गोबर और गंगा की मिट्टी से बन रहे खास दीये, असहाय महिलाओं को मिला रोजगार

punjabkesari.in Friday, Nov 06, 2020 - 12:50 PM (IST)

प्रयागराजः इस बार की दीपावली उन महिलाओं के लिए खास और यादगार होने जा रही है। जिन महिलाओं ने कोरोना काल में काफी मुश्किलों का सामना किया है। प्रयागराज की एक माहिला डॉक्टर ने ऐसी महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उनको रोजगार देने की अनोखी पहल की है। डॉ. कृतिका अग्रवाल ने प्रयागराज की कई असहाय या कहे कि जरूरतमंद महिलाओं को एक नया रोजगार देने का काम किया है। ये महिलाएं गाए के गोबर और गंगा की मिट्टी से दिए बना रही हैं। साथ ही इस बार गाय के गोबर और गंगा की मिट्टी से दीया बनाकर घरों को रोशन किया जाएगा। पिछले 15 दिनों से महिलाएं गोबर के दिए बनाने का काम कर रही हैं। बड़ी संख्या में महिलाएं न केवल इस कार्य से जुड़ी हैं। बल्कि प्रधानमंत्री के लोकल फॉर वोकल के सपने को भी मजबूती से जमीनी स्तर पर उतार रही हैं।
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साथ ही इससे सीएम योगी के गोरक्षा अभियान को भी बल मिलेगा। गंगा की मिट्टी और गाय के गोबर से बने दीयों की अभी से ही मांग बढ़ गई है। डॉ. कृतिका अग्रवाल ने बताया कि ये दीए पूरी तरह इको फ्रेंडली है। उन्होंने अपील की है कि इस बार भी लोग चाइनीज सामानों का बहिष्कार करे और स्वदेशी को अपनाएं। उन्होंने बताया कि लॉकडाउन के दौरान उन्होंने फैसला लिया कि कोरोना काल मे जिन महिलाओं को बहुत समस्याएं हुई हैं, उनके लिए वो कुछ करेंगी। ऐसे में उन्होंने दीवाली को ध्यान में रखते हुए गोबर के दीए बनाने का फैसला लिया। खुद की गौशाला होते हुए ये फैसला और भी आसान हो गया।
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उधर, दीये बना रही महिलाओं का कहना है कि लॉकडाउन के चलते काफी समस्या हुई। ऐसे में इस पहल से उनको एक रोज़गार भी मिल गया है और अब वो भी आत्मनिर्भर बन गई हैं। बाज़ारों में छोटे दीए 2 रुपए जबकि बड़े दिए 4 रुपए के दर पर मिलेंगे। गौरतलब है कि डॉ कृतिका अग्रवाल की इस पहल से कई महिलाओं को रोजगार तो मिला ही है साथ ही कई परिवारों की खुशी भी लौटी है।


 


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Tamanna Bhardwaj

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