मायावती का संसद में सत्ता-विपक्ष पर वार, बोलीं- ‘दोनों अपने-अपने स्वार्थ की लड़ाई लड़ रहे’

punjabkesari.in Thursday, Aug 13, 2026 - 12:43 PM (IST)

लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने सत्तापक्ष और विपक्ष पर संसद सत्र के दौरान ''अपने-अपने स्वार्थ की लड़ाई लड़ने'' का आरोप लगाते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि विपक्ष के सदन की कार्यवाही नहीं चलने देने का सरकार अपनी मर्जी से विधेयक पारित करवाकर फायदा उठा रही है। मायावती ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक (एफसीआरए) का जिक्र करते हुए कहा, ''सरकार इसे अति महत्वपूर्ण बताकर अन्य विधेयकों की तरह तुरंत पारित कराना चाहती थी मगर विपक्ष के पुरजोर विरोध के चलते उसे बिना चर्चा के संसद की संयुक्त समिति के पास भेज दिया गया।'' उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष और विपक्ष इस विधेयक का राजनीतिकरण कर रहे हैं।

बसपा प्रमुख ने कहा, ''बेहतर होता यदि विपक्ष कल इस विधेयक को रखने के दौरान संसद को चलने देता और इसकी कमियों को उजागर करता तो उसे पूरा देश जानता, लेकिन इन्होंने संसद को ही अपनी जिद के हिसाब से नहीं चलने दिया।'' उन्होंने आरोप लगाया, ''सरकार ने ऐसे अनेक और भी विधेयक विपक्ष द्वारा संसद की कार्यवाही बाधित किये जाने की वजह से मिनटों में ही पारित करा लिये हैं, जिन्हें रोका जाना चाहिये था मगर विपक्ष ने ऐसा नहीं किया, जिसका सरकार अपने पक्ष में पूरा फायदा उठा रही है।'' मायावती ने कहा, ''इससे विपक्ष की या तो अंदरुनी मिलीभगत लगती है या फिर 'जेन-जी' के वोट के स्वार्थ में इन्हें देश के अन्य मुद्दे बिल्कुल भी नजर नहीं आ रहे हैं।

हालांकि वर्तमान हालात में 'जेन-जी' की समस्याओं के मुद्दे को प्राथमिकता देते हुये जनहित के अन्य मुद्दों को भी महत्व दिया जाना चाहिये था।'' बसपा प्रमुख ने यह भी कहा कि अयोध्या में राममंदिर के चढ़ावे की कथित चोरी का मुद्दा भी संसद में उठाना चाहिए था, जिसे भी विपक्ष ने अपने राजनैतिक स्वार्थ में पीछे कर दिया है जबकि इस पर संसद में चर्चा होना बहुत जरूरी है। 

मायावती ने जनता से अपील करते हुए कहा, ''वह देश की जनता, सत्ता व विपक्ष के बीच इस समय संसद सत्र के दौरान भी चल रही उनके अपने-अपने राजनैतिक स्वार्थ की लड़ाई से पूरी तरह से सचेत रहें और 'सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय' की नीतियों व सिद्धान्तों के आधार पर पूरी ईमानदारी व निष्ठा से चल रही बसपा से जुड़े।'' केंद्र सरकार ने बुधवार को एफसीआरए संशोधन विधेयक को संसद की संयुक्त समिति के पास विस्तृत समीक्षा और संभावित सुझावों के लिए भेजने का प्रस्ताव रखा। इस समिति में लोकसभा के 21 और राज्यसभा के 10 सदस्यों समेत कुल 31 सदस्य होंगे। 
 


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Content Writer

Ramkesh

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