निकाय व लोकसभा चुनाव में रामचरित मानस और अतीक से सपा के संबंध को मुद्दा बनाएगी भाजपा

punjabkesari.in Sunday, Mar 19, 2023 - 12:34 PM (IST)

लखनऊ: रामचरित मानस की चौपाइयों को लेकर सपा के राष्ट्रीय महासचिव स्वामी प्रसाद मौर्य की खिलाफत पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव की चुप्पी और माफिया अतीक से सपा के संबधों को भाजपा निकाय व लोकसभा चुनाव में मुद्दा बनाने की तैयारी कर रही है। जहां एक तरफ स्वामी प्रसाद मौर्य के बयानों को नजरांदाज कर सपा प्रमुख जातीय समीकरणों में प्रदेश की राजनीति को उलझाने के मूड में हैं तो वहीं भाजपा को रामचरित मानस और अतीक के मुद्दे को लेकर हिन्दुत्व की राजनीति की ओर बढ़ रही है। स्वामी प्रसाद मौर्य जिस तरह रामचरित मानस की चौपाइयों के खिलाफ लगातार बयानबाजी कर रहे हैं, ये भाजपा को रास आ रहा है।

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स्वामी प्रसाद मौर्य को संरक्षण दे रहे हैं अखिलेश यादव
चुनाव के मौके पर भाजपा लोगों को बताएगी कि किस तरह से सपा प्रमुख अखिलेश यादव स्वामी प्रसाद मौर्य को संरक्षण दे रहे हैं और उनके बयानों का लगातार समर्थन कर रहे हैं। रामचरित मानस और उमेश पाल हत्याकांड में अतीक और उसके परिजनों पर हो रही कार्रवाई भाजपा के लिए चुनाव में जमीन तैयार कर रहे हैं।

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सपा का चुनाव में जातीय कार्ड नहीं होगा कामयाब
सूत्र ये भी बताते हैं कि सपा का चुनाव में जातीय कार्ड खेलना किसी सूरत में अब नहीं कामयाब होगा क्योंकि 2014 से लेकर 2023 तक पिछले नौ सालों में जनता हिन्दुत्व और राष्ट्रवाद को काफी समझ गई है। अब वे फिर से सपा-बसपा के जातीय समीकरणों में नहीं उलझेगी।

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भाजपा ने सभी जातियों को दिया सम्मान
भाजपा ने एक रणनीति के तहत सभी जातियों को अपने साथ जोड़ने का काम किया है। राष्ट्रपति जैसे महत्त्वपूर्ण पद पर दलित-अनुसूचित जाति समुदाय के लोगों को बिठाकर इन समुदायों का भरोसा जीतने की कोशिश की है। केंद्र सरकार ने बजट के माध्यम से भी इन जातियों के लिए लाभकारी योजनाएं बनाकर उनको आगे बढ़ाने का काम किया है, इस बात की संभावना कम ही है कि ये जातियां लौटकर सपा-बसपा के पास वापस जाएंगी।


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Content Writer

Ajay kumar

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