नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कांग्रेस पार्टी से दिया इस्तीफा, यूपी में सियासी हलचल तेज
punjabkesari.in Saturday, Jan 24, 2026 - 03:14 PM (IST)
लखनऊ: कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रांतीय अध्यक्ष नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस कदम से सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है और कांग्रेस को एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
पार्टी नेतृत्व को सौंपा इस्तीफा
नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने पार्टी नेतृत्व को अपना इस्तीफा सौंपते हुए कहा कि वह काफी समय से पार्टी की कार्यशैली और आंतरिक हालात से असहज महसूस कर रहे थे। सूत्रों के मुताबिक, संगठन में उनकी भूमिका और सुझावों को अपेक्षित महत्व नहीं मिलने से वह नाराज चल रहे थे। हालांकि, उन्होंने सार्वजनिक रूप से किसी व्यक्ति विशेष पर सीधा आरोप लगाने से परहेज किया है।
बसपा सरकार में मंत्री रहे नसीमुद्दीन सिद्दीकी
आप को बता दें कि नसीमुद्दीन सिद्दीकी उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक जाना-पहचाना नाम हैं। वह बहुजन समाज पार्टी की सरकार में मंत्री रह चुके हैं और लंबे समय तक मायावती के करीबी नेताओं में गिने जाते थे। बाद में उन्होंने कांग्रेस का दामन थामा था। कांग्रेस में शामिल होने के बाद पार्टी ने उन्हें पश्चिमी उत्तर प्रदेश का प्रांतीय अध्यक्ष बनाकर संगठन को मजबूत करने की जिम्मेदारी सौंपी थी।
नसीमुद्दीन सिद्दीकी मुस्लिम समुदाय का मजबूत चेहरा
कांग्रेस नेतृत्व नसीमुद्दीन सिद्दीकी को मुस्लिम समुदाय के एक मजबूत चेहरे के रूप में आगे बढ़ा रहा था। खासकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अल्पसंख्यक वोट बैंक को साधने के लिए उनकी भूमिका अहम मानी जा रही थी। ऐसे में उनका इस्तीफा पार्टी की रणनीति को प्रभावित कर सकता है।
यूपी में कांग्रेस को हो सकता है बड़ा नुकसान
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि नसीमुद्दीन सिद्दीकी के इस्तीफे से कांग्रेस को न केवल संगठनात्मक नुकसान होगा, बल्कि अल्पसंख्यक समुदाय के बीच पार्टी की पकड़ पर भी असर पड़ सकता है। वहीं, उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। चर्चा है कि वह किसी अन्य दल में शामिल हो सकते हैं या फिलहाल राजनीति से कुछ समय का ब्रेक भी ले सकते हैं। फिलहाल कांग्रेस की ओर से इस इस्तीफे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन इतना तय है कि नसीमुद्दीन सिद्दीकी के जाने से उत्तर प्रदेश कांग्रेस की सियासत में एक खालीपन जरूर पैदा हुआ है।

