मतदाता सूची पुनरीक्षण में बड़े फर्जीवाड़े का आरोप, संजय सिंह ने चुनाव आयोग और सरकार पर साधा निशाना
punjabkesari.in Wednesday, Jan 14, 2026 - 05:36 PM (IST)
लखनऊ: आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और वरिष्ठ अधिकारी ज्ञानेश कुमार से जुड़े कर्मचारियों ने मिलकर पुनरीक्षण प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर धांधली की है।
जानबूझकर बड़ी संख्या में नाम हटाए गए
संजय सिंह ने कहा कि ग्राम पंचायत, जिला पंचायत और बीडीसी चुनावों के लिए अलग-अलग मतदाता पुनरीक्षण कराया गया, जबकि नगर निगम क्षेत्रों में भी अलग प्रक्रिया अपनाई गई। उन्होंने आरोप लगाया कि इस असमान और संदिग्ध प्रक्रिया के जरिए मतदाता सूची से जानबूझकर बड़ी संख्या में नाम हटाए गए। उन्होंने बताया कि चुनाव आयोग ने दिसंबर 2025 में उत्तर प्रदेश में कुल 17 करोड़ मतदाता होने की जानकारी दी थी, लेकिन बाद में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों को मिलाकर केवल 12 करोड़ 55 लाख मतदाता ही बताए गए। संजय सिंह का आरोप है कि साढ़े चार करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम सूची से गायब कर दिए गए हैं, जो लोकतंत्र के लिए बेहद गंभीर मामला है।
हर बूथ पर करीब 200 वोट बढ़ाने की तैयारी
आप सांसद ने यह भी दावा किया कि हर बूथ पर करीब 200 वोट बढ़ाने की तैयारी की जा रही है और दूसरे राज्यों से मतदाताओं के नाम जोड़ने की योजना बनाई गई है। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों से जुड़े मतदाताओं के नाम नहीं जोड़े जाएंगे, जबकि भाजपा समर्थक मतदाताओं की संख्या बढ़ाई जाएगी। संजय सिंह ने भाजपा विधायक नीरज बोरा के एक बयान का हवाला देते हुए कहा कि इससे उनके आरोपों को और बल मिलता है। उन्होंने कहा कि पूरी प्रक्रिया पूर्व नियोजित तरीके से की जा रही है।
सुप्रीम कोर्ट से निष्पक्ष जांच कराने की उठाई मांग
उन्होंने जानकारी दी कि इस संबंध में मुख्य निर्वाचन अधिकारी को पत्र लिखकर 2 करोड़ 17 लाख फॉर्म-10 और 2 करोड़ 10 लाख शिफ्टेड मतदाताओं की विस्तृत जानकारी मांगी जाएगी। संजय सिंह ने इस पूरे मामले को “बड़ा चुनावी घोटाला” करार देते हुए सुप्रीम कोर्ट से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि इस तरह से मतदाता सूची के साथ खिलवाड़ हुआ तो लोकतांत्रिक व्यवस्था को गहरी चोट पहुंचेगी।

