Lucknow News: 10 ऑपरेशन, 21 लाख का कर्ज और सब्जी की दुकान… डॉक्टर की लापरवाही ने युवक को बना दिया अपाहिज

punjabkesari.in Tuesday, Jan 13, 2026 - 08:56 AM (IST)

Lucknow News: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के गोमतीनगर विस्तार में इलाज की आस लेकर आए एक युवक नीरज मिश्रा की जिंदगी अस्पताल की कथित लापरवाही की वजह से पूरी तरह बदल गई। सड़क हादसे में मामूली घायल हुए 35 वर्षीय नीरज ने गलत सर्जरी और लापरवाह इलाज की वजह से अपना पैर खो दिया और चलने-फिरने में असमर्थ हो गए। नीरज का कहना है कि तीन साल पहले इलाज के दौरान हुई कथित मेडिकल नेग्लिजेंस ने उनकी जिंदगी को पूरी तरह बदल दिया। उनके पैर में संक्रमण इतना बढ़ गया कि उन्हें 9 से 10 बार ऑपरेशन कराना पड़ा।

तीन साल पहले बैटरी रिक्शा पलटने से घायल हुए थे नीरज
नीरज मिश्रा खरगापुर, कौशलपुरी के रहने वाले हैं। तीन साल पहले बैटरी रिक्शा पलटने की दुर्घटना में वे घायल हो गए थे। इलाज के लिए एक हॉस्पिटल ले जाया गया, लेकिन वहां हुई कथित गलत सर्जरी और लापरवाही ने उनकी जिंदगी भर प्रभावित कर दी। नीरज के मुताबिक, उन्हें ऑपरेशन के बाद पूरी तरह ठीक होने का आश्वासन दिया गया और उनसे पैसे जमा करवा लिए गए। उन्हें दूसरे अस्पताल दिखाया गया, लेकिन पैसे वहीं जमा कराने पड़े।

टांके ठीक से नहीं लगे, जल्दी में डिस्चार्ज
नीरज ने बताया कि रातों-रात उन्हें दूसरे अस्पताल से वापस उसी हॉस्पिटल ट्रांसफर किया गया और दोबारा पैसे जमा कराए गए। जल्दबाजी में टांके ठीक से नहीं लगे, और सुबह ड्रेसिंग बदल दी गई। करीब 14 दिन बाद उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया।

चलने लायक भी नहीं बचा, 10 ऑपरेशन हुए
डिस्चार्ज के बाद नीरज की हालत लगातार बिगड़ती चली गई। दूसरे अस्पताल और सिविल अस्पताल में इलाज करने के बाद भी उन्हें संतोषजनक इलाज नहीं मिला। अंततः एक प्राइवेट हॉस्पिटल में जाकर उनका 10वां ऑपरेशन हुआ।

21 लाख का कर्ज और परिवार चलाने के लिए सब्जी की दुकान
लगातार इलाज और ऑपरेशन के कारण नीरज के ऊपर करीब 21 लाख रुपये का कर्ज हो गया। उन्होंने सब्जी की दुकान लगाकर परिवार चलाना शुरू किया। सरकार की ओर से उन्हें 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता मिली, और मोहल्ले के लोगों ने भी मदद की। फिर भी लगभग 10 लाख रुपये का कर्ज अब भी बाकी है, जिसे वसूली के लिए लोग रोज उनके घर पहुंच रहे हैं। नीरज का कहना है कि उन्होंने उत्तर प्रदेश के डिप्टी CM ब्रजेश पाठक को 13 बार आवेदन भेजा, साथ ही सीएमओ, एजी मंडल, प्रमुख सचिव स्वास्थ्य और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक शिकायत भेजी, लेकिन लंबे समय तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

अस्पताल संचालक ने आरोप खारिज किए
अस्पताल संचालक का कहना है कि नीरज और उनके परिवार के पास पर्याप्त पैसे नहीं थे और वे बार-बार ऑपरेशन की गुहार लगा रहे थे। उन्होंने बताया कि अस्पताल में ऑपरेशन की सुविधा नहीं थी। संचालक ने कहा कि नीरज की शिकायत पर जिस यूनिट में इलाज चल रहा था, उसे बंद कर दिया गया। उनका दूसरा अस्पताल ‘जच्चा-बच्चा अस्पताल’ भी बंद किया गया था, लेकिन सीएमओ लखनऊ की जांच में उसे निर्दोष पाया गया और फिर से खोला गया। संचालक ने नीरज के आरोपों को सिरे से खारिज किया।


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Content Editor

Anil Kapoor

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