पिछले नौ वर्षों में आठ से बढ़कर 18 प्रतिशत हुई कृषि विकास दर: CM Yogi

punjabkesari.in Wednesday, Apr 08, 2026 - 08:24 PM (IST)

लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने पिछले नौ वर्षों के कार्यकाल में उत्तर प्रदेश की कृषि विकास दर आठ से बढ़कर 18 फीसदी हो जाने का दावा करते हुए बुधवार को कहा कि इसका पूरा श्रेय लगातार किए गए नीतिगत प्रयासों और संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल को जाता है। मुख्यमंत्री ने लखनऊ में छठी उत्तर प्रदेश कृषि विज्ञान कांग्रेस—2026 का उद्घाटन करने के बाद सभा को संबोधित करते हुए दावा किया कि पिछले नौ वर्षों के दौरान राज्य की कृषि विकास दर लगभग आठ प्रतिशत से बढ़कर 18 फीसद हो गई है।

उन्होंने भारत की कृषि अर्थव्यवस्था में उत्तर प्रदेश के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि प्रदेश में देश की 16-17 प्रतिशत आबादी रहती है और यहां देश की लगभग 11 प्रतिशत खेती योग्य ज़मीन है, जो देश के कुल खाद्यान्न उत्पादन में लगभग 21 प्रतिशत का योगदान देती है। आदित्यनाथ ने कहा, ''राज्य में सबसे उपजाऊ जमीन और भरपूर जल संसाधन हैं जिनका अगर प्रभावी ढंग से इस्तेमाल किया जाए तो काफ़ी अच्छे परिणाम हासिल किये जा सकते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि तीन दिवसीय इस आयोजन में कृषि के विभिन्न आयामों पर गंभीर विचार-विमर्श होगा, जिसमें जमीनी स्तर के अनुभवों, नवाचारों और सफल प्रयोगों को साझा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह मंच केवल चर्चा का नहीं, बल्कि ठोस कार्ययोजना तैयार करने का माध्यम बनना चाहिए, जिससे किसानों को वास्तविक लाभ मिल सके। आदित्यनाथ ने राज्य की पूर्ववर्ती सरकारों की आलोचना करते हुए कहा कि वर्ष 2017 से पहले कृषि क्षेत्र अव्यवस्था, असंगठित व्यवस्था और किसानों के गहरे अविश्वास का प्रतीक बन गया था।

 उन्होंने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर प्रभावी खरीद नहीं हो पाती थी, क्रय केंद्र कमजोर और बिचौलिये हावी थे, किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य प्राप्त करने में कठिनाई होती थी, गन्ना किसानों को भुगतान के लिए वर्षों तक इंतजार करना पड़ता था, जिससे वे कर्ज के बोझ तले दबते चले जाते थे। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि साल 2017 के बाद सरकार ने कृषि को प्राथमिकता देते हुए पारदर्शी, तकनीक आधारित और किसान-केंद्रित नीतियां लागू कीं, नतीजतन किसान की लागत से डेढ़ गुना अधिक मूल्य पर एमएसपी खरीद सुनिश्चित की गई, किसान के बैंक खाते में सीधे तौर पर भुगतान भेजा जाता है, जिससे किसानों में विश्वास बढ़ा और कृषि को एक लाभकारी एवं सम्मानजनक व्यवसाय के रूप में नई पहचान मिली।

उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था जब वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की भागीदारी 44-45 प्रतिशत तक थी और इसका मूल कारण यहां का सशक्त कृषि तंत्र था लेकिन समय के साथ यह व्यवस्था कमजोर हुई और किसान केवल कच्चा माल उत्पादक बनकर रह गया, जिससे आर्थिक असंतुलन उत्पन्न हुआ और अन्नदाता किसान कर्जदार बनने लगा। मुख्यमंत्री ने आधुनिक तकनीक के उपयोग पर विशेष बल देते हुए कहा कि इंटरनेट ऑफ थिंग्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन और सैटेलाइट तकनीक कृषि को नई दिशा दे सकते हैं। सेंसर आधारित तकनीक से मिट्टी की नमी और पोषण का डेटा प्राप्त कर किसान सटीक निर्णय ले सकते हैं।

उन्होंने डिजिटल कृषि मंच की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि किसानों को अब बाजार, मौसम और मूल्य की जानकारी सीधे उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि 'वन नेशन-वन मंडी' व्यवस्था और मंडी शुल्क में कमी जैसे निर्णयों से किसानों को बेहतर दाम मिल रहा है। आदित्यनाथ ने पारंपरिक 'लैब टू लैंड' मॉडल को बदलते हुए 'लैंड इज लैब' की अवधारणा पर जोर देते हुए कहा कि अब खेतों को ही प्रयोगशाला बनाना होगा, जहां किसान और वैज्ञानिक मिलकर नवाचार स्थापित करें। उन्होंने कहा कि इस दिशा में कृषि विज्ञान केंद्रों और कृषि विश्वविद्यालयों की भूमिका महत्वपूर्ण है और सभी संस्थानों को एकजुट होकर कार्य करना चाहिये। 
 


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Content Writer

Ramkesh

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