जनेश्वर मिश्र पार्क के बाहर स्टंट बना काल: 100 की रफ्तार, एक पहिये पर बुलेट और फिर.... (Watch Video)
punjabkesari.in Monday, Mar 16, 2026 - 11:29 AM (IST)
Lucknow News: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का गोमतीनगर विस्तार इलाका रविवार सुबह एक भीषण सड़क हादसे से दहल गया। जनेश्वर मिश्र पार्क के सामने स्टंटबाजी के चक्कर में नोएडा में तैनात पॉवर कॉर्पोरेशन के एसडीओ (SDO) के 17 वर्षीय बेटे नैतिक की जान चली गई। तेज रफ्तार और लापरवाही का यह मंजर वहां मौजूद साथी के कैमरे में भी कैद हो गया, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
रफ्तार का जुनून और मौत का स्टंट
मूलरूप से बाराबंकी के रहने वाले एसडीओ राम इकबाल का बेटा नैतिक अपने भाई पारस के साथ रविवार सुबह बुलेट पर सवार होकर निकला था। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, नैतिक जनेश्वर मिश्र पार्क के गेट नंबर 5 के पास करीब 100 किमी/घंटा से अधिक की रफ्तार में बाइक दौड़ा रहा था। तभी उसने व्हीली (अगला पहिया उठाकर स्टंट) करने की कोशिश की, जिससे बाइक अनियंत्रित हो गई और सामने से आ रही एक स्कूटी से जा टकराई।
10 मीटर तक घिसटती गई बाइक, हेलमेट ना होने से फटा सिर
टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बाइक सवार दोनों भाई सड़क पर करीब 10 मीटर तक घिसटते चले गए और अंत में डिवाइडर से जा भिड़े। नैतिक ने हेलमेट नहीं पहना था, जिसके कारण उसका सिर सीधे डिवाइडर से टकराया और मौके पर ही गहरा घाव हो गया। हादसे में नैतिक के भाई पारस और स्कूटी सवार 2 अन्य युवक (आदित्य और कृष्ण सिंह) भी गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस ने सभी को अस्पताल पहुँचाया, जहां डॉक्टरों ने नैतिक को मृत घोषित कर दिया।
हेलमेट कैमरे में कैद हुई आखिरी चीख
हैरान करने वाली बात यह है कि पूरी घटना नैतिक के साथ चल रहे एक अन्य स्टंटबाज साथी के हेलमेट पर लगे कैमरे में रिकॉर्ड हो गई। वीडियो में साफ दिख रहा है कि कैसे एक छोटी सी गलती ने हंसते-खेलते परिवार की खुशियां छीन लीं। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि जिस बुलेट से स्टंट किया जा रहा था, उस पर नंबर प्लेट तक नहीं थी।
कानून की अनदेखी पड़ी भारी
पुलिस के अनुसार, मोटर व्हीकल एक्ट के तहत 18 साल से कम उम्र के नाबालिग को गियर वाली भारी बाइक चलाने की अनुमति नहीं है। नाबालिग को वाहन देने पर अभिभावकों पर 25 हजार रुपए का जुर्माना और कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। नैतिक के परिजनों ने पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया और शव को पैतृक गांव बाराबंकी ले जाकर उसका अंतिम संस्कार कर दिया।

