''35 आरोपी बरी कैसे हो गए?''... ऊना दलित कांड पर भड़कीं Mayawati, गुजरात सरकार को दिया अल्टीमेटम
punjabkesari.in Friday, Aug 07, 2026 - 11:53 AM (IST)
Lucknow News: बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने गुजरात के ऊना में दलित की पिटाई के मामले में 35 आरोपियों के बरी होने पर राज्य सरकार पर दलितों के प्रति द्वेषपूर्ण रवैया और लापरवाही बरतने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अभी भी मौका है और सरकार को उच्च न्यायालय में प्रभावी पैरवी कर सभी दोषियों को कड़ी सजा दिलानी चाहिए। गुजरात के गिर सोमनाथ जिले के वेरावल स्थित विशेष न्यायालय ने इस वर्ष 16 मार्च को 2016 के चर्चित ऊना दलित पिटाई मामले में 5 लोगों को दोषी ठहराया था, जबकि 35 अन्य आरोपियों को बरी कर दिया था। इस मामले में मृत गाय की खाल उतार रहे 4 दलित युवकों की बेरहमी से पिटाई की गई थी। इस घटना के बाद देशभर में व्यापक विरोध-प्रदर्शन हुए थे।
1. गुजरात राज्य के ज़िला गिर सोमनाथ के ऊना में सन् 2016 में हुये दलितों पर जघन्य अन्याय-अत्याचार काण्ड के लगभग सभी अभियुक्तों को मार्च में स्थानीय कोर्ट द्वारा बरी करने के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देकर न्याय पाने के लिये पीड़ित दलित परिवारों को वित्तीय आदि का भारी चुनौतियों…
— Mayawati (@Mayawati) August 7, 2026
मायावती ने शुक्रवार को सोशल मीडिया 'एक्स' पर पोस्ट कर कहा कि गुजरात के गिर सोमनाथ जिले के ऊना में 2016 में दलितों पर हुए जघन्य अत्याचार के मामले में लगभग सभी अभियुक्तों को मार्च में स्थानीय न्यायालय द्वारा बरी किए जाने के फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती देने के लिए पीड़ित दलित परिवारों को आर्थिक सहित अनेक गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यह विचलित करने वाली सच्चाई से खासकर बहुजन समाज के लोगों में गहरी चिंता का विषय है। मेरी चिंता का एक प्रमुख कारण यह भी है कि मैं स्वयं पीड़ितों से मिलने गई थी और सच्चाई जानने के बाद मैंने राज्य सरकार से सभी दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की थी।
बसपा प्रमुख ने कहा कि देशभर में भारी जनाक्रोश के बावजूद 40 में से 35 आरोपियों का मार्च में बरी हो जाना दलितों के प्रति सरकारी द्वेष तथा उनके हितों और सुरक्षा के प्रति लापरवाही एवं उदासीनता का ही परिणाम प्रतीत होता है। उन्होंने गुजरात सरकार से आग्रह करते हुए कहा कि अभी भी मौका है। सरकार अपनी गलती सुधारते हुए इस मामले में उच्च न्यायालय के समक्ष प्रभावी पैरवी करे, ताकि सभी दोषियों को कड़ी सजा मिल सके। इससे पीड़ितों को न्याय मिलेगा और समाज में ऐसा अपराध करने वालों के लिए कड़ा संदेश जाएगा। मायावती ने यह भी कहा कि राज्य सरकार पीड़ित परिवारों की संतुष्टि के अनुरूप सरकारी खर्च पर सक्षम अधिवक्ता उपलब्ध कराए। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में उनकी सरकार ने भी गरीबों को निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराने का वैधानिक प्रावधान किया था।

