भैरव अष्टमीः काशी के कोतवाल ने 601 किलो का केक काटकर मनाया बर्थडे

11/20/2019 2:17:06 PM

वाराणसीः जीवन में बर्थडे का बहुत महत्व होता है। महत्व और भी बढ़ जाता है जब बर्थडे हो काशी के कोतवाल का, गंगा की नगरी में काशीवासी भी कहां शांत रहने वाले हैं। ऐसे में धूम-धाम से भैरव अष्टमी मना वहीं काशी के कोतवाल को भक्तों ने 601 किलो का केक काटकर भोग लगाया।
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बताते चलें कि काशी के रक्षक का जन्मदिन भैरव अष्टमी के दिन पड़ता है। ऐसे में बाबा को भक्तों ने विशाल केक का गिफ्ट दिया व प्रसाद भी ग्रहण किया। 601 किलो का केक केवल पंचमेवा, काजू-किसमिस और बादाम से निर्मित होने के साथ ही पूरी तरह से वेजीटेरियन था। केक आकर्षण का केंद्र भी बना रहा क्योंकि उसे उठाने के लिए कई लोगों को एक साथ लगना पड़ा। केक काटने के नज़ारे को देखने व प्रसाद के रूप में पाने के लिए सैकड़ों श्रद्धालुओं की भीड़ जुट गई।
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केक बनाने वाले बाबा के भक्त ने प्रिंस गुप्ता ने बताया कि भक्तों की ओर से शुरू की गई केक काटने की परंपरा को एक दशक से भी ज्यादा का वक्त बीत चूका है। शुरूआत 50 किलो से हुई थी जो अब 12 वर्षों बाद 601 किलों तक जा पहुँच गई है।  ये केक कोई मामूली केक नहीं है।

भक्त संजू केसरी ने बताया कि एक दशक से भी ज्यादा वक्त से बाबा काल भैरव को भैरव अष्टमी पर केक का भोग लगता है। केक के प्रसाद को पाने के लिए भी दूर-दराज से भक्त खींचे चले आते हैं। उनका मानना है कि प्रसाद ग्रहण करने और भैरव अष्टमी के दिन बाबा काल भैरव के दर्शन मात्र से सभी दुख और पाप का समन होता है। भैरव अष्टमी के दिन ही शिव के रौद्र रूप बाबा काल भैरव की उत्पत्ती हुई थी और काल भैरव को ब्रह्मा हत्या के दोष से मुक्ति काशी में ही मिली थी।

 


Ajay kumar

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