55 बार मनाई सुहागरात! रात के अंधेरे में नई नवेली दुल्हन संग करता ''वो वाला'' काम, फिर सुबह होते ही... नजारा देख फूट-फूटकर रोया परिवार

punjabkesari.in Thursday, Jan 01, 2026 - 06:17 PM (IST)

Viral News : राजस्थान की वीरों से भरी भूमि की कहानियां आपने सुनी होंगी, लेकिन इसी रेगिस्तान में एक ऐसा काला अध्याय भी दर्ज है, जो सुनकर रूह कांप उठती है। यह कहानी है जीयाराम की, जिसे बाड़मेर और आसपास के सरहदी इलाकों में 'कुंवारे जंवाई राजा' के नाम से जाना जाता था।

जीयाराम ने अपने अजीब और डरावने अपराध से 55 बार सुहागरात मनाई। रात के अंधेरे में वह नई नवेली दुल्हन के साथ अपराध करता और सुबह होते ही गायब हो जाता। रिश्तों की पवित्रता और समाज के विश्वास को ढाल बनाकर उसने दर्जनों मासूम जिंदगियों को बर्बाद किया।

जंवाई राजा बनकर करता था धोखा
जीयाराम का अपराध करने का तरीका (Modus Operandi) किसी डरावनी फिल्म की कहानी जैसा था। वह केवल अंधेरे या हथियारों से नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक खेल खेलकर शिकार करता था। वह उन घरों की तलाश करता जहां हाल ही में शादी हुई हो और दुल्हन पहली बार अपने मायके आई हो। वह सुनिश्चित करता कि घर के पुरुष बाहर काम पर गए हों। रात के अंधेरे का फायदा उठाकर वह दामाद बनकर घर में प्रवेश करता। 

रात भर सुहागरात का ढोंग
गांवों में उस समय बिजली नहीं थी और घूंघट प्रथा के कारण बुजुर्ग उसे असली दामाद समझकर आतिथ्य देते। बड़ी बेशर्मी के साथ वह दुल्हन के कमरे में पति बनकर दाखिल होता। लोक-लाज और संकोच के कारण परिवार के किसी सदस्य को उस पर शक नहीं होता। वह पूरी रात सुहागरात का ढोंग करता और जैसे ही सब गहरी नींद में सो जाते, अपना असली अपराध अंजाम देता।

यह भी पढ़ें : भारत की Himanshi Khurana का Canada में मर्डर! पार्टनर को ढूंढ रही पुलिस, कातिल की सामने आई फोटो.... घर के अंदर से मिली लाश 

लूट और सामाजिक शर्म का खेल
जीयाराम का मकसद सिर्फ शारीरिक शोषण नहीं था। वह सोती हुई दुल्हन के सोने-चांदी के गहने और घर की तिजोरी साफ कर देता और सुबह होते ही गायब हो जाता। सुबह सच सामने आने पर परिवार सदमे में डूब जाता। कई परिवारों ने बदनामी के डर से कभी पुलिस में शिकायत नहीं की। कई महिलाएं पूरे जीवन इस दर्दनाक सच को किसी से साझा किए बिना जीती रहीं। 

पुलिस रिकॉर्ड और हकीकत
राजस्थान पुलिस के दस्तावेजों में जीयाराम शातिर हिस्ट्रीशीटर के रूप में दर्ज था। उसके खिलाफ पहला मुकदमा 1988 में चौहटन थाने में दर्ज किया गया था। इसके अलावा पुलिस रिकॉर्ड में उसके खिलाफ चोरी और छेड़छाड़ के 17 मामले दर्ज थे। उसने 55 से अधिक घरों की खुशियां उजाड़ी थीं। जीयाराम ने 1990-1996 के बीच बाड़मेर के सिणधरी, समदड़ी और धोरीमन्ना क्षेत्रों में अपना आतंक फैलाया हुआ था। 

अपराधी का अंत और पीछे छूटा डर
जीयाराम कई बार जेल गया और बाहर आकर फिर अपराध करने लगा। लेकिन 2016 में फेफड़ों की गंभीर बीमारी के कारण इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। भले ही वह मर गया, लेकिन उसका खौफ आज भी सीमावर्ती गांवों की कहानियों में जिंदा है। यह मामला एक सबक है कि कैसे अपराधियों ने समाज की पुरानी परंपराओं जैसे घूंघट और बिजली की कमी का फायदा उठाकर मानवता को शर्मसार किया।  


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Editor

Purnima Singh

Related News

static