मुजफ्फरनगर दंगा: मंत्री सुरेश राणा, MLA संगीत सोम समेत कई BJP नेताओं को राहत, केस वापस

3/27/2021 12:52:19 PM

मुजफ्फरनगर: मुजफ्फरनगर दंगा भड़काने और भड़काऊ भाषण देने के आरोप में यूपी के गन्ना मंत्री सुरेश राणा, विधायक संगीत सोम, पूर्व सांसद भारतेंद्र सिंह और साध्वी प्राची पर चल रहे  मुकदमे को एमपी एमएमए कोर्ट ने वापस लेने की अनुमति दे दी है। विशेष अदालत के न्यायाधीश राम सुध सिंह ने शुक्रवार को सरकारी वकील को मामला वापस लेने की अनुमति दी। जिला सरकार के वकील राजीव शर्मा के अनुसार, आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था, ताकि लोक सेवकों को उनके कर्तव्यों का निर्वहन करने और गलत तरीके से संयम बरतने से रोका जा सके।

आरोप है कि अभियुक्तों ने एक महापंचायत में भाग लिया और अगस्त 2013 के अंतिम सप्ताह में अपने भाषणों के माध्यम से हिंसा भड़काई। राज्य के वकील ने अदालत में एक आवेदन दिया था जिसमें कहा गया था कि उत्तर प्रदेश सरकार ने सार्वजनिक हित में निर्णय लिया है कि वह भाजपा नेताओं के अभियोजन के साथ आगे न बढ़े और अदालत को इस मामले को वापस लेने की अपनी याचिका की अनुमति देनी चाहिए। बता दें कि 2013 में मुजफ्फरनगर और इसके पड़ोसी जिलों में सांप्रदायिक झड़पों में कम से कम 62 लोग मारे गए और 50,000 से अधिक विस्थापित हुए।

जानिए क्या है मामला 
27 अगस्त 2013 को मलिकपुरा इलाके के रहने वाले ममेरे भाइयों सचिन और गौरव की हत्या कर दी गई थी। दरअसल, जाट और मुस्लिम समुदाय के बीच झड़प 27 अगस्त 2013 को शुरू हुआ। कवाल गाँव में कथित तौर पर एक जाट समुदाय लड़की के साथ एक मुस्लिम युवक ने छेड़खानी की। उसके बाद लड़की के दो ममेरे भाइयों गौरव और सचिन ने उस मुस्लिम युवक को पीट-पीट कर मार डाला। जवाबी हिंसा में मुस्लिमों ने दोनों युवकों की जान ले ली। इसके बाद इस मामले में राजनीति शुरू हो गई। दोनों पक्षों ने अपनी अपनी महापंचायत बुलाई। इसके बाद ही बड़े पैमाने पर हिंसा शुरू हो गई। नंगला मंदौड़ में हुई महापंचायत में भारतीय जनता पार्टी के स्थानीय नेताओं पर आरोप लगा कि उन्होंने जाट समुदाय को बदला लेने को उकसाया था।

पुलिस ने महापंचायत में शामिल सुरेश राणा जो कि अब उत्तर प्रदेश सरकार के गन्ना मंत्री हैं जबकि संगीत सोम सरधना इलाके से विधायक हैं। इसके अलावा बिजनौर के पूर्व सांसद भारतेंद्र सिंह, साध्वी प्राची, श्यामपाल के खिलाफ भड़काऊ भाषण देने का मुकदमा दर्ज किया था। उस वक्त कुल 11 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ था।

उत्तर प्रदेश सरकार ने इसी साल इन मुकदमों को वापस लेने की मंजूरी दे दी थी। जिसके बाद कोर्ट में सीआरपीसी की धारा 321 के तहत प्रार्थना पत्र दाखिल किया गया था ताकि अदालत से इन मुकदमों को खत्म किया जा सके। इसी पर आदेश देते हुए अदालत ने दोनों लोगों को खिलाफ मुकदमा खत्म कर दिया है। 
 

 


Content Writer

Tamanna Bhardwaj

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