आजम खान से मुलाकात या मुस्लिम वोटों का बड़ा दांव, जानिए जेल में खान से मुलाकात के सियासी मायने
punjabkesari.in Thursday, Oct 22, 2026 - 03:20 PM (IST)
लखनऊ: समाजवादी पार्टी (SP) प्रमुख अखिलेश यादव गुरुवार को रामपुर जिला जेल में पार्टी नेता आज़म खान से मुलाकात की। उसके बाद उन्होंने आवास पर आज़म खान की पत्नी तंजीन फातिमा और परिवार के अन्य सदस्यों से भी मुलाकात की। चांद के अनुसार, यह दौरा तब हो रहा है जब यादव को आज़म खान की पत्नी से जानकारी मिली कि उनकी तबीयत ठीक नहीं है। पार्टी नेता चांद ने बताया जेल में आज़म खान से मुलाकात करेंगे। वे उनका हाल-चाल जानेंगे। इसके बाद, वे आज़म खान के आवास पर जाकर उनकी पत्नी, SP सांसद तंजीन फातिमा और परिवार के अन्य सदस्यों से मुलाकात करेंगे, जिसके बाद अखिलेश यादव जी वापस लौट आएंगे।
लोकसभा चुनावों से ठीक पहले भी अखिलेश ने आजम से की थी मुलाकात
भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर आज़म खान को मनगढ़ंत मामलों में फंसाने का आरोप लगाते हुए चांद ने कहा, "ज़रा देखिए कि किस तरह BJP ने आज़म खान के खिलाफ मामले दर्ज किए हैं और उन्हें मनगढ़ंत आरोपों के आधार पर जेल में रखा हुआ है।" "सपा सरकार बनाएगी और सभी मामले वापस ले लिए जाएंगे।" यह मुलाकात 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले हो रही है और इससे पार्टी नेतृत्व को अपनी राजनीतिक रणनीति पर चर्चा करने का मौका भी मिल सकता है।
यादव ने इससे पहले मार्च 2024 में, लोकसभा चुनावों से ठीक पहले, राजनीतिक रणनीति और पार्टी उम्मीदवारों पर चर्चा करने के लिए सीतापुर जेल में खान से मुलाकात की थी। उन्होंने फरवरी 2020 में भी खान से मुलाकात की थी, जब खान, उनकी पत्नी और बेटे अब्दुल्ला आजम सीतापुर जेल में बंद थे। इस बीच, उत्तर प्रदेश के मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने यादव की इस प्रस्तावित मुलाकात की आलोचना करते हुए इसे मुस्लिम वोट हासिल करने के मकसद से किया गया एक चुनावी हथकंडा बताया।
राजभर बोले- मुस्लिम वोट हासिल करने की कोशिश कर रहे अखिलेश
राजभर ने कहा, "वे आज सिर्फ एक चुनावी हथकंडा अपनाने जा रहे हैं। वे आजम खान के जरिए मुस्लिम वोट हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन अखिलेश यादव भूल गए हैं कि मुसलमान अब उनके लिए पलक-पांवड़े नहीं बिछाने वाले हैं। उन्होंने आगे कहा, "वही अखिलेश यादव, जिन्होंने आजम खान को जेल भेजा था, अब उनसे मिलने जा रहे हैं। आजम खान के खिलाफ मामले उनकी ही सरकार के दौरान दर्ज किए गए थे। आजम खान अपने किए गए गलत कामों की वजह से जेल में हैं। वे इतने लंबे समय तक जेल में रहे, लेकिन अखिलेश कभी उनसे मिलने नहीं गए।
आजम खान का फायदा उठाना चाहते हैं अखिलेश
बीजेपी नेता नरेंद्र कश्यप ने भी आरोप लगाया कि यादव चुनाव रणनीति पर चर्चा करने के लिए खान से मिलने जा रहे हैं। उन्होंने सपा प्रमुख पर राजनीतिक अवसरवाद का आरोप भी लगाया। "अखिलेश यादव ऐसे व्यक्ति के साथ क्या रणनीति बना सकते हैं जो इस समय जेल में है और जिस पर भ्रष्टाचार और दस्तावेजों में हेराफेरी सहित लगभग 100 आपराधिक मामले चल रहे हैं? वास्तव में उनकी मदद या समर्थन करने के बजाय, अखिलेश यादव केवल आजम खान का फायदा उठाना चाहते हैं, और ऐसा सिर्फ इसलिए क्योंकि वे एक मुसलमान हैं।" उन्होंने से कहा, "हमारे राजनीतिक परिदृश्य में इस तरह के राजनीतिक अवसरवाद के लिए कोई जगह नहीं है।
जालसाजी के एक मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद जेल में बंद हैं आजम खान
आप को बता दें कि रामपुर सदर से 10 बार विधायक रहे और पूर्व कैबिनेट मंत्री आज़म खान, समाजवादी पार्टी (SP) के प्रमुख मुस्लिम नेताओं में से एक रहे हैं। जालसाजी के एक मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद, वे पिछले साल नवंबर से रामपुर जिला जेल में बंद हैं। 13 अक्टूबर को, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट और मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के सिलसिले में रामपुर जेल में खान से पूछताछ की। यह जांच निजी ठेकेदारों के जरिए सरकारी अनुबंध के फंड को कथित तौर पर दूसरी जगह लगाने और फिर उसका इस्तेमाल ट्रस्ट तथा यूनिवर्सिटी से जुड़ी संपत्तियां बनाने में किए जाने से संबंधित है।
इससे पहले, ED ने 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट' (PMLA) के तहत इस मामले में उत्तर प्रदेश और दिल्ली में खान से जुड़ी जगहों पर छापेमारी की थी। इसके अलावा, 2019 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान सरकारी अधिकारियों के बारे में कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में भी खान को दो साल की जेल की सजा सुनाई गई है। वहीं दूसरी ओर, यादव ने हाल ही में उत्तर प्रदेश की BJP सरकार पर चुनावी गड़बड़ी का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) और जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) लोगों को डरा-धमका रहे हैं और चुनाव में हेरफेर करने में मदद कर रहे हैं। उन्होंने चुनाव आयोग से आग्रह किया है कि वह चुनावी प्रक्रिया में निष्पक्षता सुनिश्चित करे। SP प्रमुख ने यह भी वादा किया है कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में आती है, तो वे 'शिक्षा मित्रों' को पूर्ण शिक्षक के रूप में नियमित करेंगे। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर इसके लिए अलग से बजट का प्रावधान भी किया जाएगा।

