14 साल जेल की सजा काटा निर्दोष मुकेश, कहा- शिक्षक बनने की थी तमन्ना...अब सब बर्बाद हो गया

3/8/2021 8:30:43 AM

लखनऊः निर्दोष होकर भी सजा का हकदार सीधे-सीधे कानून व्यवस्था पर चोट करता है। यही चोट लगी उत्तर प्रदेश बलिया के मुकेश तिवारी को, जिन्होंने निर्दोष रहते हुए भी 14 साल झूठे केस में सजा भोगी।  बता दें कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर हत्या के आरोप से मुक्त होकर मुकेश शनिवार की शाम जेल से निकलकर अपने घर पहुंचे। उन्हें देखकर परिजनों की आंखों में दर्द और खुशी के आंसु एक साथ छलक पड़े।

मुकेश के पिता सभासद रामप्रवेश तिवारी ने कहा कि मेरे जीते जी सम्मान वापस तो आ गया लेकिन इन 14 सालों बहुत कुछ बिखर गया। जुलाई 2007 से जेल में बंद मुकेश को वर्ष 2016 में कोर्ट से दो माह की पेरोल मिली थी। वहीं वर्षों बाद वनवास पूरा कर घर लौटे मुकेश ने कहा कि काउंसलिंग हो गयी थी। शिक्षक बनने की तमन्ना थी। इसी बीच 30 जुलाई 2007 को प्रेमशंकर मिश्र की हत्या में आरोपी बना दिया गया। निर्दोष होने की दलील देने के बावजूद तत्कालीन एसओ हसमत खां ने एक लाख रुपए की मांग की। पिता ने मां के गहने बेचकर एसओ को वह रकम दे दी थी। बावजूद इसके चार्ज बना दिया गया। सत्र न्यायालय में दो वर्ष चले मुकदमे के दौरान भी मेरे वकील ने निर्दोष होने के कई सबूत दिये। हालांकि कोर्ट ने उसे नहीं माना और मात्र मृतक की पत्नी की गवाही पर मुझे आजीवन कारावास की सजा सुना दी।

मुकेश ने आगे कहा कि मैं और मेरा परिवार बर्बाद हो चुका है। हाइकोर्ट ने निर्दोष माना। ऐसे में सरकार से अपील है कि मुझे सहारा दे ताकि जिंदगी पुन: ढंग से शुरू कर सकूं। आगे बता दें कि निर्दोष मुकेश के परिवार की आमदनी फिलहाल कुछ नहीं है। इनके पिता 1988 से लगातार सभासद निर्वाचित रहे हैं। वे बेटे के जेल जाने के बाद भी वार्ड के लोगों की सेवा और पैतृक खेती से जुड़े रहें। खेती से ही परिवार चलाते रहे और बेटे को न्याय दिलाने की लड़ाई लड़ी।मुकेश की पत्नी लक्ष्मी ने 14 साल तक पति के जेल से रिहा होने का इंतजार किया। मुकेश की चार वर्षीय मासूम बेटी है।


Content Writer

Moulshree Tripathi

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