लखनऊ में अमृत योजना का सीवर सिस्टम ध्वस्त! पीने का पानी भी हुआ दूषित, नलों से आ रहा सीवेज मिला पेयजल; आलमबाग का बुरा हाल, ये इलाके भी प्रभावित
punjabkesari.in Monday, Jan 05, 2026 - 08:21 PM (IST)
लखनऊ: केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी अमृत योजना, जिसका उद्देश्य सीवर और ड्रेनेज सिस्टम को अलग कर नागरिकों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना था, लखनऊ में जमीनी स्तर पर दम तोड़ती नजर आ रही है। कागजों में योजना की सफलता के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन हकीकत यह है कि शहर के कई इलाकों में नलों से गंदा और बदबूदार पानी आ रहा है। खास तौर पर आलमबाग और स्मार्ट सिटी परियोजना से जुड़े कैसरबाग क्षेत्र के हालात सबसे खराब हैं।
नलों तक पहुंच रहा सीवेज
अमृत योजना के तहत यह सुनिश्चित किया जाना था कि नालियों और नालों से होकर गुजरने वाली पानी की पाइपलाइनों में सीवेज की मिलावट न हो। इसके लिए सीवर लाइन और ड्रेनेज सिस्टम को अलग-अलग किया जाना था। हालांकि कुछ स्थानों पर सीवर लाइन तो डाली गई, लेकिन खुदाई के दौरान पानी की पाइपलाइनों को नुकसान पहुंचाया गया और उनकी समय पर मरम्मत नहीं की गई। नतीजा यह हुआ कि अब कई इलाकों में सीवेज नलों तक पहुंच रहा है।
आलमबाग में सबसे ज्यादा परेशानी
आलमबाग क्षेत्र में सीवेज योजना अधूरी होने के कारण लोगों को गंभीर दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यहां सीवर लाइन न तो पूरी तरह बिछ पाई है और न ही मानकों के अनुसार काम किया गया। कई जगह पानी की पाइपलाइन के बिल्कुल पास सीवर लाइन डाल दी गई, जिससे लीकेज की स्थिति बन गई। दामोदर नगर, प्रेम नगर सहित आसपास के इलाकों में हालात इतने खराब हैं कि लोग बाहर से पानी लाने को मजबूर हैं। दामोदर नगर निवासी किंजल शुक्ला का कहना है कि सीवर लाइन अब तक चालू नहीं हो पाई है, जबकि दूसरी ओर नालियों का गंदा पानी नलों में आ रहा है। यह समस्या सिर्फ एक मोहल्ले तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे क्षेत्र में फैल चुकी है।
तय समय में पूरा नहीं हुआ काम
आलमबाग में अमृत योजना की शुरुआत वर्ष 2019 में हुई थी और इसे अगस्त 2021 तक पूरा किया जाना था। योजना के तहत 21 हजार घरों में सीवर कनेक्शन दिए जाने थे, लेकिन अब तक करीब छह हजार घर कनेक्शन से वंचित हैं। ठेकेदारों की मनमानी और जल निगम के अभियंताओं की लापरवाही के चलते काम मानकों के अनुरूप नहीं हो सका। कई स्थानों पर मैनहोल के बिल्कुल पास पानी की पाइपलाइन डालने के मामले भी सामने आए हैं।
यह भी पढ़ें : नए साल में फैंस का टूटा दिल! फिल्म जगत के दिग्गज अभिनेता का निधन, जानें कैसे हुई मौत.... शोक में डूबी पूरी इंडस्ट्री
स्मार्ट सिटी क्षेत्र में भी हालात बदतर
स्मार्ट सिटी परियोजना से जुड़े कैसरबाग इलाके में भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। यहां अमृत योजना और स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत करीब 208.13 करोड़ रुपये की लागत से काम होना था। कागजों में जल निगम ने काम पूरा दिखा दिया है, लेकिन हकीकत में कैसरबाग से जुड़े दस वार्डों में 21 हजार घरों में से केवल 13,500 घरों में ही सीवर कनेक्शन हो पाए हैं।
कई इलाकों में आज भी सीवेज सड़कों और नालियों में बह रहा है। नालियों के जरिए गंदा पानी पानी की पाइपलाइनों में जा रहा है, जिससे नलों से दूषित जलापूर्ति हो रही है। माहल हाउस इलाके में हर दूसरा घर इस समस्या से जूझ रहा है।
अमीनाबाद बेगम हजरत वार्ड से पार्षद शकीकुर्रहमान चाचा का कहना है कि कई जगह सीवर लाइन डाली ही नहीं गई है। सीवेज खुले नालों में बह रहा है और वही गंदगी नलों तक पहुंच रही है। पूर्व पार्षद विनोद कृष्ण सिंघल ने भी सीवर लाइन को मानकों के विपरीत बताते हुए इसे गंदगी फैलने का मुख्य कारण बताया।
यह भी पढ़ें : भतीजे के टच में आई चाची! घंटों होने लगीं फोन पर बातें, रात को घर बुलाकर बनाए संबंध, फिर..... असलियत जान पैरों तले खिसक जाएगी जमीन
बढ़ी लागत, फिर भी अधूरा काम
अमृत योजना के तहत इस प्रोजेक्ट की कुल लागत 195.40 करोड़ रुपये तय की गई थी। कार्य की शुरुआत 2 अगस्त 2019 को हुई थी और इसे 1 अगस्त 2021 तक पूरा किया जाना था। लेकिन अब स्थिति यह है कि 50 प्रतिशत काम भी पूरा नहीं हो सका है। नई संभावित तिथि फरवरी 2026 बताई जा रही है, जबकि अब तक एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) का निर्माण भी पूरा नहीं हो पाया है।
जलकल विभाग का दावा
जलकल विभाग का कहना है कि आलमबाग की संकरी गलियों में नालों के पास सीवर लाइन डालना चुनौतीपूर्ण था। यदि कहीं पानी की पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हुई है तो उसे ठीक कराया जाएगा। कैसरबाग क्षेत्र में जिन घरों में सीवर कनेक्शन नहीं है, उन्हें चिन्हित कर कनेक्शन दिए जाएंगे।
विभाग ने जारी किए हेल्पलाइन नंबर
जलकल विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि यदि कहीं पाइपलाइन में लीकेज हो या नलों से गंदा पानी आ रहा हो, तो तुरंत विभाग को सूचना दें। इसके लिए हेल्पलाइन नंबर 8177054100, 8177054003 और 8177054010 जारी किए गए हैं। जलकल विभाग के महाप्रबंधक कुलदीप सिंह ने कहा कि शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है और शिकायत मिलने पर त्वरित कार्रवाई की जाएगी।

