SIR में बड़े पैमाने पर समाजवादी पार्टी के समर्थकों के नाम हटाए गए -अखिलेश यादव ने फिर लगाए आरोप
punjabkesari.in Monday, Feb 16, 2026 - 05:05 PM (IST)
लखनऊ: समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में बड़े पैमाने पर धांधली का आरोप लगाते हुए सोमवार को कहा कि इसके लिये जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। यादव ने यहां सपा कार्यालय में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि पार्टी इस मुद्दे को विधानसभा में भी उठायेगी।
चुनाव आयोग को समजावादी पार्टी सौंपेगी ज्ञापन
सपा प्रमुख ने कहा कि उनकी पार्टी इस संबंध में मंगलवार को निर्वाचन आयोग को एक ज्ञापन भी सौंपेगी, जिसमें यह अपील की जाएगी कि एसआईआर में जो गड़बड़ियां की गयी हैं, उन पर किन नियमों के तहत प्राथमिकी दर्ज की जाए और यदि कोई व्यक्ति गलत काम करने का दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। यादव ने कहा कि निर्वाचन आयोग के अधिकारियों से मुलाकात के बाद सपा इस मुद्दे को विधानसभा में भी उठाएगी।
16 मतदाताओं के नाम हटाने के आरोप
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने मांग की कि फॉर्म-7 के जरिये नाम हटाने की प्रक्रिया सिर्फ बूथ स्तरीय अधिकारी (बीएलओ) द्वारा शुरू की जानी चाहिए, किसी और माध्यम से नहीं। उन्होंने यह भी मांग की कि विधानसभा चुनाव क्षेत्र, बूथ नंबर और फॉर्म-7 जमा करने वाले व्यक्ति समेत पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाए। सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि एसआईआर में सपा के समर्थकों के नाम गलत तरीके से हटाए जा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि सकलडीहा विधानसभा क्षेत्र में 16 मतदाताओं के नाम हटा दिये गये।
फर्जी हस्ताक्षर का आरोप लगाकर लगभग 100 मतदाताओं के नाम हटाए
विश्लेषण करने पर पता लगेगा कि वे पीडीए (पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक) समुदाय के हैं। यादव ने आरोप लगाया कि बाबागंज विधानसभा क्षेत्र के बूथ नंबर 365 पर जाली हस्ताक्षर का हवाला देकर लगभग 100 मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिये गये। उन्होंने कई मतदाताओं के नाम, उनके बूथ नंबर और उन्हें हटाने के लिए कथित तौर पर इस्तेमाल किए गए फॉर्म-7 का विवरण भी पढ़कर सुनाया।
सपा द्वारा जीती गई सीटों को बनाया गया निशाना
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि समाजवादी पार्टी कई दिनों से गलत तरीके से हटाए गए नामों के बारे में आंकड़े दे रही है लेकिन उस पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गयी है। उन्होंने नंदलाल नाम के एक व्यक्ति से जुड़े मामले का भी उल्लेख किया और आरोप लगाया कि उस शख्स (नंदलाल) ने अंगूठे का निशान लगाया था लेकिन भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकर्ताओं ने फार्म-7 भरने के लिए उससे हस्ताक्षर करवा लिये थे। यादव ने सवाल किया कि क्या इस मामले में जिले में संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई की गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की एक 'गुप्त बैठक' में सपा द्वारा जीती गई सीटों को निशाना बनाने और वहां उसके मतदाताओं के नाम हटाने का फैसला किया गया था, यह योजना विधानसभा और बूथ स्तर पर लागू की जा रही है।
जनता के मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश
सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि भाजपा के एक नेता ने दावा किया था कि कन्नौज में तीन लाख वोट कटवा दिए गए थे और दूसरे जिलों में और भी हटाए जाने हैं। यादव ने आरोप लगाया कि मोहम्मद जियाउद्दीन रिजवी बलिया के सिकंदरपुर क्षेत्र से विधायक हैं, वहां उनकी पत्नी का वोट कटवा दिया गया है। उन्होंने भाजपा पर महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की समस्याएं, कानून-व्यवस्था, व्यापार समझौते, डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरती कीमत, सोने-चांदी की बढ़ती कीमतों समेत विभिन्न जनसरोकार के मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश करने का आरोप लगाया।
भाजपा का झंडा लगा
उन्होंने फार्म-7 से जुड़े आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि जहां सपा ने उत्तर प्रदेश में ऐसे सिर्फ 47 फॉर्म भरे थे, वहीं भाजपा ने 1,729 और 'अज्ञात लोगों' ने एक लाख 28 हजार 659 फॉर्म भरे थे। ये अज्ञात लोग भाजपा से जुड़े थे और ऐसे नामों का इस्तेमाल जवाबदेही से बचने के लिए किया गया था। इस सवाल पर कि क्या उन्हें शक है कि निर्वाचन आयोग भाजपा के दबाव में काम कर रहा है, यादव ने कहा, ''निर्वाचन आयोग को अपने कार्यालय पर भाजपा का झंडा लगा देना चाहिए।
लोकतंत्र को खत्म करना चाहती है सरकार
सपा प्रमुख ने एक और सवाल के जवाब में भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा, ''वे (भाजपा) केवल चुनाव जीतना चाहते हैं। वे लोकतंत्र को खत्म करना चाहते हैं। वे भीमराव आंबेडकर और इस देश के लिए अपनी जान देने वाले दूसरे लोगों को मिटाना चाहते हैं क्योंकि उन्होंने आजादी से पहले वंदे मातरम नहीं गाया और आजादी के बाद इसे गाने में इतना समय लगा दिया।" मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर तंज कसते हुए यादव ने कहा, ''बिष्ट जी को अपने दोस्तों से पूछना चाहिए कि उन्होंने वंदे मातरम कब गाया!

