कानपुर में ''पोर्श'' जैसा खेल! ड्राइविंग सीट पर रईसजादा, कोर्ट में ड्राइवर; लैंबॉर्गिनी कांड में नया मोड़
punjabkesari.in Thursday, Feb 12, 2026 - 09:01 AM (IST)
Kanpur News: कानपुर की वीआईपी रोड पर अपनी रफ्तार और रसूख का प्रदर्शन करने वाले तंबाकू कारोबारी के बेटे शिवम मिश्रा का मामला अब 'ड्राइवर बनाम वीडियो' की जंग में तब्दील हो गया है। जहां एक तरफ कानून को 'मिर्गी के दौरे' और 'ड्राइवर' की ढाल से रोकने की कोशिश हो रही है, वहीं एक वायरल वीडियो ने इस पूरी कहानी के परखच्चे उड़ा दिए हैं।
क्या है पूरा मामला?
8 फरवरी की रात कानपुर का पॉश इलाका ग्वालटोली उस वक्त दहल गया, जब तंबाकू किंग केके मिश्रा के बेटे शिवम मिश्रा की तेज रफ्तार लैंबॉर्गिनी ने 6 लोगों को रौंद दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, टक्कर इतनी जोरदार थी कि एक मोटरसाइकिल सवार हवा में 10 फुट ऊपर उछल गया। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए शिवम मिश्रा के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज की है।
कोर्ट में 'ड्राइवर ड्रामा' और सरेन्डर का खेल
इस हाई-प्रोफाइल मामले में आज उस वक्त नया मोड़ आया जब शिवम का ड्राइवर मोहन कोर्ट पहुंचा। मोहन ने दावा किया कि गाड़ी वह चला रहा था और तकनीकी खराबी के कारण हादसा हुआ। हालांकि, कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए ड्राइवर का सरेन्डर स्वीकार नहीं किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि पुलिस रिकॉर्ड में मोहन का नाम 'वॉन्टेड' (Wanted) की लिस्ट में नहीं है, इसलिए उसका आत्मसमर्पण स्वीकार नहीं किया जा सकता।
वायरल वीडियो ने किया दूध का दूध, पानी का पानी
शिवम के पिता और वकील दावा कर रहे हैं कि शिवम को मिर्गी के दौरे आते हैं और वह गाड़ी नहीं चला रहा था। लेकिन घटना के तुरंत बाद का एक वीडियो अब 'प्राइम एविडेंस' बन चुका है। वीडियो में साफ़ दिख रहा है कि ड्राइविंग सीट पर शिवम मिश्रा ही बैठा है। एक बाउंसर, जिसके हाथ में वॉकी-टॉकी है, शिवम को सीट से बाहर निकलने में मदद कर रहा है। गाड़ी में उस वक्त कोई दूसरा ड्राइवर मौजूद नहीं था।
जब रसूख ने कानून को नचाने की कोशिश की
भारत में यह पहली बार नहीं है जब किसी रईसजादे को बचाने के लिए ड्राइवर को 'बलि का बकरा' बनाया गया हो:
- सलमान खान केस (2002): सालों बाद ड्राइवर अशोक सिंह ने जिम्मेदारी ली और सलमान बरी हो गए।
- पुणे पोर्श कांड (2024): जहां ब्लड सैंपल तक बदल दिए गए और ड्राइवर पर दबाव बनाया गया।
- संजीव नंदा (1999): बीएमडब्ल्यू से 6 लोगों को कुचलने के बाद गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश हुई।
कानपुर का यह मामला भी अब उसी दिशा में जाता दिख रहा है, जहां बीमारी और नौकर का सहारा लेकर कानून की आंखों में धूल झोंकने की तैयारी है।

