मतदाता सूची से करोड़ों नाम गायब! अखिलेश का आरोप, BJP नेताओं को पहले कैसे पता चला वोटरों का आंकड़ा”
punjabkesari.in Saturday, Jan 10, 2026 - 06:20 PM (IST)
लखनऊ: समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) की कार्यप्रणाली और उसकी ‘विश्वसनीयता’ पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। शनिवार को लखनऊ में मीडिया से बातचीत के दौरान यादव ने कहा कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया पर अब संदेह गहराता जा रहा है, क्योंकि भाजपा नेताओं को पहले ही यह जानकारी थी कि कितने मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाएंगे।
भाजपा नेताओं को पहले से कैसे पता चला आंकड़ा?
अखिलेश यादव ने कहा कि मसौदा मतदाता सूची जारी होने से पहले ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक रूप से दावा किया था कि करीब चार करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाएंगे। जबकि उस समय तक यह जानकारी किसी के पास नहीं थी। उन्होंने सवाल किया कि जब आयोग ने अभी आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए थे, तो भाजपा नेताओं को यह जानकारी कैसे मिल गई।
एसआईआर प्रक्रिया में सभी दलों की भागीदारी, फिर भी सवाल क्यों?
सपा प्रमुख ने बताया कि उत्तर प्रदेश में हुए विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान में बूथ लेवल एजेंट (BLA) सहित सभी राजनीतिक दलों ने बिना किसी आपत्ति के भाग लिया। इसके बावजूद, मंगलवार को जब मसौदा मतदाता सूची जारी हुई तो सामने आया कि 15.44 करोड़ मतदाताओं में से 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं।
जिलावार आंकड़ों पर भी संदेह
अखिलेश यादव ने कहा कि कन्नौज के एक पूर्व सांसद पहले ही दावा कर चुके हैं कि उनके जिले में करीब तीन लाख मतदाताओं के नाम हटाए जा चुके हैं। इसके अलावा, अलग-अलग जिलों की दो विधानसभा सीटों से भी बड़े पैमाने पर मतदाता नाम हटाए जाने की बात सामने आई है। उन्होंने कहा कि यदि भाजपा नेता इस तरह के बयान दे रहे हैं, तो यह सीधे तौर पर निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करता है।
चुनाव आयोग का पक्ष
मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) नवदीप रिणवा ने बताया था कि विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद मंगलवार को उत्तर प्रदेश की मसौदा मतदाता सूची प्रकाशित की गई है। इसमें मृत्यु, स्थायी प्रवास और एकाधिक पंजीकरण जैसे कारणों से 2.89 करोड़ मतदाताओं (करीब 18.70 प्रतिशत) के नाम हटाए गए हैं, जबकि 12.55 करोड़ मतदाताओं को सूची में बरकरार रखा गया है। अंतिम मतदाता सूची 6 मार्च को प्रकाशित की जाएगी।
पंचायत और विधानसभा मतदाता सूची में अंतर पर सवाल
अखिलेश यादव ने पंचायत और विधानसभा चुनाव की मतदाता सूचियों के आंकड़ों में अंतर को लेकर भी संदेह जताया। उन्होंने कहा कि पंचायत चुनावों में ग्रामीण मतदाताओं की संख्या 12.69 करोड़ बताई जा रही है, जबकि विधानसभा चुनाव में वोट देने के पात्र मतदाता 12.56 करोड़ हैं। उन्होंने सवाल किया कि जब दोनों सूचियां एक ही बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) द्वारा तैयार की गई हैं, तो यह अंतर कैसे संभव है।
जानबूझकर देरी का आरोप
सपा अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि पंचायत चुनावों की अंतिम मतदाता सूची को जानबूझकर 50 दिनों तक रोका जा रहा है, ताकि असल आंकड़े सामने न आ सकें। उन्होंने पूछा कि जब दोनों चुनावों की मतदाता सूचियां एक ही अधिकारियों द्वारा तैयार की गई हैं, तो राज्य स्तर के आंकड़े सार्वजनिक क्यों नहीं किए जा रहे।
निर्वाचन आयोग से जवाब की मांग
अखिलेश यादव ने कहा कि सपा को केवल निर्वाचन आयोग से ही निष्पक्ष जवाब की उम्मीद है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि सत्ता में बैठे लोगों ने पहले ही वोटों की संख्या बढ़ाने के निर्देश दे दिए हैं और विपक्ष ने भी उसी के अनुसार अपनी रणनीति तैयार कर ली है।

