बाहुबली धनंजय सिंह का अखिलेश पर निशाना,‘मेरा मुक़ाबला प्रत्याशी से नहीं, पूरी समाजवादी पार्टी से है’

punjabkesari.in Thursday, Mar 03, 2022 - 05:37 PM (IST)

मल्हनी (जौनपुर): उत्तर प्रदेश के बनसफा गांव में, पूर्व सांसद धनंजय सिंह उन ग्रामीणों की मदद करते हैं जो उनके पास पहुंचते हैं। हालांकि सिंह के खिलाफ 10 मामले लंबित हैं और कई लोग उन्हें एक 'बाहुबली' के तौर पर देखते हैं। सिंह से जब समाजवादी पार्टी (सपा) के नेताओं द्वारा उन्हें ‘माफिया' कहे जाने के बारे में पूछा गया तो जौनपुर जिले के मल्हनी विधानसभा क्षेत्र से जनता दल (यू) उम्मीदवार धनंजय सिंह ने कहा कि उनका मुकाबला पार्टी के प्रत्याशी से नहीं बल्कि पूरी समाजवादी पार्टी से है, क्योंकि उसके अध्यक्ष मेरे खिलाफ ट्वीट कर रहे हैं, अपने भाषणों में मेरा नाम ले रहे हैं।”

समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गत पांच जनवरी को किसी का नाम लिये बिना एक ट्वीट में एक वीडियो साझा किया था जिसमें धनजंय सिंह क्रिकेट खेलते नजर आ रहे थे। यादव ने हाल की अपनी जनसभाओं में यह भी कहा था कि योगी सरकार में ‘माफिया' क्रिकेट खेल रहा है। यादव ने अपने ट्वीट में आरोप लगाया था कि भाजपा अपराधियों के साथ काम कर रही है और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को "अपनी पार्टी से जुड़े शीर्ष दस माफिया की सूची तैयार करनी चाहिए और आईपीएल की तर्ज पर एमबीएल- ‘माफिया भाजपा लीग' शुरू करना चाहिए।''

जौनपुर लोकसभा क्षेत्र से पूर्व सांसद और रारी (परिसीमन में नाम बदलकर मल्हनी) से विधायक रह चुके सिंह मल्हनी से जनता दल (यू) के मौजूदा उम्मीदवार हैं। उन्होंने कहा, ‘‘ मैं किसी भी मामले में वांछित नहीं हूं, लेकिन एक पार्टी द्वारा मुझे जबरन माफिया कहकर प्रचार किया जा रहा हैं, मैं अपने क्षेत्र की जनता के प्रति जवाबदेह हूं और जनता जानती हैं मैं क्या हूं।'' जौनपुर जिला मुख्यालय से करीब दस किलोमीटर दूर मल्हनी विधानसभा क्षेत्र में बनसफा गांव में धनंजय सिंह का घर है। एक चैनल के संवाददाता जब उनसे उनके घर पर मिलने पहुंचा तो वहां क्षेत्र से बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। ज़्यादातर लोग उनको ‘भैया' संबोधन से बुलाते हैं। धनंजय सिंह क्षेत्र से आने वाले लोगों से एक-एक करके मिलते हैं और चुनाव में अपनी जीत के लिए उन्हें ज़िम्मेदारी सौंपते हैं।

बनफसा गांव की रहने वाली सुल्ली पूर्व सांसद सिंह को अपने पति की बीमारी के बारे में बताती हैं और उनसे मदद मांगती हैं। धनंजय अपने लोगों से उनके पति को अस्पताल में भर्ती कराकर उनका इलाज कराने को कहते हैं। इसी प्रकार क्षेत्र के कई अन्य व्यक्ति भी एक-एक करके अपनी समस्याओं से सिंह को अवगत कराते हैं और पूर्व सांसद उनका समाधान करते हैं। समाजवादी पार्टी के नेताओं द्वारा उन्हें माफिया भगोड़ा कहे जाने के बारे में पूछे जाने पर धनंजय सिंह ने कहा, ‘‘आनंद आ रहा हैं मुझे, मैं यहां उनके प्रत्याशी से नहीं, बल्कि समाजवादी पार्टी से लड़ रहा हूं। उनके मुखिया हमारे खिलाफ ट्वीट कर रहे हैं, मेरे खिलाफ बयान दे रहें हैं। वह मल्हनी को इतना महत्व दे रहे हैं तो मैं यही मानूंगा कि समाजवादी पार्टी मेरे खिलाफ लड़ रही है।''

धनंजय सिंह ने कहा, ‘‘यहां प्रचार करने के लिए समाजवादी पार्टी के सारे नेता आये, उनका स्वागत है, इसी बहाने वह मेरे क्षेत्र में घूमेंगे फिर भी मैं अच्छे अंतर से चुनाव जीतूंगा।'' अखिलेश यादव द्वारा लगाये गये आरोपों पर सिंह ने कहा, ‘‘वह अपने राजनीतिक फायदे के लिए ऐसा करते हैं। मेरे ऊपर कोई मामला नहीं है। उनकी पार्टी से जो लोग चुनाव लड़ रहे हैं और जो उनके सहयोगी दल चुनाव मैदान में हैं, उन्हीं के दबाव में मेरे ऊपर आरोप लगा रहे हैं।''' अखिलेश यादव के इस आरोप पर कि सिंह पर एक इनाम घोषित है, सिंह ने कहा, ‘‘मेरे ऊपर कोई इनाम नहीं है। अखिलेश जी जो ट्वीट करते हैं, उसके बारे में वह ही जानते हैं। मैं तो सिर्फ इतना जानता हूं कि चार मार्च को मेरे ऊपर इनाम घोषित हुआ और पांच मार्च को ही मैने अदालत में आत्मसर्मण कर दिया। मैं भगोड़ा आतंकवादी नहीं हूं। मैं भाग नहीं रहा हूं। सर्मपण करने के बाद मैं एक महीने जेल में रहा हूं। जब मैं उनकी हिरासत में था तो वे इनाम क्यूं घोषित करेंगे। यह केवल मेरी छवि को खराब करने की साजिश थी, मेरे ऊपर कोई इनाम नहीं है।''

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के मुफ्त अनाज बांटने के सवाल पर उन्होंने कहा, ''मैंने सरकार से ज्यादा अनाज अपने क्षेत्र में लोगों देता हूं। मैं बीस साल से अपने क्षेत्र में राजनीति कर रहा हूं। कोरोना महामारी के दौरान हमारे लोगों ने सत्तर दिन लगातार लोगों की सेवा की है। उस दौरान (महामारी के समय) समाजवादी पार्टी, भाजपा या कांग्रेस ये कोई भी क्षेत्र में जनता के सुख-दुख में उनकी मदद नहीं कर रहा था, केवल धनंजय सिंह और उसके लोग जौनपुर के एक-एक गांव में जाकर जनता की मदद कर रहे थे।'' सिंह ने कहा, ‘‘इलाके में विकास सबसे बड़ा मुद्दा है पिछले दस साल से समाजवादी पार्टी के यहां के प्रतिनिधि रहें हैं लेकिन आम जनमानस से उनका कोई सरोकार नही है।''

गौरतलब है कि लखनऊ में जनवरी 2021 में मऊ के पूर्व ब्लाक प्रमुख प्रतिनिधि अजीत सिंह की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में धनंजय सिंह के खिलाफ आरोप थे लेकिन उनका दावा है कि वह इस मामले में वांछित और इनामी नहीं हैं, बल्कि इसकी जांच अभी चल रही है। अजित सिंह की पत्नी ने सिंह का विधानसभा चुनाव में नामांकन रद्द करने की मांग की है। विधानसभा चुनाव में दाखिल शपथपत्र के मुताबिक धनंजय सिंह के खिलाफ दस मामले अदालतों में विचाराधीन हैं जिसमें गैंगस्टर एक्ट के तहत भी एक मामला शामिल है। धनंजय सिंह पहली बार 2002 में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में रारी विधानसभा सीट से चुनाव लड़े और जीते। रारी विधानसभा सीट का नाम परिसीमन के बाद मल्हनी विधानसभा कर दिया गया है। वह उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2007 में रारी विधानसभा सीट से जनता दल (यू) से जीत गये और विधायक बने। जदयू छोडकर 2008 में सिंह बहुजन समाज पार्टी (बसपा) में चले गये और 2009 के लोकसभा चुनाव में जौनपुर सीट से चुनाव जीत कर सांसद बने।

सिंह ने 2012 विधानसभा सीट रारी से अपनी पत्नी जागृति सिंह को निर्दलीय चुनाव लड़ाया लेकिन वह हार गयीं। 2014 के लोकसभा चुनाव में धनंजय निर्दलीय लोकसभा का चुनाव लडे़ और हार गये। वह 2017 विधानसभा चुनाव में निषाद पार्टी के टिकट पर मल्हरी सीट से चुनाव हार गये। फिर 2020 में उपचुनाव में मल्हरी से एक निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लडे़ और हार गये। अब 2022 में एक बार फिर मल्हरी से विधानसभा चुनाव जनता दल यू के टिकट पर किस्मत आजमा रहे हैं। मल्हनी में अंतिम चरण में सात मार्च को मतदान ह्रै।


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Content Writer

Mamta Yadav

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