UP की दो बेटियां हिसार में दिखाएंगी अपने मुक्के का दम, जानें गांव की गलियों से रिंग तक की कहानी ?

punjabkesari.in Friday, Oct 22, 2021 - 05:19 PM (IST)

कुशीनगर: बशीर बद्र की ये लाइने "जिस दिन से चली हु मंज़िल पर नजर हैं, आँखों ने कभी मिल के पत्थर नही देखे" कुशीनगर की दो बेटियां शिल्पा और अपराजिता की जिंदगी पर सटीक बैठती है। जिन्होंने पिछड़े इलाके में रहकर बॉक्सिंग को अपना कैरियर माना उनके कैरियर के लिए शिल्पा के भाई ने अपने खेल का सपना छोड़ दिया और अपनी बहन का साथ दिया। वहीं दोनों भाइयों ने परिवार का जिम्मा उठा कर मेहनत मजदूरी करने पर देश चले गए और आज शिल्पा ने अपने आपको साबित किया और अपने सपनों की तरफ लगातार आगे बढ़ रही है। वही उसी के साथ ट्रेनिंग करने वाली अपराजिता मणि भी एक गरीब परिवार की लड़की होने के बावजूद खेल की दुनिया को अपना कैरियर मान बॉक्सिंग रिंग में उतरी।

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शुरुआती दिनों में पिता और दादा बहुत समझाने की कोशिश की और रोक लगा दिया पर अपराजिता की मां ने अपनी बेटी के सपनों के लिए परिजनों से मंजूरी दिलाई। जिसकी देन आज कुशीनगर की दोनों बेटियां अपने-अपने भार वर्ग में बेहतर प्रदर्शन करते हुए प्रदेश लेवल तक के बड़े टूर्नामेंटों में शिल्पा ने 6 और अपराजिता ने 5 मेडल के साथ प्रदेश की बेस्ट महिला बॉक्सर में अपना नाम दर्ज कराया है। खेलने के लिए ना कोई जगह ना ट्रेनिंग के लिए कोई बेहतर ग्राउंड मैरिज हाल में एक प्राइवेट कोच के सहारे ट्रेनिंग कर इन दोनों बेटियों ने 21 से 27 अक्टूबर तक चलने वाली हरियाणा के हिसार में पाँचवी सीनियर नेशनल बॉक्सिंग टूर्नामेंट में अपने मुक्के का दम दिखाने अपने अपने भारवर्ग में प्रतिनिधित्व करने पहुंची हैं।

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5वीं नेशनल सीनियर बॉक्सिंग टूर्नामेंट में 48 किलो भारवर्ग में उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व करने वाली कुशीनगर जिले के हनुमाननगर पैकौली हाटा की रहने वाली 19 वर्षीय शिल्पा यादव के पिता रमाकांत यादव एक किसान है।  मध्यम परिवार की लड़की जो तीन भाई व दो बहनों में सबसे छोटी शिल्पा है। शिल्पा के पिता की तबीयत खराब रहती है। जिसके कारण दो भाई प्रदेश जाकर मजदूरी करते हैं और किसी तरह घर चलता है। वहीं बाकी दो बहनें और एक भाई अभी पढ़ाई कर रहे हैं। अपने छोटे भाई सुनील जो प्रदेश स्तर तक का बॉक्सिंग खिलाड़ी रहा है उसको ट्रेनिंग के लिए जाता देख शिल्पा भी घरवालों से जिद करती थी। पहले घर वालों ने उसकी बात नहीं सुनी। एक दिन उसका भाई शिल्पा को अपने साथ ले गया और उसके खेलने के तौर-तरीकों को देख कोच ने भाई से शिल्पा को रोज लाने को मना लिया। बहन की खेलने के जुनून को देखते हुए भाई सुनील ने भी साथ दिया।

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खेल में भाई बहन दोनों बेतरीन थे पर जब दोनों के खेलने और खर्चे से घर में आर्थिक संकट खड़ा होने लगा तब भाई सुनील ने अपने खेल की दुनिया को अलविदा कह के आईटीआई में अपना नाम लिखवा लिया और अपने बहन के खेल कैरियर के लिए उसका साथ दिया। शिल्पा ने भी कड़ी मेहनत करते हुए सन 2012 में बॉक्सिंग की दुनिया में कदम रखा। 2014 में आयोजित झांसी में सब जूनियर बॉक्सिंग चैंपियनशिप में गोरखपुर मंडल की तरफ से शिल्पा ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल हासिल किया। उसके बाद शिल्पा ने कई और खेलों में अपना बेहतर प्रदर्शन दिखाते हुए स्टेट लेवल तक के खेलो में बेहतर परफॉर्मेंस दिखाया और सन 2019 में बनारस यूथ बॉक्सिंग चैंपियनशिप में अपने भारवर्ग की प्रदेश में बेस्ट बॉक्सर चुनी गई। शिल्पा ने अब तक बड़े टूर्नामेंट में 6 मेडल अपने नाम कर चुकी हैं। 21 से 27 तारीख तक हो रही पांचवीं सीनियर नेशनल टूर्नामेंट में शिल्पा को 48 किलो भार वर्ग में उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला है।

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पाँचवी सीनियर नेशनल टूर्नामेंट में 57 किलो भारवर्ग में उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व करने वाली कुशीनगर की अपराजिता मणि के पिता भुनेश्वर मणि हाटा से तीन किमी दूर पटनी गाँव के किसान है। अपराजिता के दो भाईओ में इकलौती बहन है। एक भाई बड़ा और एक भाई छोटा है। अपराजिता का शुरू से पढ़ाई में मन नहीं लगता था पर इसके भाई पढ़ने में अव्वल है। अपराजिता ने हमेशा से पढ़ाई को छोड़ कुछ अलग कैरियर बनाने की फिराक में रहती थी। 2014 में उसने कई बार हाटा इलाके की बच्चियों द्वारा बॉक्सिंग में खेल का बेहतर प्रदर्शन की खबरें समाचार माध्यमों से पढ़ती रहती थी। समाचार पत्रों से मिली खबरों को देख अपराजिता ने अपने माँ से खिलाड़ी बनने का प्रस्ताव रक्खा। अपराजिता की मां अपने स्कूल के समय ही खिलाड़ी बनने का सपना देखी थी पर उनके पिता की आज्ञा न् मिलने से सपना अधूरा रह गया। जब उन्होंने अपनी बेटी की बाते सुनी तो उनके सपने फिर सच होते दिखने लगे। माँ ने किसी तरह घर वालों को अपराजिता को खेलने की ट्रेनिंग के लिए तैयार कर लिया।  2015 में अपराजिता ने बॉक्सिंग की दुनिया में अपना कदम रखा।

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अपराजिता की पारिवारिक स्थिति भी कुछ खास नही किसानी ही आय का मुख्य स्रोत है। अपराजिता जब ट्रेनिंग कर घर जाती थी तो काफी देर हो जाती। शाम होने की वजह से अपराजिता के दादा कई बार ना जाने की बात कहें लेकिन उसकी मां ने घरवालों को अंत तक तैयार कर लिया। अपराजिता खेल में 2016 में पहली बार अपने खेल का बेहतर प्रदर्शन दिखाया। वह अभी तक 5 गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया है।

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वहीं 2019 में मिर्जापुर में आयोजित यूथ बॉक्सिंग टूर्नामेंट में की प्रदेश की बेस्ट बॉक्सर का खिताब अपने नाम किया। 2019-20 में गोरखपुर विश्वविद्यालय की तरफ से ऑल इंडिया इंटरनेशनल बॉक्सिंग कॉन्टेस्ट मैं बेहतर प्रदर्शन करते हुए उड़ीसा में आयोजित फर्स्ट खेलो इंडिया चैंपियनशिप में ब्रांज मेडल जीता है। अब 21 से 27 तारीख तक होने वाले हिसार हरियाणा में पांचवी सीनियर नेशनल बॉक्सिंग टूर्नामेंट में 57 किलो भार वर्ग में उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व करेंगे।


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Content Writer

Umakant yadav

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