UP में बिजली कटौती पर योगी सरकार सख्त, गाजियाबाद और मेरठ के दो एक्सईएन सस्पेंड
punjabkesari.in Saturday, May 23, 2026 - 09:02 PM (IST)
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही बिजली कटौती और उपभोक्ताओं की बढ़ती शिकायतों के बीच योगी सरकार ने बड़ा प्रशासनिक एक्शन लिया है। सरकार ने बिजली व्यवस्था में लापरवाही बरतने के आरोप में गाजियाबाद और मेरठ के दो एग्जीक्यूटिव इंजीनियरों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। जानकारी के मुताबिक गाजियाबाद में तैनात एग्जीक्यूटिव इंजीनियर राहुल को बिजली आपूर्ति में अनियमितताओं और शिकायतों के चलते सस्पेंड किया गया है। वहीं मेरठ में तैनात एग्जीक्यूटिव इंजीनियर योगेश कुमार पर भी कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित कर दिया गया।
भीषण गर्मी के बीच प्रदेश के कई जिलों में बिजली कटौती को लेकर लोगों में नाराजगी देखी जा रही है। लगातार बढ़ती मांग और ट्रांसफार्मरों पर दबाव के कारण कई इलाकों में अघोषित कटौती की शिकायतें सामने आ रही थीं। सरकार ने साफ संकेत दिए हैं कि बिजली व्यवस्था में लापरवाही करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।
गौरतलब है कि भीषण गर्मी के बीच उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही बिजली कटौती अब बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गई है इसे लेकर, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि बिजली की मांग और दाम तो बढ़ रहे हैं, लेकिन आपूर्ति नहीं बढ़ रही। उन्होंने सरकार की नई उत्पादन क्षमता को लेकर योजना पर सवाल उठाए। इन सबके बीच प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने मांग की कि सरकार 2017 से पहले और अब तक के बिजली उत्पादन का श्वेत पत्र जारी करे।
उन्होंने कहा कि जनता को पता चलना चाहिए कि पिछले नौ साल के शासन में भाजपा सरकार ने कितनी नई बिजली उत्पादन क्षमता तंत्र से जोड़ी। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि बार-बार खराबी और दोष दुरुस्त करने में देरी से उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ रही है, केवल बिजली की उपलब्धता ही मुद्दा नहीं है। इन सब आरोपों को लेकर शर्मा ने कहा कि देश और प्रदेश दोनों में बिजली की मांग ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गई है।
शर्मा ने कहा, 'समाजवादी दल की सरकार में 2012 से 2017 के बीच प्रदेश में बिजली की औसत मांग करीब 13,000 मेगावाट थी। आज यह 30,000 मेगावाट को पार कर गई है और हम पूरी मांग को पूरा कर रहे हैं। सपा और बसपा शासन में मांग और आपूर्ति में बड़ा अंतर था, जिससे शहर और गांव दोनों में तय और अघोषित कटौती होती थी। तब बिजली को लेकर प्रदर्शन और जनता का गुस्सा आम बात थी।'
विपक्ष पर निशाना साधते हुए ऊर्जा मंत्री ने कहा कि बिजली अब सुविधाजनक राजनीतिक मुद्दा बन गई है, लेकिन आलोचक अपने कार्यकाल की स्थिति को नजरअंदाज कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में मांग और आपूर्ति का कोई अंतर नहीं है। अधिकांश व्यवधान स्थानीय खराबी और पारेषण-वितरण तंत्र पर दबाव के कारण हो रहे हैं। उन्होंने कहा, 'बिजली ऐसा विषय है कि जैसे-जैसे उपलब्धता बढ़ती है, वैसे-वैसे उम्मीदें भी बढ़ती हैं। कुछ कटौती स्थानीय खराबी के कारण हो रही है, जो अक्सर तय भार और वास्तविक खपत में अंतर से अत्यधिक भार के कारण पैदा होती है। हम इसकी जांच कर रहे हैं।

