पुलिस एक्शन पर केस दर्ज होना मनोबल तोड़ने वाला, संभल में पुलिस पर हुई कार्रवाई पर बोले- पूर्व डीजीपी देवेंद्र चौहान
punjabkesari.in Saturday, Jan 17, 2026 - 01:09 PM (IST)
बुलंदशहर: संभल में पुलिस कार्रवाई के बाद कोर्ट के आदेश के बाद दर्ज किए गए मुकदमे को लेकर लेकर अब सियासत तेज हो गई है। इसी कड़की में उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) देवेंद्र सिंह चौहान ने कड़ा रुख अपनाया है। बुलंदशहर में मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने इस एफआईआर को भारतीय कानून की भावना के खिलाफ बताया और कहा कि पुलिस को अपने कर्तव्य के निर्वहन के दौरान की गई वैधानिक कार्रवाई के लिए संरक्षण मिलना चाहिए।
कार्रवाई पर मुकदमा दर्ज होगा तो जनता की सुरक्षा कैसे कर पाएंगे पुलिस
पूर्व डीजीपी देवेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि भारतीय कानून व्यवस्था के तहत यदि पुलिस अपने अधिकार क्षेत्र में रहते हुए कार्रवाई करती है तो उसे बाद में कानूनी सुरक्षा (प्रोटेक्शन) दी जाती है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि हर कार्रवाई के बाद पुलिस कर्मियों पर मुकदमे दर्ज होने लगेंगे, तो वे जनता के जान-माल की सुरक्षा कैसे कर पाएंगे।
उच्च न्यायालयों की शरण में जाएगा पुलिस
उन्होंने कहा कि ऐसी एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस अधिकारियों के पास एकमात्र रास्ता उच्च न्यायालयों का दरवाजा खटखटाने का रह जाता है, जो न केवल समय लेने वाला होता है बल्कि मनोबल भी तोड़ता है। देवेंद्र चौहान ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पुलिस को उनके एक्शन के लिए दोषी नहीं ठहराया जा सकता, बशर्ते कार्रवाई कानून के दायरे में की गई हो।
पुलिस का काम अपराधियों से लड़ना
पूर्व डीजीपी ने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि भविष्य में कोई अपराधी किसी की अस्मिता पर हमला करता है और पुलिस इस डर से पीछे हट जाए कि कार्रवाई करने पर उस पर भी मुकदमा दर्ज हो जाएगा, तो यह स्थिति समाज और कानून व्यवस्था दोनों के लिए घातक होगी। उन्होंने कहा कि पुलिस का काम अपराधियों से लड़ना है, न कि हर कदम पर कानूनी भय में जीना।
मामले में जांच की प्रक्रिया पूरी हो
हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी मामले में जांच की प्रक्रिया पूरी तरह होनी चाहिए और दोषी पाए जाने पर कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। लेकिन सिर्फ कार्रवाई करने के आधार पर पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करना न्यायसंगत नहीं है।
मुकदमें दर्ज होने से पुलिस बल का मनोबल टूटता
उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के निदेशक भी रहे देवेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि यह उनकी व्यक्तिगत राय है कि इस तरह के मुकदमे दर्ज नहीं होने चाहिए, क्योंकि इससे पुलिस बल का मनोबल टूटता है और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में गंभीर बाधा उत्पन्न होती है।

