लॉकडाउन: जूता गांठने वाले मोची ने पेश की मानवता की मिसाल, गरीबों के लिए दान किए 22 किलो चावल

4/8/2020 12:30:12 PM

लखनऊ/गोरखपुर: कोरोना जैसी वैश्विक महामारी के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए 21 दिनों का देशव्यापी लॉकडाउन जारी है। पुलिस, डाक्टर और सफाई कर्मियों का इसमें बड़ा योगदान है। ऐसे में केंद्र व राज्य सरकार द्वारा लोगों तक राशन मुहैया कराने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। इस कड़ी में तमाम स्वयंसेवी संगठन और अन्य लोग भी अपने-अपने स्तर से इस महामारी से निपटने के लिए जनता का सहयोग कर रहे हैं। इसी बीच उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में सड़क किनारे जूता गांठने वाले मोची मुकलू ने गरीबों के लिए 22 किलों चावल दान कर मानवता की मिसाल पेश की है।

मुकलू के 22 किलो चावल पर करोड़ों की निधियां कुर्बान
बता दें कि मुकलू गोरखपुर के मूसाबार गांव के रहने वाले हैं। संकट की इस घड़ी में कैम्पियरगंज में सडक़ किनारे जूते की मरम्मत करने वाले मुकलू ने भूख से लड़ रहे लोगों के लिए अपनी मेहनत की कमाई से 22 किलो चावल खरीदकर गरीबों को दान दिया। मुकलू के 22 किलो चावल पर करोड़ों की निधियां और अहर्निश भंडारे कुर्बान हैं। उन्होंने 22 किलो चावल, 5 किलो आटा, 2 किलो आलू और कुछ बैगन मलिन बस्तियों में बांटने के लिए दान दिया। वह रोज सौ-सवा सौ रुपए कमाते हैं। बुजुर्ग मुकलू को यह प्रेरणा उन लोगों से मिली जो संकट की इस घड़ी में सैकड़ों की भूख शांत कर रहे हैं।

मुकूल के 3 बेटियां और 5 बेटे हैं
मूसाबार गांव 65 साल के मुकलू के तीन बेटियां और पांच बेटे हैं। सभी अलग-अलग रहते हैं। झोपड़ी बनाकर वह अपनी बूढ़ी पत्नी प्रभावती के साथ सडक़ किनारे झोपड़ी डाल कर रहते हैं। मोची के काम से कुछ कमा लेते हैं। लॉकडाउन के बाद से ही काम बंद है। पुलिस चौराहे पर बैठने भी दे तो कौन जूते बनवाने आएगा। फिर भी वह कहते हैं हम गरीब आदमी हैं साहब। 


Ajay kumar

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