Birthday Special: ...जब मुलायम को MLA बनाने के लिए सैफई के लोगों ने त्याग दिया था अन्न

punjabkesari.in Monday, Nov 22, 2021 - 12:21 PM (IST)

इटावाः समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव को पहली दफा विधायक बनाने के लिए उनके गांव सैफई के लोगों ने एक शाम का खाना तक छोडा था। सैफई गांव के कइयों सालों तक प्रधान रहे दिवंगत दर्शन सिंह यादव के नाती अंकित यादव अपने बाबा के सुनाए हुए संस्मरणो का जिक्र करते हुए बताते हैं कि नेताजी के (मुलायम सिंह यादव) चुनाव लड़ने के लिए पैसे का जुगाड़ करने में लगे हुए थे, लेकिन पैसे का जुगाड़ नहीं हो पा रहा था। एक दिन नेताजी के घर की छत पर पूरे गांववालों की बैठक हुई जिसमे सभी जाति के लोगों ने भाग लिया।

उन्होंने पुरानी यादों को ताजा करते हुए कहा कि गांव के ही सोने लाल शाक्य ने बैठक में सबके सामने कहा कि मुलायम सिंह यादव हमारे हैं और उनको चुनाव लड़ाने के लिए हम गांव वाले एक शाम खाना नहीं खाए। एक शाम खाना नहीं खाने से कोई मर नहीं जायेगा पर एक दिन खाना छोड़ने से आठ दिनों तक मुलायम की गाड़ी चल जाएगी। जिस पर सभी गांव वालों ने एक जुट हो सोने लाल के प्रस्ताव का समर्थन किया और वही हुआ।

यादव बताते है कि मुलायम सिंह यादव को बचपन से ही पहलवानी का बड़ा शौक था। शाम को स्कूल से लौटने के बाद वे अखाड़े में जाकर कुश्ती लड़ते थे। जहां पर वे अखाड़े में बड़े से बड़े पहलवान को चित्त कर देते थे । वे बताते हैं कि नेता जी का बचपन अभावों में बीता पर वे अपने साथियों की मदद के लिए हमेशा तैयार रहते थे। मुलायम सिंह छोटे कद के थे, लेकिन उनमें गजब की फुर्ती थी। अक्सर वे पेड़ों पर चढ़ जाते थे और आम, अमरुद, जामुन बगैरह तोड़कर अपने साथियों को खिलाते थे। कई बार लोग उनकी शिकायत लेकर उनके घर पहुंच जाते थे। तब उन्हें पिताजी की डांट भी पड़ती थी। बाबा बताते थे कि उनकी मित्र मंडली में दो लोग और भी थे। हाकिम सिंह और बाबूराम सेठ काफी दिनों पहले दुनिया से विदा हो चुके है अब 17 अक्टूबर को बाबा भी नही रहे । जिनके दुनिया से विदा होने का सबका बहुत ही दुख है। मुलायम सिंह यादव ने मैनपुरी के जिस कालेज में पढ़ाई की, बाद में उसी कालेज में पढ़ाया।

मुलायम सिंह यादव को राजनीति में लाने का श्रेय अपने समय के कद्दावर नेता नत्थू सिंह को जाता है। चौधरी नत्थू सिंह ने मुलायम सिंह के लिए अपनी सीट छोड़ दी। उन्हें चुनाव लड़वाया और सबसे कम उम्र में विधायक बनवाया। उस समय बहुत सारे लोग ऐसे थे जिन्होंने मुलायम सिंह को विधानसभा का टिकट दिए जाने का विरोध किया था, लेकिन नत्थू सिंह के आगे किसी का विरोध नहीं चला । मुलायम सिंह यादव आज देश के बहुत बड़े नेता हैं लेकिन जब भी उनसे मुलाकात होती है तो बचपन की पुरानी बातों को याद करते हैं। वे कहते हैं कि मुलायम सिंह ने न जाने कितने लोगों की मदद की है लेकिन वे कभी किसी पर इस बात का एहसान नहीं जताते । बाबा बताते थे कि जब नेता जी को पहली बार विधानसभा का टिकट मिला था तो हम लोगों ने जनता के बीच जाकर वोट के साथ-साथ चुनाव लड़ने के लिए चंदा भी मांगा था।

मुलायम जन्मदिन तीन अंतिम इटावा मुलायम सिंह अपने भाषणों में लोगों से एक वोट और एक नोट (एक रुपया) देने की अपील करते थे। नेता जी कहते थे कि हम विधायक बन जाएंगे तो किसी न किसी तरह से आपका एक रुपया ब्याज सहित आपको लौटा देंगे। लोग मुलायम सिंह की बात सुनकर खूब ताली बजाते थे और दिल खोलकर चंदा देते थे। बाबा बताते थे कि पहले हम लोग साइकिल से चुनाव प्रचार करते थे । बाद में चंदे के पैसों से एक सेकेंड हैंड कार खरीदी पर हम लोगों को इस कार को खूब धक्के लगाने पड़ते थे, क्योंकि यह कार बार-बार बंद हो जाया करती थी। मुलायम सिंह को राजनीति में बहुत संघर्ष करना पड़ा लेकिन उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी। नत्थू सिंह ने मुलायम सिंह को राजनीति में आगे बढ़ाया। नत्थू सिंह ने मुलायम सिंह के लिए अपनी सीट छोड़ी। वे कहते थे कि मुलायम सिंह पढ़े-लिखे हैं। इसलिए इनको विधानसभा में जाना चाहिए। नेता जी मुलायम सिंह की एक बड़ी खासियत है कि वे अपने लोगों को हमेशा याद रखते हैं। अपनों को कभी भूलते नहीं। भारतीय राजनीति में जमीन से जुड़े नेताओं का जब भी जिक्र किया जाता है तो उनमें समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव का नाम काफी ऊपर दिखाई देता है। 


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Content Writer

Tamanna Bhardwaj

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