UGC के नए नियम पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक, सरकार से मांगा जवाब

punjabkesari.in Thursday, Jan 29, 2026 - 01:42 PM (IST)

नेशनल डेस्क: उच्चतम न्यायालय ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के हाल ही में नोटिफाइड नियमों को चुनौती देने वाली याचिका पर आज सुनवाई की है। कोर्ट ने यूजीसी द्वारा 13 जनवरी को उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने संबंधी विनियम 2026 को अधिसूचित किए जाने वाले नियम पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने इसे लेकर सरकार से जवाब मांगा है। कोर्ट ने कहा कि विशेषज्ञ भाषा को स्पष्ट करें। इस मामले को लेकर कोर्ट 19 मार्च को अगली सुनवाई करेगा।

उच्चतम न्यायालय की महत्तवपूर्ण बातें :- 

  • CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या की बेंच ने नए नियमों पर सवाल उठाते हुए कहा- हमने जातिविहीन समाज की दिशा में कितना कुछ भी हासिल किया है। क्या अब हम उल्टी दिशा में चल रहे हैं ?
  • CJI ने कहा- शैक्षणिक संस्थानों में भारत की एकता झलकनी चाहिए।
  • CJI ने केंद्र से कहा- आप SC/ST स्टूडेंट्स के लिए अलग हॉस्टलों की बात कर रहे हैं। ऐसा मत कीजिए। आरक्षित समुदायों में भी ऐसे लोग हैं जो समृद्ध हो गए हैं। कुछ समुदाय दूसरों की तुलना में बेहतर सुविधाओं का आनंद ले रहे हैं।
  • कोर्ट ने आगे कहा- नियमों की परिभाषा पूरी तरह अस्पष्ट है। इसका दुरुपयोग हो सकता है। कुछ एक्सपर्ट्स इसमें संशोधन की सलाह दे सकते हैं। 
  • हम विश्वविद्यालयों में एक स्वतंत्र और समान वातावरण बनाने की कोशिश कर रहे हैं। जब तक 3e प्रणाली कायम है, हमें कोई कारण नहीं दिखता... 3c प्रणाली प्रासंगिक कैसे हो सकती है? क्या यह अनावश्यक है?

उच्च शिक्षण संस्थानों में भेदभाव रोकने के लिए यूजीजी ने बनाए थे नियम 
आप को बता दें कि यूजीजी ने उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति-आधारित भेदभाव को रोकने के मकसद से बनाए गए हैं, लेकिन याचिकाकर्ता ने शिकायत निवारण तंत्र से सामान्य वर्ग के छात्रों को बाहर रखने पर चिंता जताई थी। जब यह याचिका मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के सामने आई तो उन्होंने कहा, 'हमें पता है कि क्या हो रहा है। सुनिश्चित करें कि कमियों को दूर किया जाए।' ये नियम यूजीसी के उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के लिए विनियम, 2026 के तहत आते हैं। इस नियम को 13 जनवरी को नोटिफाइड किया गया था और ये देश के कई उच्च शिक्षण संस्थानों पर लागू होते हैं।

नीतियों के प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने का यूजीसी ने दिया था आदेश 
इन नियमों का उद्देश्य धर्म, नस्ल, लिंग, जन्म स्थान, जाति या विकलांगता के आधार पर भेदभाव को खत्म करना था। ये नियम खासकर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों और विकलांग व्यक्तियों के सदस्यों के होने वाले शोषण की घटनाओं को रोकने और उच्च शिक्षा में समानता और समावेशन को बढ़ावा देने के लिए बनाए गए थे। नियमों के तहत, उच्च शिक्षण संस्थानों को वंचित समूहों के लिए नीतियों के प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने और भेदभाव की शिकायतों की जांच करने के लिए समान अवसर केंद्र और समानता समितियों की स्थापना करना आवश्यक है।

यूजीसी के नए नियम को लेकर 19 मार्च होगी अगली सुनवाई 
हालांकि, सर्वोच्च अदालत के समक्ष याचिका में तकर् दिया गया है कि ये नियम प्रकृति में अनुचित इसलिए हैं, क्योंकि वे सामान्य वर्ग के छात्रों को शिकायत निवारण और संस्थागत सुरक्षा तक पहुंच से वंचित करते हैं। याचिकाकर्ता ने नियमों को उनके मौजूदा स्वरूप में लागू करने पर रोक लगाने के निर्देश मांगे हैं। याचिका में भी कहा गया है कि जाति पहचान के आधार पर शिकायत निवारण तंत्र तक पहुंच से इनकार करना 'अस्वीकार्य राज्य भेदभाव' के बराबर है। याचिका में तकर् देते हुए कहा गया है कि ऐसा चयनात्मक ढांचा प्रभावी रूप से गैर-आरक्षित श्रेणियों के खिलाफ दुश्मनी को बढ़ावा देता है और समानता के मूल उद्देश्य को कमजोर करता है। फिलहाल अब इस मामले को लेकर अगली सुनवाई 19 मार्च होगी।

 


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Content Writer

Ramkesh

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