हाथों की मेहंदी सूखी भी ना थी कि सिर से उठ गया पिता का साया! अलीगढ़ में 2 बेटियों को विदा करते ही तोड़ा दम, डोली के पीछे उठी अर्थी
punjabkesari.in Wednesday, Feb 11, 2026 - 02:51 PM (IST)
Aligarh News: नियति का खेल भी कितना अजीब होता है, कभी एक ही पल में खुशियों के पहाड़ खड़े कर देता है, तो कभी चंद लम्हों में सब कुछ मटियामेट कर देता है। अलीगढ़ जिले के टप्पल क्षेत्र के बेरमगंज गांव में एक ऐसा ही मंजर देखने को मिला, जिसने पूरे इलाके की आंखों में आंसू ला दिए हैं। एक पिता ने अपनी दो लाड़ली बेटियों का कन्यादान किया, उन्हें विदा किया और फिर खुद इस दुनिया से हमेशा के लिए विदा हो गए।
शहनाइयों के बीच मौत की दस्तक
रविवार का दिन बेरमगंज गांव के लिए खुशियों भरा था। घर में दो सगी बेटियों की शादी थी। पिता पिछले कई महीनों से एक-एक पैसा जोड़कर इस दिन की तैयारी कर रहे थे। एक ही मंडप में दोनों बेटियों के फेरे हुए, पिता ने नम आंखों से उनका कन्यादान किया और ससुराल के लिए विदा किया। चेहरे पर एक बड़ी जिम्मेदारी पूरी होने का संतोष था, लेकिन किसी को नहीं पता था कि यह संतोष उनकी आखिरी सांस के साथ ही खत्म हो जाएगा।
विदाई के कुछ घंटों बाद ही टूटा दुखों का पहाड़
देर रात जब बारात विदा हो चुकी थी और घर के लोग रस्मों के बाद आराम करने की तैयारी में थे, तभी अचानक पिता की तबीयत बिगड़ने लगी। सीने में घबराहट हुई और जब तक परिजन उन्हें अस्पताल ले जाते, रास्ते में ही उन्होंने दम तोड़ दिया। जिस आंगन में कुछ घंटों पहले मंगल गीत गाए जा रहे थे, वहां अब चीख-पुकार मच गई।
मेहंदी वाले हाथों से पिता को अंतिम विदाई
सबसे दर्दनाक मंजर तब दिखा जब पिता की मौत की खबर उनकी दोनों बेटियों तक पहुंची। बेटियां अभी ससुराल की दहलीज पर कदम ही रख पाई थीं कि पिता के साये से महरूम होने की खबर ने उन्हें झकझोर दिया। जिस घर से चंद घंटों पहले लाल जोड़े में सजी बेटियां डोली में बैठकर निकली थीं, वहीं वे बदहवास होकर वापस लौटीं। हाथों में अभी शादी की मेहंदी रची थी, लेकिन आंखों में पिता को खोने का अथाह दुख था। बेटियों ने श्मशान घाट पर अपने उसी पिता को अंतिम विदाई दी, जिन्होंने कुछ घंटों पहले उन्हें आशीर्वाद देकर विदा किया था।
फर्ज निभाकर ली अंतिम सांस
गांव के बुजुर्गों का कहना है कि पिता बेटियों की शादी को लेकर बेहद भावुक थे। वे हर इंतजाम खुद देख रहे थे ताकि बेटियों की विदाई में कोई कमी न रहे। मानो ईश्वर ने उन्हें सिर्फ बेटियों का फर्ज निभाने तक का ही समय दिया था। कन्यादान की जिम्मेदारी पूरी होते ही उनकी जीवनलीला भी समाप्त हो गई।
गांव में पसरा सन्नाटा
इस घटना के बाद पूरे बेरमगंज गांव में मातम पसरा है। जिन घरों में शादी की मिठाइयां जानी थीं, वहां अब लोग शोक जताने पहुँच रहे हैं। हर किसी की जुबान पर बस एक ही बात है कि ईश्वर ने पिता को फर्ज निभाने का मौका तो दिया, लेकिन बेटियों की खुशियां देखने का वक्त छीन लिया।

