Braj Holi 2026 : रंगभरी एकादशी से वृन्दावन में होली की शुरुआत, पूजा-पाठ के बाद शुरू हुआ उत्सव, ठाकुरजी संग रंग खेल निहाल हुए भक्त

punjabkesari.in Friday, Feb 27, 2026 - 04:07 PM (IST)

मथुरा : रंगभरी एकादशी से शुक्रवार को वृन्दावन के मंदिरों में होली उत्सव की शुरुआत हो गई, जहां प्रमुख मंदिरों के बाहर श्रद्धालुओं की लंबी-लंबी कतारें देखी गईं और पूरा शहर पारंपरिक 'रसिया' भजनों से गूंज उठा। बांके बिहारी मंदिर में पुजारियों ने कहा कि उत्सव की शुरुआत भगवान बांके बिहारी द्वारा प्रतीकात्मक रूप से भक्तों के साथ होली खेलने के साथ हुई। मंदिर के सेवायत (पुजारी) ज्ञानेंद्र किशोर गोस्वामी ने कहा कि अनुष्ठान की शुरुआत ठाकुर जी द्वारा राधा रानी पर केसर, गुलाब जल, टेसू का अर्क और पिचकारी से इत्र से भरा पानी छिड़कने से हुई। 

गोस्वामी ने इस त्योहार की शुरुआत द्वापर युग से बताते हुए कहा कि ऐसा माना जाता है कि राधा ने सबसे पहले भगवान कृष्ण के गालों पर रंग लगाया था, जो ब्रज में होली की परंपराओं की शुरुआत का प्रतीक था। एकादशी अनुष्ठान के बाद, भगवान को प्रसाद के रूप में गुजिया और जलेबी अर्पित की गई। उन्होंने कहा, ''बांके बिहारी ने इस अवसर के लिए सफेद पोशाक पहनी और धुलंडी तक ऐसा करना जारी रखेंगे, जब वह गुलाबी वस्त्र पहनेंगे। सुबह और शाम, दोनों पहर के दर्शनों के दौरान होली उत्सव मनाया जाएगा।' ' इतिहासकार प्रह्लाद बल्लभ गोस्वामी ने कहा कि ब्रज में 'होली रसिया' गाने की परंपरा का एक लंबा इतिहास है, जिसमें हिंदू और मुस्लिम दोनों कवियों द्वारा रचनाएं लिखी गई हैं। 

सुबह से ही 'आज बिरज में होली रे रसिया' जैसे भजन न सिर्फ मंदिरों में बल्कि वृन्दावन की तंग गलियों में भी गूंजते रहे। बांके बिहारी मंदिर के एक अन्य सेवायत अनंत गोस्वामी ने कहा कि स्वामी हरिदास भगवान की पूजा करते समय भक्ति छंद गाते थे और यह प्रथा आज भी जारी है। भक्तों ने भगवान के साथ फूलों की होली भी खेली, जबकि आने वाले दिनों में लड्डू होली और जलेबी होली का कार्यक्रम है। मंदिर के सेवायत शशांक गोस्वामी ने कहा कि भारी भीड़ के बावजूद भक्तों ने अपने प्रिय देवता के साथ होली खेलते हुए जबरदस्त उत्साह दिखाया। 


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Content Editor

Purnima Singh

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