अंतिम संस्कार से लौटी थीं जिंदा, 9 दिन बाद अस्पताल में तोड़ा दम... 5 लाख का बिल देख भड़का परिवार

punjabkesari.in Monday, Aug 10, 2026 - 02:48 PM (IST)

Agra News: उत्तर प्रदेश के आगरा जिले से सामने आई शीला देवी की जिंदगी और मौत की कहानी ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। जिस 65 वर्षीय बुजुर्ग महिला को डॉक्टरों द्वारा मृत घोषित किए जाने के बाद परिवार अंतिम संस्कार की तैयारियों में जुटा था, 17 घंटे बाद उनके शरीर में हलचल हुई और वह जीवित पाई गईं। हालांकि, जिंदगी और मौत के बीच 9 दिनों तक चली लंबी लड़ाई के बाद आखिरकार रविवार को उन्होंने दम तोड़ दिया। मां की मौत के बाद अब बेटे ने इलाज करने वाले अस्पताल की कार्यप्रणाली और भारी-भरकम बिल पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

मिली जानकारी के मुताबिक, मामला आगरा की ट्रांस यमुना कॉलोनी (श्रीनगर क्षेत्र) का है। जहां की रहने वाली शीला देवी काफी समय से सांस की बीमारी से पीड़ित थीं और उनका इलाज बरेली के एक निजी मेडिकल कॉलेज में चल रहा था। 30 जुलाई को डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इसके बाद परिजन उनके पार्थिव शरीर को आगरा ले आए।

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घर पर मातम का माहौल था, अंतिम संस्कार के लिए कपड़े, कफन और फूल-मालाएं मंगवा ली गई थीं। तभी अंतिम दर्शन के दौरान शीला देवी के दामाद ने जैसे ही उनके पैर छुए, उन्हें शरीर में हल्की हलचल महसूस हुई। इसके बाद शीला देवी की आंखें खुलीं और उन्होंने परिजनों से बातचीत भी की। उन्होंने पूछा कि सब लोग क्यों रो रहे हैं और उन्हें कहां ले जाया जा रहा है? मृत मानी गई महिला को अचानक जीवित देखकर पूरा परिवार दंग रह गया।

शीला देवी को जीवित पाकर परिजन तुरंत उन्हें आगरा के घटिया आजम खां स्थित पार्क हॉस्पिटल ले गए, जहां उन्हें भर्ती कराया गया। 9 दिनों तक डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज चलता रहा और परिवार को उनके पूरी तरह ठीक होने की आस थी। लेकिन रविवार को इलाज के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ी और उन्होंने अंतिम सांस ली।

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शीला देवी की मौत के बाद उनके बेटे संजीव, जो बदायूं के एक निजी अस्पताल में कार्यरत हैं, ने पार्क हॉस्पिटल पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए हैं। संजीव का आरोप है कि अस्पताल में मरीजों को घटिया और लोकल ब्रांड की दवाइयां दी जा रही थीं। नर्सिंग स्टाफ मरीजों की देखभाल में भारी लापरवाही बरत रहा था। महज 9 दिनों के इलाज के नाम पर अस्पताल प्रशासन ने परिजनों को करीब 5 लाख रुपए का बिल थमा दिया।

बताया जा रहा है कि मां को खो चुके संजीव का कहना है कि वह इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच चाहते हैं। वह जल्द ही जिलाधिकारी और मुख्यमंत्री से अस्पताल प्रशासन के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराएंगे और इलाज से जुड़े सभी मेडिकल दस्तावेजों व दवाइयों की जांच की मांग करेंगे। हालांकि, अस्पताल पर लगाए गए इन आरोपों पर फिलहाल पार्क हॉस्पिटल प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। अब प्रशासनिक जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इलाज के दौरान किसी तरह की चिकित्सीय लापरवाही हुई थी या नहीं। 9 दिन पहले जिस घर में आंसुओं के बीच उम्मीद की किरण जगी थी, वहां अब फिर से मातम पसरा हुआ है।


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Content Editor

Anil Kapoor

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