''गुलाम मानसिकता वाले बिकाऊ'' लोगों से सावधान रहें कार्यकर्ता- मायावती की बसपा कार्यकर्ताओं को नसीहत
punjabkesari.in Sunday, Feb 22, 2026 - 05:09 PM (IST)
लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने रविवार को अपने कार्यकर्ताओं को आगाह किया कि वे ''गुलाम मानसिकता'' वाले ''बिकाऊ लोगों'' से सावधान रहें। मायावती ने पार्टी की अखिल भारतीय बैठक में संगठन को मजबूत बनाने व सर्वसमाज में पार्टी के जनाधार को बढ़ाने सहित विभिन्न महत्वपूर्ण राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा की।
जब बसपा के नहीं हुये तो वे समाज के सच्चे हितैषी कैसे
उन्होंने कहा,''बहुजन समाज के उत्थान के बजाय, अपने थोड़े से स्वार्थ के लिए कार्य करने वाले गुलाम मानसिकता व बिकाऊ लोगों से सावधान रहें। ऐसे लोग बसपा के कारण ही आगे बढ़े। वे जब बसपा के नहीं हुये तो वे समाज के सच्चे हितैषी कैसे हो सकते हैं? ऐसे लोगों तथा उन्हें शरण देने वाली पार्टियों से भी अति सावधानी जरूरी है।'' माना जा रहा है कि मायावती का यह परोक्ष निशाना कभी सबसे करीबी सहयोगी रहे नसीमुद्दीन सिद्दीकी पर था जो हाल में ही समाजवादी पार्टी में शामिल हुए हैं।
बसपा से जनता की उम्मीदें
मायावती ने बैठक में विरोधी पार्टियों पर निशाना साधते हुए कहा कि इन पार्टियों की सरकारों की गरीब, किसान और बहुजन विरोधी, संकीर्ण, शोषणकारी और द्वेष पूर्ण नीतियों और भ्रष्ट क्रियाकलापों तथा कथनी एवं करनी में अंतर के कारण वे अपनी विश्वसनीयता तेजी से खो रहे हैं, लिहाजा बसपा से जनता की उम्मीदें बढ़ गई हैं।
सत्ता की 'मास्टर चाबी' प्राप्त करने का लक्ष्य प्राप्त
बसपा प्रमुख ने कहा कि पार्टी जैसे-जैसे और जहां-जहां मजबूत होती जाएगी, विरोधियों के षडयंत्र भी लगातार बढ़ते जाएंगे, जिसका डट कर सामना करते हुये कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ते रहना है और अपने पैरों पर खड़ा होने के लिये सत्ता की 'मास्टर चाबी' प्राप्त करने का लक्ष्य प्राप्त करना है। मायावती ने अमेरिका के साथ व्यापार समझौते को लेकर देश में उभरी चिन्ताओं का जिक्र करते हुए कहा कि कई देशों द्वारा अपने आपको 'फर्स्ट' बनाने हेतु जो गला काट प्रतिस्पर्धा जारी है उसने शोषणकारी विश्व व्यवस्था को और गहरे संकट में डाल दिया है।
बहुजनों के हित को सुरक्षित रखने की बड़ी चुनौती
उन्होंने कहा, ''ऐसे में भारत सरकार के सामने खासकर देश के किसानों सहित बहुजनों के हित व भविष्य को सुरक्षित रखने की बड़ी चुनौती है। भारत ने अपनी शर्तों के आधार पर व्यापार समझौते किये हैं, यह केवल सरकारी दावा नहीं बल्कि हकीकत हो तो यह बेहतर।

