हटाए गए या खुद हटे? राम मंदिर ट्रस्ट से बाहर होते ही गोपाल राव का बड़ा दावा- ''सोना-चांदी सब सुरक्षित, अफवाहों पर न दें ध्यान''
punjabkesari.in Thursday, Jul 09, 2026 - 07:32 AM (IST)
Ayodhya News: गोपाल नागरकट्टे उर्फ गोपाल राव ने दावा किया कि उन्हें श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से नहीं हटाया गया बल्कि कुछ समय के लिए बैठकों से दूर रहने के लिए कहा गया था। उन्होंने दावा किया कि चढ़ावा चोरी से संबंधित आरोपों को छोड़कर उनके खिलाफ सभी आरोप झूठे थे। मंदिर ट्रस्ट की हालिया बैठक के बाद पहली बार पत्रकारों से बात करते हुए राव ने कहा कि ट्रस्ट में कुछ आमंत्रित सदस्य हैं। इस विवाद के शुरू होने के बाद, दो लोगों ने नैतिक आधार पर इस्तीफा दे दिया। उनके इस्तीफे स्वीकार कर लिए गए।
गोपाल राव ने दिया सफाई में बड़ा बयान
उन्होंने कहा कि तब सभी ने फैसला किया कि मुझे कुछ दिन के लिए ट्रस्ट की कार्यवाही में शामिल नहीं होना चाहिए। मैं नई व्यवस्था में सहयोग करूंगा। नई टीम जब कार्यभार संभाल लेगी तो मैं अलग हो जाऊंगा। उन्होंने कहा कि मंदिर की व्यवस्थाएं ठीक से काम कर रही हैं और लोग अफवाहों पर ध्यान न दें। राव ने दावा किया कि मंदिर का सोना, चांदी और दान सुरक्षित है और जो कोई भी इसे सत्यापित करना चाहता है वह ऐसा कर सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि कथित चढ़ावा चोरी मामले में गिरफ्तार आठ आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई पुलिस की जिम्मेदारी है, ट्रस्ट की नहीं।
गोपाल राव ने खाली किया मंदिर परिसर का आवास
राव के बयान के एक दिन पहले ट्रस्ट ने कहा था कि पूर्व महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा सोमवार को ट्रस्ट की बैठक में उनके इस्तीफे स्वीकार किए जाने के बाद सदस्य नहीं रहे। कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने यह भी कहा था कि ट्रस्ट ने राव को प्रशासक और विशेष रूप से आमंत्रित सदस्यों की सूची से हटाने का फैसला किया है। इस बीच, मंदिर के सूत्रों ने कहा कि राव ने बुधवार को मंदिर परिसर में अपना आवास खाली कर दिया और कारसेवक पुरम में स्थानांतरित हो गए।
40 दिनों में सामने आए चोरी के 70 संदिग्ध मामले
सूत्रों ने कहा कि राव ने मंदिर परिसर में प्रवेश के लिए उन्हें जारी किया गया वाहन पास भी सरेंडर कर दिया और बुधवार को ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि से मुलाकात की। राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में 8 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित एक विशेष जांच दल (SIT) अलग से मामले की जांच कर रही है। एसआईटी के प्रारंभिक निष्कर्षों के अनुसार, जांचकर्ताओं ने 40 दिन की अवधि में चोरी के लगभग 70 संदिग्ध मामलों की पहचान की है और आरोपियों की भूमिका के साथ-साथ मंदिर की दान-गिनती प्रणाली में कथित प्रक्रियात्मक व सुरक्षा खामियों की जांच की जा रही है।

