस्सा और भड़क गया है।

