योगी सरकार की पुलिस का ''UP Cop App'' बना आमजन का सारथी, घर बैठे दर्ज करें FIR, उठाएं 27 सेवाओं का लाभ; 50 लाख+ ने डाउनलोड किया ऐप
punjabkesari.in Sunday, Jan 11, 2026 - 06:30 PM (IST)
लखनऊ : उत्तर प्रदेश पुलिस का ‘यूपीकॉप ऐप' और नागरिक पोर्टल अब एक ‘डिजिटल पुलिस थाना' की तरह काम कर रहे हैं, जिसके माध्यम से लोग न केवल घर बैठे प्राथमिकी दर्ज करा रहे हैं, बल्कि थाने जाए बिना 27 प्रकार की पुलिस सेवाओं का लाभ उठा रहे हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से रविवार को यह जानकारी दी गई। रविवार को जारी एक आधिकारिक बयान में पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कृष्ण के हवाले से कहा गया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुलिसिंग को जनकेंद्रित, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए तकनीक से जोड़ा है।
‘यूपीकॉप ऐप' CM Yogi की दूरदर्शी सोच का नतीजा- डीजीपी
इसमें कहा गया कि यह मुख्यमंत्री की दूरदर्शी सोच का ही नतीजा है कि आज उप्र पुलिस तकनीक के जरिये आम जनमानस की सेवा में नई मिसाल कायम कर रही है। उन्होंने कहा कि यूपीकॉप ऐप ने थानों के चक्कर लगाने की मजबूरी को काफी हद तक कम कर दिया है। वहीं ऐप से विभिन्न सेवाओं के निस्तारण की समयावधि में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गयी है। उन्होंने बताया कि ऐप के जरिए लोग ऑनलाइन प्राथमिकी दर्ज कराने, प्राथमिकी की कॉपी डाउनलोड करने, खोये सामान की रिपोर्ट दर्ज कराने, चरित्र सत्यापन, किरायेदार सत्यापन, घरेलू सहायक सत्यापन, कर्मचारी सत्यापन समेत 27 प्रकार की सेवाओं का लाभ उठा रहे हैं।
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50 लाख+ उपयोगकर्ताओं ने ऐप को किया डाउनलोड
अब तक 50 लाख से अधिक उपयोगकर्ता ऐप को डाउनलोड कर चुके हैं। वहीं ऐप के माध्यम से 2.1 करोड़ से ज्यादा प्राथमिकी डाउनलोड की जा चुकी हैं। जबकि 7.3 लाख से अधिक लोगों ने खोये सामान की रिपोर्ट दर्ज करायी है। यह आंकड़े मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की डिजिटल पुलिसिंग की सोच के महत्व को दर्शाते हैं। डीजीपी ने बताया कि ‘यूपीकॉप ऐप' में कई आधुनिक सुविधाएं भी जोड़ी गई हैं। इसमें रीयल-टाइम नोटिफिकेशन के जरिए आवेदकों को उनके आवेदन की स्थिति की तुरंत जानकारी मिल रही है।
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हिंदी और अंग्रेजी में उपलब्ध है ऐप
यह ऐप हिंदी और अंग्रेजी, दोनों भाषाओं में उपलब्ध है। जिससे हर वर्ग के लोग आसानी से इसका उपयोग कर रहे हैं। वहीं, सुरक्षा के लिहाज से लोकेशन ट्रैकिंग और एसओएस बटन जैसी सुविधाओं को भी अपग्रेड किया गया है। इसके अलावा ऐप पर नजदीकी पुलिस थाने को मैप पर देखने की सुविधा भी दी गई है, जो आपात स्थिति में काफी उपयोगी साबित हो रही है। उन्होंने बताया कि ऐप से विभिन्न सेवाओं के निस्तारण में लगने वाले समय में भारी कमी आयी है। वर्तमान में चरित्र सत्यापन में लगभग छह दिन का समय लग रहा है। जबकि पहले इसमें आठ दिन लगते थे। इस तरह किरायेदार के सत्यापन में करीब आठ दिन लग रहे हैं जबकि पहले 24 से 25 दिन लगते थे, कर्मचारी सत्यापन में करीब पांच दिन लग रहे हैं जबकि पहले 13 दिन लगते थे।

