राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामला: जेब और जूतों में छिपाए नोट, 40 दिन में 70 बार हाथ साफ... SIT रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे

punjabkesari.in Tuesday, Jul 07, 2026 - 01:38 PM (IST)

Ayodhya News: अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे में हुई कथित चोरी और गबन के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस पूरे विवाद के बीच सोमवार को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की एक हाईलेवल मैराथन बैठक हुई। करीब 5 घंटे तक चली इस बैठक में पूर्व महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफों से लेकर जांच की प्रगति और ट्रस्ट की आगे की रणनीति पर गंभीर मंथन हुआ। दूसरी ओर, इस पूरे मामले की जांच कर रही विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट सामने आ गई है, जिसने मंदिर प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

जूतों और कपड़ों में छिपाकर ले गए नोटों की गड्डियां
SIT की जांच रिपोर्ट के मुताबिक, राम मंदिर के दानपात्रों से चढ़ावे की गिनती के दौरान जमकर हेराफेरी की गई। CCTV फुटेज खंगालने पर पता चला कि 27 अप्रैल 2026 से 5 जून 2026 के बीच गिनती कक्ष के अंदर कर्मचारियों ने करीब 70 बार चोरी की वारदातों को अंजाम दिया। फुटेज में साफ दिख रहा है कि नोटों की गिनती करने वाले कर्मचारी ही नोटों की गड्डियां और खुले पैसे अपने कपड़ों, जेबों और जूतों में छिपाकर बाहर ले जा रहे थे। जांच टीम ने माना है कि यह कोई अचानक हुई चोरी नहीं थी, बल्कि मिलीभगत से कई दिनों तक लगातार चलाया जा रहा एक व्यवस्थित खेल था।

इन 6 लोगों के नाम आए सामने, लाखों रुपए बरामद
SIT ने अपनी शुरुआती रिपोर्ट में इस गबन के पीछे मुख्य रूप से 6 लोगों की संलिप्तता पाई है। इन आरोपियों में अविनाश शुक्ला, अनुकूल मिश्र, लवकुश मिश्र, मनीष कुमार यादव, करुणेश पाण्डेय और रामशंकर मिश्र शामिल हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि औपचारिक जांच शुरू होने से ठीक पहले ही कुछ कर्मचारियों के पास से लगभग 78.94 लाख रुपए बरामद किए गए थे। इसके बाद 4 जून 2026 को गिनती कक्ष से 2.25 लाख रुपए की अतिरिक्त नकदी भी जब्त की गई। हैरान करने वाली बात यह है कि जब इन आरोपियों के बैंक खातों की जांच की गई, तो उसमें उनकी घोषित आय से कहीं ज्यादा का वित्तीय लेनदेन और नकद जमा मिला है।

सुरक्षा और नियमों की धज्जियां उड़ीं
SIT की रिपोर्ट ने गिनती कक्ष के भीतर सुरक्षा के दावों की पोल खोलकर रख दी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि गिनती कक्ष में एंट्री और एग्जिट के समय कर्मचारियों की कोई तलाशी नहीं ली जाती थी। कई दानपात्रों के पैसे को एक साथ मिलाकर गिना जाता था, जिससे किस पात्र में कितना पैसा था, इसका कोई रिकॉर्ड ही नहीं मिल पा रहा है। मूल्यवान वस्तुओं और सोने-चांदी के रिकॉर्ड के सत्यापन में भी गंभीर लापरवाही बरती गई। फिलहाल, ट्रस्ट की बैठक में इन खुलासों के बाद सुरक्षा व्यवस्था, सीसीटीवी निगरानी और नई SOP लागू करने पर मुहर लगाई गई है। पुलिस अब आरोपियों के बैंक खातों और संपत्तियों की गहराई से जांच कर रही है।


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Content Editor

Anil Kapoor

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