संविधान के तहत संरक्षित हैं मदरसे, सिर्फ मान्यता न होने से नहीं बंद होगा मदरसा- हाईकोर्ट का बड़ा आदेश

punjabkesari.in Tuesday, Jan 20, 2026 - 01:41 PM (IST)

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में मदरसों को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सिर्फ मान्यता न होने के आधार पर किसी मदरसे को बंद नहीं किया जा सकता। यह आदेश गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने यह फैसला श्रावस्ती जिले के एक मदरसे से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान दिया।

सील मदरसे को खोलने का आदेश
कोर्ट ने मदरसे पर लगाई गई सील को हटाने के आदेश देते हुए 1 मई 2025 को जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी (DMWO) द्वारा जारी आदेश को रद्द कर दिया।
यह आदेश जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की एकल पीठ द्वारा पारित किया गया। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अल्पसंख्यक संस्थानों को संविधान के तहत संरक्षण प्राप्त है और राज्य सरकार केवल मान्यता के अभाव में ऐसे संस्थानों को बंद नहीं कर सकती।

मान्यता न होना बंदी का आधार नहीं बन सकता
हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन मदरसों को मान्यता प्राप्त नहीं है, उन्हें किसी भी प्रकार का सरकारी अनुदान या वित्तीय सहायता नहीं दी जाएगी। यानी मान्यता और अनुदान दो अलग-अलग विषय हैं, लेकिन मान्यता न होना बंदी का आधार नहीं बन सकता।

कानून के उल्लंघन पर प्रशासन कर सकता है कार्रवाई 
कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि किसी मदरसे के खिलाफ कोई ठोस शिकायत या कानून उल्लंघन की स्थिति सामने आती है, तो प्रशासन नियमानुसार कार्रवाई कर सकता है, लेकिन सामान्य रूप से सभी गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों को बंद करना कानूनन उचित नहीं है। इस फैसले को उत्तर प्रदेश सहित देशभर में संचालित गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों के लिए एक बड़ी कानूनी राहत माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह आदेश संविधान के अनुच्छेद 30 के तहत अल्पसंख्यक अधिकारों की पुष्टि करता है और भविष्य में ऐसे मामलों में एक महत्वपूर्ण नजीर बनेगा।


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Content Writer

Ramkesh

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